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आखिरकार किसकी लापरवाही: लेकिन अब परिणाम भुगतेगा समाज
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रतनपुरा (मऊ)। जिले में कोरोना जांच के बाद संक्रमित पाए गए कई लोग महानगरों में पहुंच गए हैं। रतनपुरा ब्लाक के रतनपुरा गांव निवासी 12 लोग 30 अप्रैल को संक्रमित पाए गए थे। जब स्वास्थ्य विभाग की टीम इन मरीजों से संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि इसमें अधिकांश मुंबई, दिल्ली, गुजरात में हैं। सवाल उठ रहा है कि ये मरीज सैंपल देने के बाद महानगरों को गए या जांच रिपोर्ट आने के बाद।
जिले में 31 मार्च तक तीन हजार 48 मरीज मिले थे लेकिन अप्रैल में तीन हजार से ज्यादा मरीज मिले। बीते शुक्रवार की शाम तक जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या सात हजार 149 पहुंच चुकी है। जिले में संक्रमण का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। 30 अप्रैल को आजमगढ़ से आई जांच रिपोर्ट में रतनपुरा ग्रामपंचायत के 12 लोग संक्रमित मिले थे। संक्रमित मिलने के बाद रतनपुरा सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम जब संक्रमित मरीजों का स्वास्थ्य की स्थिति जानने के लिए फोन किया तो तीन से चार मोबाइल फोन बंद मिले जबकि अन्य में किसी ने मुंबई, दिल्ली और गुजरात में होना बताया।
इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉ. हंसराज सोनी ने बताया कि सैंपल देकर कुछ लोगों ने या तो फोन बंद कर दिया है या बाहर चले गए। शायद किसी ने जांच कराकर दूसरे का नाम तथा नंबर नोट कराया है जिससे यह परेशानी हो रही है। वहीं सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा गलत नंबर देने से परेशानी आ रही है। मामला संज्ञान में है। इसे दिखवाया जा रहा है।
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उधर, रतनपुुरा ग्राम पंचायत में 12 संक्रमित मिलने के बाद जांच टीम के नहीं पहुंचने पर भी निगरानी समिति ने इसकी शिकायत नहीं की। इस गांव में बीते 29 अप्रैल से 6 मई तक कुछ ग्रामीणों की मौत हुई। इसके अलावा गांव में कई लोग अब भी खांसी, जुकाम आदि से पीड़ित हैं। सबसे बड़ी लापरवाही है कि ग्राम पंचायत के 12 लोग जो कि संक्रमित हैं जो गांव में नहीं हैं। इस संबंध में बीडीओ अखिलेश कुमार से जानकारी ली गई तो उन्होंने मामला संज्ञान में नहीं होने की बात कही।
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जिले में 31 मार्च तक तीन हजार 48 मरीज मिले थे लेकिन अप्रैल में तीन हजार से ज्यादा मरीज मिले। बीते शुक्रवार की शाम तक जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या सात हजार 149 पहुंच चुकी है। जिले में संक्रमण का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। 30 अप्रैल को आजमगढ़ से आई जांच रिपोर्ट में रतनपुरा ग्रामपंचायत के 12 लोग संक्रमित मिले थे। संक्रमित मिलने के बाद रतनपुरा सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम जब संक्रमित मरीजों का स्वास्थ्य की स्थिति जानने के लिए फोन किया तो तीन से चार मोबाइल फोन बंद मिले जबकि अन्य में किसी ने मुंबई, दिल्ली और गुजरात में होना बताया।
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इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉ. हंसराज सोनी ने बताया कि सैंपल देकर कुछ लोगों ने या तो फोन बंद कर दिया है या बाहर चले गए। शायद किसी ने जांच कराकर दूसरे का नाम तथा नंबर नोट कराया है जिससे यह परेशानी हो रही है। वहीं सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा गलत नंबर देने से परेशानी आ रही है। मामला संज्ञान में है। इसे दिखवाया जा रहा है।
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उधर, रतनपुुरा ग्राम पंचायत में 12 संक्रमित मिलने के बाद जांच टीम के नहीं पहुंचने पर भी निगरानी समिति ने इसकी शिकायत नहीं की। इस गांव में बीते 29 अप्रैल से 6 मई तक कुछ ग्रामीणों की मौत हुई। इसके अलावा गांव में कई लोग अब भी खांसी, जुकाम आदि से पीड़ित हैं। सबसे बड़ी लापरवाही है कि ग्राम पंचायत के 12 लोग जो कि संक्रमित हैं जो गांव में नहीं हैं। इस संबंध में बीडीओ अखिलेश कुमार से जानकारी ली गई तो उन्होंने मामला संज्ञान में नहीं होने की बात कही।