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खाली पदों से शिक्षा का बंटाधार
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 11 Aug 2015 12:00 AM IST
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जनपद के सहायता प्राप्त स्कूलों, कालेजों में प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों के 267 पद रिक्त हैं। अधिकांश विद्यालयों में कामचलाऊ व्यवस्था के सहारे पठन पाठन चल रहा है। इसके चलते शैक्षिक गुणवत्ता दयनीय होती जा रही है। बावजूद विभाग नियुक्ति के लिए विशेष कदम नहीं उठा रहा है।
जनपद में 40 सहायता प्राप्त इंटर कालेज तथा 27 सहायता प्राप्त पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। जिनमें एक समय दाखिले के लिए छात्र लालायित रहते थे। लेकिन अब अधिकांश विद्यालयों में शैक्षिक माहौल दयनीय होता जा रहा है।
इससे छात्रों के अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों का दाखिला निजी विद्यालयों में कराया जाए। अधिकांश विद्यालयों में लंबे समय से प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
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विभाग की ओर से किसी तरह से व्यवस्था का संचालन किया जा रहा है। रिक्त पदों पर नजर डाली जाए तो 40 प्रधानाचार्य के सापेक्ष 11, 27 प्रधानाध्यापक के सापेक्ष 08, 318 प्रवक्ता के सापेक्ष 256, 826 सहायक अध्यापकों के सापेक्ष 669 की तैनाती है। इसके अलावा शिक्षणेतर कर्मचारियों का पद रिक्त रहने से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है।
37 प्रधान लिपिक के सापेक्ष 30, 106 सहायक लिपिक के सापेक्ष 86, 556 चतुर्थश्रेणी के सापेक्ष 446 ही कार्यरत हैं। इस संबंध में अभिभावक रामशब्द शर्मा, जयप्रकाश सिंह, जयनारायण यादव, मनोहर प्रसाद का कहना है कि सहायता प्राप्त स्कूलों, कालेजों में शैक्षिक गुणवत्ता दयनीय होती जा रही है।
विभाग की ओर से कागजी खानापूर्ति कर इतिश्री कर दी जा रही है। अधिकारियों को अवगत कराए जाने के बाद भी शिक्षण व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है।
इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक डा. विनोद कुुमार राय का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है। विद्यालयों में शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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जनपद में 40 सहायता प्राप्त इंटर कालेज तथा 27 सहायता प्राप्त पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। जिनमें एक समय दाखिले के लिए छात्र लालायित रहते थे। लेकिन अब अधिकांश विद्यालयों में शैक्षिक माहौल दयनीय होता जा रहा है।
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इससे छात्रों के अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों का दाखिला निजी विद्यालयों में कराया जाए। अधिकांश विद्यालयों में लंबे समय से प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
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विभाग की ओर से किसी तरह से व्यवस्था का संचालन किया जा रहा है। रिक्त पदों पर नजर डाली जाए तो 40 प्रधानाचार्य के सापेक्ष 11, 27 प्रधानाध्यापक के सापेक्ष 08, 318 प्रवक्ता के सापेक्ष 256, 826 सहायक अध्यापकों के सापेक्ष 669 की तैनाती है। इसके अलावा शिक्षणेतर कर्मचारियों का पद रिक्त रहने से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है।
37 प्रधान लिपिक के सापेक्ष 30, 106 सहायक लिपिक के सापेक्ष 86, 556 चतुर्थश्रेणी के सापेक्ष 446 ही कार्यरत हैं। इस संबंध में अभिभावक रामशब्द शर्मा, जयप्रकाश सिंह, जयनारायण यादव, मनोहर प्रसाद का कहना है कि सहायता प्राप्त स्कूलों, कालेजों में शैक्षिक गुणवत्ता दयनीय होती जा रही है।
विभाग की ओर से कागजी खानापूर्ति कर इतिश्री कर दी जा रही है। अधिकारियों को अवगत कराए जाने के बाद भी शिक्षण व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है।
इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक डा. विनोद कुुमार राय का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है। विद्यालयों में शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।