मऊ। जिले के विभिन्न इलाकों में बुधवार को झमाझम बारिश हुई। इससे जहां उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिली तो वहीं किसान भी खुश हो उठे। बारिश धान की फसलों के लिए फायदेमंद साबित होगी। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पानी में डूबी फसलों में रोग लग सकता है। उधर, बरसात से निचले इलाकों में पानी भर गया। दिनभर बादलों की आवाजाही से मौसम सुहावना रहा। कई दिनों से तेज धूप और गर्मी ने लोगों को परेशान कर रखा था। मंगलवार की शाम से ही मौसम मेें बदलाव दिखा। रात से ही हल्की बारिश शुरू हो गई। बुधवार की सुुबह भी रुक-रुक कर सुबह 11 बजे तक झमाझम बारिश होती रही। मौसम बदलने से अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी। बारिश से नगर के निचले इलाकों भीटी, निजामुद्दीनपुरा, रघुनाथपुरा, मुुंशीपुरा, चांदपुरा सहित कई मुहल्लों तथा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के निचले इलाकों में जलजमाव ने परेशान किया। क्षतिग्रस्त सड़कों से गुजरना बेहद कष्टकारी रहा। रतनपुुरा: क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में झमाझम बारिश हुई। बाजार में जगह-जगह जलजमाव से आवागमन में बाधा आई। जबकि किसान बारिश से खुश दिखे। परदहां ताजोपुर निवासी किसान हरिंद्र सिंह, शशिकांत सिंह, कहिनौर के किसान रामजन्म यादव का कहना था कि धान की की फसल के खेत में नमी खत्म हो रही थी। बारिश होने से फसल को फायदा मिलेगा। अभी तेज बारिश की जरुरत है। वहीं दोहरीघाट, मधुबन कोपागंज सहित अन्य क्षेत्रों में जलजमाव प्रभावित क्षेत्रों के किसान बारिश को लेकर मायूस नजर आए। उप निदेशक कृषि एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि ऊपरी इलाकों में बारिश से धान की फसल अच्छी होगी। जिन इलाकों में जलजमाव से धान की फसलें डूबी हुई हैं। वहां फसलें पीली होने के साथ रोगग्रस्त हो सकती है। किसानों को कार्बेन्डाजिम, स्ट्रेप्टोसाइक्लीन का छिड़काव करना चाहिए।