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20 वाहनों का चालान, सात सीज

Fri, 20 Jan 2017 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ Updated Fri, 20 Jan 2017 11:35 PM IST
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took action against  school bus
बिना फिटनेस के ही दौड़ रही हैं स्कूल बस - फोटो : अमर उजाला
एटा की घटना के बाद जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों को अपनी संसाधन से सभी मानक का पालन करते हुए वाहनों की व्यवस्था करनी चाहिए। जनपद में ज्यादातर स्कूली वाहन मानक के अनुसार नहीं चलाए जा रहे। जिसके चलने बच्चों पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। अभिभावक भयभीत होकर अपने बच्चों को स्कूल भेजने को विवश हैं।
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दूसरी तरफ एटा हादसे के बाद शुक्रवार को संभागीय परिवहन विभाग काफी सजग दिखा। इस दौरान एआरटीओ की तरफ से विभिन्न स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया गया। शुक्रवार को चलाए गए अभियान में 20 वाहनों का चालान तथा सात सीज किया गया। एआरटीओ श्यामलाल ने बताया कि शासन से आए पत्र पर मऊ जिले में दो दिन पहले से ही वाहन चेकिंग का कार्य शुरू कर दिया गया था। इन तीन दिनों में 51 वाहनों का चालान  किया है, जबकि सात वाहन सीज किए गए।
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वहीं अभिभावक और सहादतपुरा मुहल्ला निवासी नीरज सिंह ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान को अपने छात्रों के लिए वाहनों की व्यवस्था करानी  चाहिए। इस स्कूल में एडमीशन कराने के बाद अभिभावकों की मजबूरी होती है कि वे अन्य स्कूली वाहनों का सहारा लें। इसी प्रकार आशीष सिंह का कहना है कि शहर के फातिमा स्कूल जिसमें लगभग तीन हजार छात्र पढ़ते हैं , उसके पास एक भी स्कूली वाहन नहीं है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को स्वतंत्र वाहनों के भरोसे ही रहना पड़ता है। मुंशीपुरा मुहल्ला निवासी रोहित वर्मा कहते हैं कि हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा सुरक्षित रूप से स्कूल जाए और घर वापस आए।
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लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं है। प्रशासन को चाहिए कि स्कूली वाहनों के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था करे। अनुराग रतन कुशवाहा का कहना था कि मान्यता के समय ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों को लाने ले जाने के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले वाहनों की व्यवस्था भी स्कूल की तरफ से हो। एआरटीओ और पुलिस अधिकारियों की तरफ से डग्गामार वाहनों के स्कूली बच्चों को ढोने पर प्रभावी अंकुश लगाना चाहिए।

 
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