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मेडिकल में मरीज के दोनों कोल्हू का सफल प्रत्यारोपण
Updated Fri, 05 Jan 2018 01:58 AM IST
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मेडिकल में मरीज के दोनों कूल्हों का सफल प्रत्यारोपण
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में जटिल रोग से पीड़ित मरीज इरफान (18) के दोनों कूल्हों का सफल प्रत्यारोपण किया गया है। प्रत्यारोपण करने वाली टीम का कहना है कि मेडिकल में 20 साल से कम उम्र के मरीज का यह पहला प्रत्यारोपण मामला है, क्योंकि यह अमूमन 40 साल के बाद किया जाता है।
इरफान बिहार केमोहनर खास वैशाली का रहने वाला है। वह पिछले 10 सालों से ज्यूविनाइल ईडीओपैथिक अर्थराइटिस बीमारी से पीड़ित था। इसका इलाज वहीं स्थानीय अस्पताल में चल रहा था। मरीज केसभी जोड़ों में दर्द था और तीन सालों से उसके दोनों कूल्हों में दर्द की वजह से वह चलने-फिरने में असमर्थ था। इसी दौरान उसे एम्स पटना में दिखाया गया, जहां से उसे दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया। एम्स दिल्ली में उसके दोनों कूल्हे बदलने की सलाह दी गई। वहां उसे दो साल बाद की ऑपरेशन की तारीख दी गई। फिर मरीज को केजीएमसी लखनऊ और अन्य बड़े अस्पतालों में दिखाया गया, जहां से किसी डॉक्टर ने मरीज को एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में दिखाने की सलाह दी। फिर मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर चिकित्सकों की टीम द्वारा सफलतापूर्वक दोनों कोल्हू का प्रत्यारोपण किया गया। अब मरीज बिना किसी परेशानी के चल फिर सकता है।
इस ऑपरेशन में आर्थोपेडिक्स प्रोफेसर डॉ. परवेज अहमद, लेक्चरर डॉ. शशांक जिंदल, बेहोशी केडॉ. तुहिन और डॉ. विपिन धामा आदि का सहयोग रहा। डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि इस तरह केऑपरेशन में प्राइवेट में चार से पांच लाख का खर्च आता है, मगर बहुत ही कम खर्च में यह ऑपरेशन हुआ है, इतनी कम उम्र का मेडिकल का कोल्हू के प्रत्यारोपण का यह पहला केस है। मरीज को जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एसकेगर्ग और एसआईसी डॉ. अजीत चौधरी ने टीम को बधाई दी है।
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छूट गई पढ़ाई
इरफान 12वीं क्लास में पढ़ रहा था, मगर इस बीमारी के कारण उसकी पढ़ाई भी छूट गई। उसे स्कूल में जाने में परेशानी होती थी। इरफान ने बताया कि अब वह अपनी पढ़ाई भी कर पाएगा।
खास बात
20 साल से कम उम्र के मरीज का मेडिकल में पहला प्रत्यारोपण
दिल्ली एम्स में दी गई थी दो साल बाद की तारीख
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में जटिल रोग से पीड़ित मरीज इरफान (18) के दोनों कूल्हों का सफल प्रत्यारोपण किया गया है। प्रत्यारोपण करने वाली टीम का कहना है कि मेडिकल में 20 साल से कम उम्र के मरीज का यह पहला प्रत्यारोपण मामला है, क्योंकि यह अमूमन 40 साल के बाद किया जाता है।
इरफान बिहार केमोहनर खास वैशाली का रहने वाला है। वह पिछले 10 सालों से ज्यूविनाइल ईडीओपैथिक अर्थराइटिस बीमारी से पीड़ित था। इसका इलाज वहीं स्थानीय अस्पताल में चल रहा था। मरीज केसभी जोड़ों में दर्द था और तीन सालों से उसके दोनों कूल्हों में दर्द की वजह से वह चलने-फिरने में असमर्थ था। इसी दौरान उसे एम्स पटना में दिखाया गया, जहां से उसे दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया। एम्स दिल्ली में उसके दोनों कूल्हे बदलने की सलाह दी गई। वहां उसे दो साल बाद की ऑपरेशन की तारीख दी गई। फिर मरीज को केजीएमसी लखनऊ और अन्य बड़े अस्पतालों में दिखाया गया, जहां से किसी डॉक्टर ने मरीज को एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में दिखाने की सलाह दी। फिर मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर चिकित्सकों की टीम द्वारा सफलतापूर्वक दोनों कोल्हू का प्रत्यारोपण किया गया। अब मरीज बिना किसी परेशानी के चल फिर सकता है।
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इस ऑपरेशन में आर्थोपेडिक्स प्रोफेसर डॉ. परवेज अहमद, लेक्चरर डॉ. शशांक जिंदल, बेहोशी केडॉ. तुहिन और डॉ. विपिन धामा आदि का सहयोग रहा। डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि इस तरह केऑपरेशन में प्राइवेट में चार से पांच लाख का खर्च आता है, मगर बहुत ही कम खर्च में यह ऑपरेशन हुआ है, इतनी कम उम्र का मेडिकल का कोल्हू के प्रत्यारोपण का यह पहला केस है। मरीज को जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एसकेगर्ग और एसआईसी डॉ. अजीत चौधरी ने टीम को बधाई दी है।
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छूट गई पढ़ाई
इरफान 12वीं क्लास में पढ़ रहा था, मगर इस बीमारी के कारण उसकी पढ़ाई भी छूट गई। उसे स्कूल में जाने में परेशानी होती थी। इरफान ने बताया कि अब वह अपनी पढ़ाई भी कर पाएगा।
खास बात
20 साल से कम उम्र के मरीज का मेडिकल में पहला प्रत्यारोपण
दिल्ली एम्स में दी गई थी दो साल बाद की तारीख