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अपने ही बुने जाल में फंस रहे निगम अफसर
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:43 AM IST
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भ्रष्टाचार में फंसते नजर आ रहे निगम अफसर
आउट सोर्सिंग पर सफाई के ठेके में की गई कई लापरवाही, जांच में हो रहा खुलासा
मेरठ। आउट सोर्सिंग पर शहर की सफाई के ठेके में बरती गई लापरवाही में निगम के अफसर फंसते ही जा रहे हैं। जांच में एक के बाद एक परत खुल रही है। जहां अनुबंध पत्र में एक साल की बजाय दो साल का पत्र जारी कर दिया गया वहीं नगर निगम ने श्रम विभाग से अलकनंदा के संबंध में जानकारी लेना भी मुनासिब नहीं समझा। जिसके कारण निगम के कई अधिकारी को इस मामले से जुड़ा होना माना जा रहा है।
अमर उजाला ने आउट सोर्सिंग पर सफाई के ठेके में गडबड़झाले का खुलासा किया था। जिसके बाद मामले पर जांच बैठ गई है। जांच कर रहे अपर आयुक्त राधेश्याम मिश्रा ने शहरी सफाई के ठेके से संबंधित सभी पत्रावली तलब कर ली हैं। फाइलों में अधिकारियों की कई लापरवाही भी सामने आ रही हैं। जिनमें अनुबंध के समय नियमों को ताक पर रखकर जारी करना, किसी भी नगरायुक्त द्वारा मूल फाइल को तलब न करना। लगातार करोड़ों का भुगतान किया जाने के साथ साथ अनुबंध के समय निगम प्रशासन द्वारा श्रम विभाग से अलकनंदा के पंजीकरण संबंधी जानकारी न लिया जाना शामिल है। इन सभी बिंदुओं पर नगर निगम के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी ने जहां पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी से स्पष्टीकरण ले लिया है वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन ने श्रम विभाग से अलकनंदा कंपनी के पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट कर ली है।
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आउट सोर्सिंग पर सफाई के ठेके में की गई कई लापरवाही, जांच में हो रहा खुलासा
मेरठ। आउट सोर्सिंग पर शहर की सफाई के ठेके में बरती गई लापरवाही में निगम के अफसर फंसते ही जा रहे हैं। जांच में एक के बाद एक परत खुल रही है। जहां अनुबंध पत्र में एक साल की बजाय दो साल का पत्र जारी कर दिया गया वहीं नगर निगम ने श्रम विभाग से अलकनंदा के संबंध में जानकारी लेना भी मुनासिब नहीं समझा। जिसके कारण निगम के कई अधिकारी को इस मामले से जुड़ा होना माना जा रहा है।
अमर उजाला ने आउट सोर्सिंग पर सफाई के ठेके में गडबड़झाले का खुलासा किया था। जिसके बाद मामले पर जांच बैठ गई है। जांच कर रहे अपर आयुक्त राधेश्याम मिश्रा ने शहरी सफाई के ठेके से संबंधित सभी पत्रावली तलब कर ली हैं। फाइलों में अधिकारियों की कई लापरवाही भी सामने आ रही हैं। जिनमें अनुबंध के समय नियमों को ताक पर रखकर जारी करना, किसी भी नगरायुक्त द्वारा मूल फाइल को तलब न करना। लगातार करोड़ों का भुगतान किया जाने के साथ साथ अनुबंध के समय निगम प्रशासन द्वारा श्रम विभाग से अलकनंदा के पंजीकरण संबंधी जानकारी न लिया जाना शामिल है। इन सभी बिंदुओं पर नगर निगम के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी ने जहां पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी से स्पष्टीकरण ले लिया है वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन ने श्रम विभाग से अलकनंदा कंपनी के पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट कर ली है।
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