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Updated Mon, 11 Dec 2017 02:14 AM IST
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जंजीरों में कैद 90 साल की वृद्धा पांच माह बाद मुक्त
मेरठ। उम्र के आखिरी पड़ाव में 90 वर्षीय वृद्धा को इस तरह जंजीर में कै द होकर जीना पड़ेगा, इसका अंदाजा भी नहीं था। पिछले पांच माह से इस तरह कैद करने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद का बेटा और पुत्रवधू ही थी। मामला अफसरों तक पहुंचा तो रविवार को पुलिस ने जंजीर खुलवाकर उसे बंधनमुक्त करा दिया।
एसपी देहात राजेश कुमार के मुताबिक हापुड़ रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी निवासी वृद्धा के पति की सरकारी नौकरी थी तो उन्हें हर माह पेंशन भी मिलती है। बेटा और पुत्रवधू भी देखरेख करते थे। लेकिन पांच माह पहले वृद्धा को बीमारी हुई तो वह चारपाई पर ही रहने लगी।
आरोप है कि बेटे और पुत्रवधू ने एक पैर में जंजीर बांधकर रखना शुरू कर दिया। जिससे वृद्धा कहीं घर से बाहर न निकल जाए। वृद्धा से पड़ोसी और रिश्तेदारों को भी नहीं मिलने दिया। वृद्धा कैद की जिंदगी जी रही थी जिन्हें न तो समय से रोटी दी जाती और न ही पानी। कभी जंजीर को चारपाई से बांधा जाता तो कभी ऑटो से बांध दिया जाता। जब कोई इसका विरोध करता तो मानसिक रूप से कमजोर बताकर कहा जाता कि वृद्ध घर से बाहर चली जाएगी। वृद्धा का बेटा कचहरी में मुंशी है। एसपी देहात के निर्देश पर एसओ खरखौदा और बिजली बंबा चौकी इंचार्ज ने वृद्धा की पुत्रवधू के सामने ही वृद्धा के पैर से जंजीर खोली। एसओ खरखौदा का कहना है कि बेटे ने यही बताया था कि वृद्धा कुछ समय पहले नाली में गिर गई थी। घर से बाहर न निकलें, इसलिए कुछ घंटों के लिए जंजीर बांध देते थे। समय से रोटी या पानी न देने का आरोप गलत है।
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- कांशीराम कॉलोनी का मामला, पुत्र और पुत्रवधू ने कर रखा था कैद
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मेरठ। उम्र के आखिरी पड़ाव में 90 वर्षीय वृद्धा को इस तरह जंजीर में कै द होकर जीना पड़ेगा, इसका अंदाजा भी नहीं था। पिछले पांच माह से इस तरह कैद करने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद का बेटा और पुत्रवधू ही थी। मामला अफसरों तक पहुंचा तो रविवार को पुलिस ने जंजीर खुलवाकर उसे बंधनमुक्त करा दिया।
एसपी देहात राजेश कुमार के मुताबिक हापुड़ रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी निवासी वृद्धा के पति की सरकारी नौकरी थी तो उन्हें हर माह पेंशन भी मिलती है। बेटा और पुत्रवधू भी देखरेख करते थे। लेकिन पांच माह पहले वृद्धा को बीमारी हुई तो वह चारपाई पर ही रहने लगी।
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आरोप है कि बेटे और पुत्रवधू ने एक पैर में जंजीर बांधकर रखना शुरू कर दिया। जिससे वृद्धा कहीं घर से बाहर न निकल जाए। वृद्धा से पड़ोसी और रिश्तेदारों को भी नहीं मिलने दिया। वृद्धा कैद की जिंदगी जी रही थी जिन्हें न तो समय से रोटी दी जाती और न ही पानी। कभी जंजीर को चारपाई से बांधा जाता तो कभी ऑटो से बांध दिया जाता। जब कोई इसका विरोध करता तो मानसिक रूप से कमजोर बताकर कहा जाता कि वृद्ध घर से बाहर चली जाएगी। वृद्धा का बेटा कचहरी में मुंशी है। एसपी देहात के निर्देश पर एसओ खरखौदा और बिजली बंबा चौकी इंचार्ज ने वृद्धा की पुत्रवधू के सामने ही वृद्धा के पैर से जंजीर खोली। एसओ खरखौदा का कहना है कि बेटे ने यही बताया था कि वृद्धा कुछ समय पहले नाली में गिर गई थी। घर से बाहर न निकलें, इसलिए कुछ घंटों के लिए जंजीर बांध देते थे। समय से रोटी या पानी न देने का आरोप गलत है।
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- कांशीराम कॉलोनी का मामला, पुत्र और पुत्रवधू ने कर रखा था कैद