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शिवरात्रि पर इस बार पड रहा है अद्भुत संयोग।
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अमर उजाला ब्यूरो
मवाना। बिबिया वाले मंदिर के पुजारी आचार्य संजय कृष्णा महाराज ने शिवरात्रि के संबंध में बताया कि इस बार अद्भुत संयोग पड़ रहा है। आचार्य संजय कृष्णा महाराज ने बताया कि इस बार शिवरात्रि श्रवण नक्षत्र में है। श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। जिस कारण धनिष्ठा व शिवयोग का अद्भुत संयोग है।
महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त
पूजन का शुभ मुहूर्त : सुबह 07:04 से दोपहर 15:20 तक।
शिवरात्रि पूजा मुहूर्त : निशीथ काल पूजा मुहूर्त - 24:07 से 24:57 बजे।
शिवरात्रि व्रत पारण समय : 06:46 से 15:26 बजे।
चतुर्दशी तिथि आरंभ : 4 मार्च 2019, सोमवार 16:28 बजे, चतुर्दशी तिथि समाप्त 5 मार्च 2019, मंगलवार 19:07 बजे।
महाराज ने बताया कि शिवरात्रि को लेकर बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। विवरण मिलता है कि भगवती पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए घनघोर तपस्या की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि महाशिवरात्रि को अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। वहीं गरुड़ पुराण में इस दिन के महत्व को लेकर एक अन्य कथा कही गई है। जिसके अनुसार इस दिन एक निषादराज अपने कुत्ते के साथ शिकार खेलने गया किन्तु उसे कोई शिकार नहीं मिला। वह थककर भूख-प्यास से परेशान हो एक तालाब के किनारे गया। जहां बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था। अपने शरीर को आराम देने के लिए उसने कुछ बिल्व-पत्र तोड़े, जो शिवलिंग पर भी गिर गए। अपने पैरों को साफ़ करने के लिए उसने उन पर तालाब का जल छिड़का, जिसकी कुछ बूंदें शिवलिंग पर भी जा गिरीं। ऐसा करते समय उसका एक तीर नीचे गिर गया। जिसे उठाने के लिए वह शिवलिंग के सामने झुका। इस तरह शिवरात्रि के दिन शिव-पूजन की पूरी प्रक्रिया उसने अनजाने में ही पूरी कर ली। मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे लेने आए, तो शिव के गणों ने उसकी रक्षा की और उन्हें भगा दिया। जब अज्ञानतावश महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर की पूजा का इतना अद्भुत फल है, तो समझ-बूझकर देवाधिदेव महादेव का पूजन करें।
उन्होंने बताया कि देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने वाला आस्था से परिपूर्ण महाशिवरात्रि का व्रत सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो शख्स भगवान शिव में आस्था रखते हैं। वह भोले के महाशिवरात्रि व्रत को जरूर करते हैं। हिंदू धर्म में, महाशिवरात्रि व्रत, पूजा, कथा और उपायों का खास महत्व होता है। महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत करने और भगवान शिव को जल चढ़ाने का खास महत्व होता है। इस दिन व्रती शिवलिंग पर जल, भांग धतूरा, फूल इत्यादि चढ़ा कर पूजा करते हैं। इस दिन व्रत करने व विधिवत तरीके से पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। शिवपुराण में पूजन के विधि के बारे में बताया है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद घर में पूजा करने के साथ साथ मंदिर में भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन शिवलिंग को जल अर्पित करने के साथ साथ पूजा सामग्री भी अर्पित करें !
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भगवान शिव ऐसे देवता हैं जो महज लौटे भर जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यदि आपके किसी परिजन के विवाह में समस्या आ रही हैं तो आप महाशिवरात्रि पर कच्ची हल्दी युक्त जल से शिव का अभिषेक कर सकते हैं। इस उपाय से शीघ्र विवाह का संयोग बनता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर भक्तिभाव से शिवलिंग पर शहद से अभिषेक से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन से कर्ज का मर्ज भी दूर हो जाता है और परिजनों के बीच सामंजस्य बना रहता है। महाशिवरात्रि पर शिव का दही से अभिषेक करने पर जीवन से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। साथ ही साधक को वाहन सुख की प्राप्ति होती है।
जीवन से जुड़े तमाम तरह के दु:खों को दूर करने के लिए महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का किसी पवित्र नदी के जल से या गंगा जल से ऽॐ नम: शिवायऽ मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें धन में वृद्धि और लंबी आयु पाने के महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का गाय के घी से अभिषेक करें। इस पूजन से भगवान शिव प्रसन्न होंगे और सभी मनोकामनाओं को शीघ्र पूर्ण करेंगे।
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मवाना। बिबिया वाले मंदिर के पुजारी आचार्य संजय कृष्णा महाराज ने शिवरात्रि के संबंध में बताया कि इस बार अद्भुत संयोग पड़ रहा है। आचार्य संजय कृष्णा महाराज ने बताया कि इस बार शिवरात्रि श्रवण नक्षत्र में है। श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। जिस कारण धनिष्ठा व शिवयोग का अद्भुत संयोग है।
महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त
पूजन का शुभ मुहूर्त : सुबह 07:04 से दोपहर 15:20 तक।
शिवरात्रि पूजा मुहूर्त : निशीथ काल पूजा मुहूर्त - 24:07 से 24:57 बजे।
शिवरात्रि व्रत पारण समय : 06:46 से 15:26 बजे।
चतुर्दशी तिथि आरंभ : 4 मार्च 2019, सोमवार 16:28 बजे, चतुर्दशी तिथि समाप्त 5 मार्च 2019, मंगलवार 19:07 बजे।
महाराज ने बताया कि शिवरात्रि को लेकर बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। विवरण मिलता है कि भगवती पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए घनघोर तपस्या की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि महाशिवरात्रि को अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। वहीं गरुड़ पुराण में इस दिन के महत्व को लेकर एक अन्य कथा कही गई है। जिसके अनुसार इस दिन एक निषादराज अपने कुत्ते के साथ शिकार खेलने गया किन्तु उसे कोई शिकार नहीं मिला। वह थककर भूख-प्यास से परेशान हो एक तालाब के किनारे गया। जहां बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था। अपने शरीर को आराम देने के लिए उसने कुछ बिल्व-पत्र तोड़े, जो शिवलिंग पर भी गिर गए। अपने पैरों को साफ़ करने के लिए उसने उन पर तालाब का जल छिड़का, जिसकी कुछ बूंदें शिवलिंग पर भी जा गिरीं। ऐसा करते समय उसका एक तीर नीचे गिर गया। जिसे उठाने के लिए वह शिवलिंग के सामने झुका। इस तरह शिवरात्रि के दिन शिव-पूजन की पूरी प्रक्रिया उसने अनजाने में ही पूरी कर ली। मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे लेने आए, तो शिव के गणों ने उसकी रक्षा की और उन्हें भगा दिया। जब अज्ञानतावश महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर की पूजा का इतना अद्भुत फल है, तो समझ-बूझकर देवाधिदेव महादेव का पूजन करें।
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उन्होंने बताया कि देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने वाला आस्था से परिपूर्ण महाशिवरात्रि का व्रत सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो शख्स भगवान शिव में आस्था रखते हैं। वह भोले के महाशिवरात्रि व्रत को जरूर करते हैं। हिंदू धर्म में, महाशिवरात्रि व्रत, पूजा, कथा और उपायों का खास महत्व होता है। महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत करने और भगवान शिव को जल चढ़ाने का खास महत्व होता है। इस दिन व्रती शिवलिंग पर जल, भांग धतूरा, फूल इत्यादि चढ़ा कर पूजा करते हैं। इस दिन व्रत करने व विधिवत तरीके से पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। शिवपुराण में पूजन के विधि के बारे में बताया है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद घर में पूजा करने के साथ साथ मंदिर में भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन शिवलिंग को जल अर्पित करने के साथ साथ पूजा सामग्री भी अर्पित करें !
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भगवान शिव ऐसे देवता हैं जो महज लौटे भर जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यदि आपके किसी परिजन के विवाह में समस्या आ रही हैं तो आप महाशिवरात्रि पर कच्ची हल्दी युक्त जल से शिव का अभिषेक कर सकते हैं। इस उपाय से शीघ्र विवाह का संयोग बनता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर भक्तिभाव से शिवलिंग पर शहद से अभिषेक से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन से कर्ज का मर्ज भी दूर हो जाता है और परिजनों के बीच सामंजस्य बना रहता है। महाशिवरात्रि पर शिव का दही से अभिषेक करने पर जीवन से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। साथ ही साधक को वाहन सुख की प्राप्ति होती है।
जीवन से जुड़े तमाम तरह के दु:खों को दूर करने के लिए महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का किसी पवित्र नदी के जल से या गंगा जल से ऽॐ नम: शिवायऽ मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें धन में वृद्धि और लंबी आयु पाने के महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का गाय के घी से अभिषेक करें। इस पूजन से भगवान शिव प्रसन्न होंगे और सभी मनोकामनाओं को शीघ्र पूर्ण करेंगे।