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कटान समस्या का नहीं निकला समाधान
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सूरजपुर। मानसून आने में चंद माह शेष है, लेकिन दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के रसूलपुर इमामुद्दीनपुर गांव में प्रतिवर्ष होने वाली घाघरा की
कटान समस्या से निजात दिलाने के लिए अभी तक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। हालत यह है कि गांव में 1000 बीघा के सापेक्ष लगभग 500 बीघा से अधिक उपजाऊ जमीन नदी में समाहित हो चुकी है। शासन स्तर से 23.32 करोड़ की लागत से कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत तो हुआ है, लेकिन अभी बजट की मंजूरी नहीं मिल सकी है। दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के रसूलपुर इमामुद्दीनपुर गांव की आबादी लगभग छह हजार है। मानसून आने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे लोगों के दिलों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। गत वर्ष सितंबर माह से लेकर अक्तूबर माह के अंत तक हुए भीषण कटान का खौफ अभी लोगों के जेहन से उतरा नहीं है। नदी के किनारे रहने वाले पांच परिवारों के घर भी नदी में समाहित हो गया था। गांव का रकबा 1000 बीघा में है। वर्ष 2017 से नदी प्रतिवर्ष कटान कर रही है। अब तक 600 बीघा उपजाऊं जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। परेशान कटानपीड़ितों ने कटान समस्या का स्थायी समाधान के लिए धरना प्रदर्शन किया था। मामले को गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर से 23.32 करोड़ की लागत से कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत तो किया गया, लेकिन अभी तक बजट की मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि रसूलपुर इमामुद्दीनपुर गांव के पास कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत है। बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा रसूलपुर इनामुद्दीनपुर ग्राम प्रधान अखिलेश यादव का कहना है कि दो किलोमीटर की लंबाई में रसूलपुर ग्राम सभा नदी के किनारे पर बसा हुआ है। यहां हमेशा कटान का खतरा बना रहता है लेकिन कटान समस्या से निजात नहीं मिल सकी है। क्षेत्र के अजय राय का कहना है कि प्रतिवर्ष कृषि उपयोगी जमीन नदी में विलीन होने से लोग भूमिहीन होते जा रहे हैं। कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत है, बजट शीघ्र पास किया जाए। जिला पंचायत रसूलपुर इंद्र कैलाश यादव का कहना है कि कटान रोकने के लिए सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। प्रोजेक्ट के लिए बजट पास किया जाए। पंकज त्रिपाठी ने कटान समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
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कटान समस्या से निजात दिलाने के लिए अभी तक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। हालत यह है कि गांव में 1000 बीघा के सापेक्ष लगभग 500 बीघा से अधिक उपजाऊ जमीन नदी में समाहित हो चुकी है। शासन स्तर से 23.32 करोड़ की लागत से कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत तो हुआ है, लेकिन अभी बजट की मंजूरी नहीं मिल सकी है। दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के रसूलपुर इमामुद्दीनपुर गांव की आबादी लगभग छह हजार है। मानसून आने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे लोगों के दिलों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। गत वर्ष सितंबर माह से लेकर अक्तूबर माह के अंत तक हुए भीषण कटान का खौफ अभी लोगों के जेहन से उतरा नहीं है। नदी के किनारे रहने वाले पांच परिवारों के घर भी नदी में समाहित हो गया था। गांव का रकबा 1000 बीघा में है। वर्ष 2017 से नदी प्रतिवर्ष कटान कर रही है। अब तक 600 बीघा उपजाऊं जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। परेशान कटानपीड़ितों ने कटान समस्या का स्थायी समाधान के लिए धरना प्रदर्शन किया था। मामले को गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर से 23.32 करोड़ की लागत से कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत तो किया गया, लेकिन अभी तक बजट की मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि रसूलपुर इमामुद्दीनपुर गांव के पास कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत है। बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा रसूलपुर इनामुद्दीनपुर ग्राम प्रधान अखिलेश यादव का कहना है कि दो किलोमीटर की लंबाई में रसूलपुर ग्राम सभा नदी के किनारे पर बसा हुआ है। यहां हमेशा कटान का खतरा बना रहता है लेकिन कटान समस्या से निजात नहीं मिल सकी है। क्षेत्र के अजय राय का कहना है कि प्रतिवर्ष कृषि उपयोगी जमीन नदी में विलीन होने से लोग भूमिहीन होते जा रहे हैं। कटान प्रोजेक्ट स्वीकृत है, बजट शीघ्र पास किया जाए। जिला पंचायत रसूलपुर इंद्र कैलाश यादव का कहना है कि कटान रोकने के लिए सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। प्रोजेक्ट के लिए बजट पास किया जाए। पंकज त्रिपाठी ने कटान समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।