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टेक्निशियन और रेडियोलाजिस्ट के अभाव में बंद पड़ा एक्सरे और सोनोग्राफी
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मऊ। शासन की मंशा भले ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने की है, लेकिन टेक्निशियन और रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में मरीजों को एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही। जबकि जिला और महिला अस्पताल में एक्सरे से लेकर सोनोग्राफी की मशीने उपलब्ध है। इस कमी का लाभ प्राइवेट में संचालित एक्सरे और सोनोग्राफी वाले उठा रहें है। उपचार कराने के लिए गरीब मरीज छह से आठ सौ रुपया खर्च कर बाहर से अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी कराने को विवश है। सरकारी सुविधा ठप होने का लाभ बाहर के अल्ट्रासाउंड सेंटरों की चांदी कट रही है। वहीं दोनों अस्पतालों में लाखों की लागत से लगाई गई मशीनें शोपीस बनी हुई है।
जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए जिला मुख्यालय पर 100 बेड का सरकारी अस्पताल स्थापित है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने के लिए तीन वर्ष पूर्व रेडियोलॉजिस्ट डॉ. केएन पांडेय की तैनाती की थी। वर्ष 2018 में उनका तबादला हो गया, लेकिन उनके स्थान पर कोई नया रेडियोलाजिस्ट नहीं आया। इस क्रम में जिला महिला अस्पताल में तीन माह पूर्व संविदा पर रखे गए रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एसडी गौतम का एग्रीमेंट पूरा होने पर उनकी सेवा समाप्त हो गई। रेडियोलाजिस्ट न होने से अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही। जबकि रेडियोलॉजिस्ट के रहने पर प्रतिदिन 100 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासांउड होता था।
वहीं जिला अस्पताल में बीते दो साल से ज्यादा समय से रेडियोलॉजिस्ट न होने से पुरुष मरीजों के अलावा मेडिको लीगल के मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मेडिको लीगल के लिए मरीजों को 70 किमी दूर बलिया जिला जाने को मजबूर है। वहीं सामान्य मरीज निजी लैब में 600 से 800 रुपये में जांच कराने को मजबूर हो रहे है। जिले के मुख्य दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट के न होने से अल्ट्रासाउंड वार्ड बंद पड़ा है और मशीन धूल फांक रही है।
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सूत्रों की माने तो विभागीय अधिकारियों का मानना है कि अन्य सीमावर्ती जिलों से एकाध रेडियो लाजिस्ट मऊ में आ जाए तो व्यवस्था सुधर जाएगी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृजकुमार ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना तो करना पड़ ही रहा है। इस समस्या को दूर करने और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
मरीज बोले, इससे बेहतर निजी अस्पताल में कराए उपचार
मऊ। जिला महिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंची कहिनौर निवासी रीना कुशवाहा ने कहाकि वह नि:शुल्क जांच कराने लिए पहुंची थी, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से उसने बाहर जांच कराया। वहीं यहीं मुंशीपुरा से आई लक्ष्मी, शाहपुर निवासी प्रमिला, सुजाता ने दोहराते हुए कहा कि इससे अच्छा तो निजी अस्पताल में वो जांच कराए। कम से कम उन्हें पहले सरकारी अस्पताल में परामर्श फिर जांच कराने के लिए निजी लैब के लिए चक्कर नहीं काटना होगा।
जिम्मेदार बेपरवाह, दलालों की कट रही हैं चांदी
मऊ। जिले के दोनों बड़ी सरकारी अस्पताल मध्यम तथा गरीब वर्ग की बेहतर चिकित्सीय सुविधा की आखिरी उम्मीद है। जब यहां मरीज पहुंच रहे तो रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते उन्हें मजबूरन बाहर से जांच कराने को बाध्य होना पड़ रहा है। दोनों अस्पतालों में ओपीडी शुरू होने से पहले ओपीडी खत्म होने तक दलालों की सक्रियता रहती है। जहां किसी चिकित्सक ने जांच लिखा नहीं, दलाल मरीज के पास पहुंचकर उन्हें अपने साथ निजी लैब में ले जाते है। कई बार मरीज जिम्मेदारों को इस समस्या के बारे में अवगत करा चुके हैं, बावजूद जिम्मेदार इस समस्या को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए जिला मुख्यालय पर 100 बेड का सरकारी अस्पताल स्थापित है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने के लिए तीन वर्ष पूर्व रेडियोलॉजिस्ट डॉ. केएन पांडेय की तैनाती की थी। वर्ष 2018 में उनका तबादला हो गया, लेकिन उनके स्थान पर कोई नया रेडियोलाजिस्ट नहीं आया। इस क्रम में जिला महिला अस्पताल में तीन माह पूर्व संविदा पर रखे गए रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एसडी गौतम का एग्रीमेंट पूरा होने पर उनकी सेवा समाप्त हो गई। रेडियोलाजिस्ट न होने से अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही। जबकि रेडियोलॉजिस्ट के रहने पर प्रतिदिन 100 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासांउड होता था।
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वहीं जिला अस्पताल में बीते दो साल से ज्यादा समय से रेडियोलॉजिस्ट न होने से पुरुष मरीजों के अलावा मेडिको लीगल के मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मेडिको लीगल के लिए मरीजों को 70 किमी दूर बलिया जिला जाने को मजबूर है। वहीं सामान्य मरीज निजी लैब में 600 से 800 रुपये में जांच कराने को मजबूर हो रहे है। जिले के मुख्य दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट के न होने से अल्ट्रासाउंड वार्ड बंद पड़ा है और मशीन धूल फांक रही है।
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सूत्रों की माने तो विभागीय अधिकारियों का मानना है कि अन्य सीमावर्ती जिलों से एकाध रेडियो लाजिस्ट मऊ में आ जाए तो व्यवस्था सुधर जाएगी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृजकुमार ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना तो करना पड़ ही रहा है। इस समस्या को दूर करने और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
मरीज बोले, इससे बेहतर निजी अस्पताल में कराए उपचार
मऊ। जिला महिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंची कहिनौर निवासी रीना कुशवाहा ने कहाकि वह नि:शुल्क जांच कराने लिए पहुंची थी, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से उसने बाहर जांच कराया। वहीं यहीं मुंशीपुरा से आई लक्ष्मी, शाहपुर निवासी प्रमिला, सुजाता ने दोहराते हुए कहा कि इससे अच्छा तो निजी अस्पताल में वो जांच कराए। कम से कम उन्हें पहले सरकारी अस्पताल में परामर्श फिर जांच कराने के लिए निजी लैब के लिए चक्कर नहीं काटना होगा।
जिम्मेदार बेपरवाह, दलालों की कट रही हैं चांदी
मऊ। जिले के दोनों बड़ी सरकारी अस्पताल मध्यम तथा गरीब वर्ग की बेहतर चिकित्सीय सुविधा की आखिरी उम्मीद है। जब यहां मरीज पहुंच रहे तो रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते उन्हें मजबूरन बाहर से जांच कराने को बाध्य होना पड़ रहा है। दोनों अस्पतालों में ओपीडी शुरू होने से पहले ओपीडी खत्म होने तक दलालों की सक्रियता रहती है। जहां किसी चिकित्सक ने जांच लिखा नहीं, दलाल मरीज के पास पहुंचकर उन्हें अपने साथ निजी लैब में ले जाते है। कई बार मरीज जिम्मेदारों को इस समस्या के बारे में अवगत करा चुके हैं, बावजूद जिम्मेदार इस समस्या को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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