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धड़ल्ले से फल फूल रहा है नकली मावा एवं मिठाई का कारोबार
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धड़ल्ले से फल फूल रहा है नकली मावा एवं मिठाई का कारोबार
माछरा। क्षेत्र के गांवों में मिलावटी मावा और मिठाई का कारोबार क्षेत्र में फैल रहा है। इसके खाने से क्षेत्र के लोग बीमार हो रहे हैं। वहीं, खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने शिकायत करने पर शीघ्र ही जांचकर सैंपल भरे जाने का आश्वासन दिया है।
मुंडाली एवं किठौर थाना क्षेत्र के गांवों मे धड़ल्ले से मिलावटी मावा एवं सफेद रसगुल्ले बनाने का कारोबार फैल रहा है। इनकी क्षेत्र की दुकानों पर आपूर्ति की जाती है। कुछ मिठाई ऐसी हैं जो दूध से तैयार होती हैं। इनके बनाने की लागत 160 ये 200 रुपये प्रति किलोग्राम से कम नहीं है। जानकारों का कहना है कि दूध के स्थान पर पाउडर, अरारोट और सूजी को मिलाकर बंगाली मिठाई तैयार की जा रही है। त्योहारों पर मिलावटी मिठाई एवं अन्य सामान की काफी बिक्री होती है। दूध की आपूर्ति पूर्ववत रहती है, लेकिन मिठाई, मावा व पनीर, सफेद रसगुल्ले की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मांग को पूरा करने मे मिलावटी मावा धड़ल्ले से प्रयोग किया जाता है।
मुंडाली थाना क्षेत्र के गांव जिसोरा, रछौती आदि में कुछ स्थानों पर मिलावटी मावा धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। वहीं, जिसोरा में भी कुछ जगह मिलावटी सफेद बंगाली रसगुल्ला बनाया जा रहा है। किठौर थाना क्षेत्र के गांव अमरपुर, माछरा तथा परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के गांव गोविंदपुरी में भी कुछ स्थानों पर नकली मावा बनाया जाता है। क्षेत्र के देवेंद्र कुमार समेत अन्य लोगों ने इसकी शिकायत जिला खाद्य अधिकारी मेरठ से की थी। मवाना तहसील, मेरठ सदर तहसील के खाद्य सुरक्षा अधिकारी परमवीर सिंह एवं अनिल गंगवार का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं होने दी जाएगी। इनसे जनमानस के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। शीघ्र ही मावा एवं रसगुल्ला का सैंपल भरे जाएंगे।
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माछरा। क्षेत्र के गांवों में मिलावटी मावा और मिठाई का कारोबार क्षेत्र में फैल रहा है। इसके खाने से क्षेत्र के लोग बीमार हो रहे हैं। वहीं, खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने शिकायत करने पर शीघ्र ही जांचकर सैंपल भरे जाने का आश्वासन दिया है।
मुंडाली एवं किठौर थाना क्षेत्र के गांवों मे धड़ल्ले से मिलावटी मावा एवं सफेद रसगुल्ले बनाने का कारोबार फैल रहा है। इनकी क्षेत्र की दुकानों पर आपूर्ति की जाती है। कुछ मिठाई ऐसी हैं जो दूध से तैयार होती हैं। इनके बनाने की लागत 160 ये 200 रुपये प्रति किलोग्राम से कम नहीं है। जानकारों का कहना है कि दूध के स्थान पर पाउडर, अरारोट और सूजी को मिलाकर बंगाली मिठाई तैयार की जा रही है। त्योहारों पर मिलावटी मिठाई एवं अन्य सामान की काफी बिक्री होती है। दूध की आपूर्ति पूर्ववत रहती है, लेकिन मिठाई, मावा व पनीर, सफेद रसगुल्ले की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मांग को पूरा करने मे मिलावटी मावा धड़ल्ले से प्रयोग किया जाता है।
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मुंडाली थाना क्षेत्र के गांव जिसोरा, रछौती आदि में कुछ स्थानों पर मिलावटी मावा धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। वहीं, जिसोरा में भी कुछ जगह मिलावटी सफेद बंगाली रसगुल्ला बनाया जा रहा है। किठौर थाना क्षेत्र के गांव अमरपुर, माछरा तथा परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के गांव गोविंदपुरी में भी कुछ स्थानों पर नकली मावा बनाया जाता है। क्षेत्र के देवेंद्र कुमार समेत अन्य लोगों ने इसकी शिकायत जिला खाद्य अधिकारी मेरठ से की थी। मवाना तहसील, मेरठ सदर तहसील के खाद्य सुरक्षा अधिकारी परमवीर सिंह एवं अनिल गंगवार का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं होने दी जाएगी। इनसे जनमानस के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। शीघ्र ही मावा एवं रसगुल्ला का सैंपल भरे जाएंगे।
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