फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   उधर के डीजल से चलेंगी निगम की गाड़ी

उधर के डीजल से चलेंगी निगम की गाड़ी

Sat, 23 Mar 2019 02:23 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Mar 2019 02:23 AM IST
विज्ञापन
उधर के डीजल से चलेंगी निगम की गाड़ी
चुनाव के चक्कर में ठप हुई राजस्व वसूली
विज्ञापन

आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम में कर्मचारियों के मानदेय के पड़ेंगे लाले
उधार डीजल लेकर चलाने पड़ेंगे कूड़ा वाहन, छह माह तक नहीं सुधार के आसार
चुनाव के चलते शहर में बूथ बनाने में जुटे नगर निगम अधिकारी और कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
वित्तीय वर्ष खत्म होने को है, लेकिन नगर निगम राजस्व वसूली लक्ष्य से खासा पीछे चल रहा है। सूत्रों की माने तो अभी तक आधी राजस्व वसूली भी नहीं हो पाई है। वहीं वसूली के अंतिम माह में भी निगम खजाने में धन आने के आसार नहीं हैं, क्योंकि सभी कर्मचारी और अधिकारी चुनाव कार्यों में जुटे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में नगर निगम के आउटसोर्स कर्मचारियों को मानदेय देने के लिए भी पैसा नहीं होगा। सफाई कार्यों में लगे वाहनों के लिए भी उधार में डीजल की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
नगर निगम की आय का सबसे बड़ा साधन हाउस और वाटर टैक्स है। इस टैक्स से नगर निगम अभी तक पूरे साल में 25-30 करोड़ ही जमा कर पाता है। जबकि निगम पार्षद इस आय को बढ़ाकर 100 करोड़ पहुंचाने का सुझाव देते रहे हैं। इतना ही नहीं पार्षदों ने तो अपने अपने वार्ड में हाउस टैक्स से अछूते भवनों पर टैक्स लगाने की बात कही। लेकिन निगम अधिकारी व कर्मचारी इस पर अमल ही नहीं कर पाए। हालात यह है कि नगर निगम का खजाना खाली हो चुका है। आने वाले छह माह तक नगर निगम आर्थिक तंगी से जूझता रहेगा।
विज्ञापन

वाहनों के लिए चाहिए पांच करोड़ प्रतिमाह
नगर निगम अधिकारियों के वाहन, कूड़ा गाड़ी, सीवर जेटिंग मशीन, जनरेटर आदि के डीजल पर प्रतिमाह एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा वाहनों के रखरखाव, चालक और आउट सोर्सिंग सफाई कर्मचारियों के मानदेय पर करीब चार करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च होते हैं। कुल मिलाकर प्रतिमाह पांच करोड़ का खर्चा है। लेकिन निगम की तिजोरी के हालात बदतर हैं। इसके पीछे राजस्व वसूली का न होना बताया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

राजस्व वसूली वाले चले चुनाव में
निगम राजस्व वसूली वाले अधिकारी व कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगा दिया गया है। इस कारण शहर के बड़े बकाएदार चुप्पी साधे बैठे हैं। कुछ लोगों को चुनाव में हाउस टैक्स माफी तक की उम्मीद थी। इस कारण समय रहते कई भवन स्वामियों ने हाउस टैक्स नहीं जमा किया। नगर निगम ने भले ही 20 प्रतिशत छूट का एलान किया हुआ है, लेकिन उसका असर भवन स्वामियों पर नहीं दिख रहा है।


ये हैं निगम की आय के साधन
- लोगों ने मिलने वाला हाउस और पानी टैक्स।
- नगर निगम की मार्केट और होर्डिंग से किराया वसूली।
- वाहन पार्किंग और स्टांप ड्यूटी से होने वाली आय।

शहर की सफाई पर प्रतिमाह खर्च
निगम की गाड़ियों का डीजल खर्च 90 लाख।
गाड़ी चालकोें के वेतन पर खर्च 27 लाख।
आउट सोर्स सफाई कर्मचारियों के वेतन पर खर्च तीन करोड़।
अन्य आउट सोर्स कर्मचारियों के वेतन पर खर्च 16 लाख रुपये।

वर्जन====
राजस्व वसूली जारी है। 31 मार्च तक लक्ष्य पूरा कर लेंगे। निगम ने भवन स्वामियों को हाउस टैक्स में 20 प्रतिशत की छूट दे रखी है। इसका फायदा उठाने के लिए भवन स्वामी निगम में हाउस टैक्स जमा कर रहे हैं। यह बात सही है कि चुनाव संबंधी कार्य शुरू हो गए हैं।
-राजेश कुमार, कर निर्धारण अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed