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फीस की फांस, पूरी नहीं हुई पैरेंट्स की आस

Fri, 13 Apr 2018 02:48 AM IST
Updated Fri, 13 Apr 2018 02:48 AM IST
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फीस की फांस, पूरी नहीं हुई पैरेंट्स की आस
फीस की फांस, पूरी नहीं हुई अभिभावकों की आस
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मेरठ। निजी विद्यालयों में चली आ रही फीस पर तकरार को लेकर सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है। इसके तहत स्कूल प्रबंधन करीब नौ से 10 प्रतिशत फीस वृद्धि कर सकेंगे। यह अध्यादेश क्षेत्रीय संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय आ गया है। उनके यहां से जिला विद्यालय निरीक्षक के जरिए स्कूलों के प्रबंधन तक पहुंचाया जाएगा।
अध्यादेश में कहा गया है कि विद्यालय के प्रत्येक वर्ग, कक्षा के लिए स्वयं अपने वार्षिक शुल्क में पुनरीक्षण कर सकता है, लेकिन शुल्क वृद्धि नए उपलब्ध वार्षिक बढ़े हुए कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) और छात्र से वसूल किए गए पांच प्रतिशत शुल्क से अधिक नहीं होगी। इसके लिए शुल्क वृद्धि की गणना वर्ष 2015-16 की शुल्क संरचना को आधार वर्ष के रूप में मानते हुए की जाएगी। इसे इस तरह समझ सकते हैं कि अगर पहले बच्चे की फीस एक लाख रुपये जाती थी तो अब इसे एक लाख नौ से 10 हजार रुपये तक वसूला जा सकेगा, जबकि अभिभावक उम्मीद लगाए थे कि फीस में काफी हद तक कटौती की जाएगी।
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इससे पहले बने नियम शून्य माने जाएंगे
यह अध्यादेश उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश, 2018 कहा जाएगा। इससे अब करीब नौ से 10 प्रतिशत तक फीस वृद्धि की जा सकेगी। अध्यादेश में दिए गए निर्देश 4 (1) में इसका उल्लेख किया गया है। इससे पहले बने नियम शून्य माने जाएंगे।
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- दिव्यकांत शुक्ल, क्षेत्रीय संयुक्त शिक्षा निदेशक

निगरानी के लिए छह सदस्य कमेटी की जाएगी गठित
स्कूलों में फीस को लेकर की गई इस व्यवस्था की निगरानी के लिए छह सदस्य कमेटी का गठन किया जाएगा, जिससे इसे सही से अमली जामा पहनाया जा सके। इसकी अध्यक्षता कमिश्नर करेंगे। इनके अलावा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता स्तर का कोई अभियंता, राज्य वित्त एवं लेखा सेवा का वरिष्ठ अधिकारी, अभिभावक शिक्षक एसोसिएशन का एक अभिभावक और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक या वित्तपोषित विद्यालय का कोई प्रधानाचार्य, प्रबंधक या प्रशासक इसमें रहेंगे।

खास बातें:
स्कूल प्रबंधक नौ से 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकेंगे फीस
संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय आया अध्यादेश
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