टोक्यो ओलंपिक कोरोना से प्रभावित नहीं होगा : आनंदेश्वर पांडेय
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कोरोना से खेल प्रभावित नहीं होगा न ही भारतीय खिलाड़ी इस महामारी से प्रभावित होगें, क्योंकि उनके अंदर इम्युनिटी पॉवर बेशुमार होती है। रही बात वर्ष 2021 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक का तो उसका शिड्यल बन चुका है। ऐसे में ओलंपिक के शेड्यूल में कोई फेर बदल करना संभव नहीं है। यदि किन्ही कारणों से इसमें फेर बदल किया गया, तो ओलंपिक खेल नहीं हो सकेगा।
रविवार को अमर उजाला से बातचीत करने के दौरान इस बात की जानकारी भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन और कॉमनवेल्थ गेम भारत के कोषाध्यक्ष तथा सदस्य स्टैंडिंग कमेटी खेल जगत के साथ सदस्य एशिया ओलंपिक कमेटी डॉ आनंदेश्वर पांडेय ने दी। मूलरुप से कुशीनगर के निवासी डॉ. आनंदेश्वर पांडेय को एक जनवरी 2020 को थाईलैंड टांगा यूनिवर्सिटी में फिजिकल एजुकेशन के लिए डाक्टरेट की उपाधि दी।
बरवक्त दक्षिण एशिया हैंड बाल फेडरेशन, भारतीय हैंडबाल फेडरेशन, यूपी ओलंपिक एसोसिएशन के सचिव भी हैं। वह पहले व्यक्ति हैं जो उत्तर प्रदेश से इन पदों पर आसीन हुए हैं। बातचीत के दौरान श्री पांडेय ने कहा कि वैसे भी भारतीय जलवायु के हिसाब से मई से जुलाई का समय कम्पटीशन के लिए उपयोगी नहीं होता। इसके अलावा बच्चे इन दिनों में अपने कैरियर के निर्माण में जुटे रहते हैं। बरसात के बाद खेल का दौर शुरू होता है। ऐसे में इस महामारी का असर ओलंपिक की तैयारी में जुटने वाले भारतीय खिलाड़ियों पर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि अन्य देशों के लोगों की तुलना में भारतीयों की इम्युनिटी बेहतर होती है। ओलंपिक 2021 जुलाई में होना है। अब इसके शेड्यूल में बदलाव नहीं हो सकता, बल्कि निरस्त ही किया जा सकता है। यदि किसी कारणों से ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर विश्व स्तर पर आर्थिक क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ेगा। कहा कि खिलाड़ी अभी ओलंपिक की व्यक्तिगत तैयारी कर रहे हैं।
लेकिन, सामूहिक तैयारी के लिए दो माह का समय पर्याप्त होगा। दावा किया कि 2021 के ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों को देश की जलवायु का ज्यादा लाभ मिलेगा। कहा, भारतीयों को खेल के प्रति सोच में परिवर्तन करने की जरूरत है, क्योंकि खेल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की जरूरत है।
इसके जरिए हम शारीरिक क्षमता विकसित कर स्वस्थ रहते हैं। हर व्यक्ति को बच्चों के विकास के लिए घर के बजट में खेल का बजट भी शामिल करना चाहिए। कहा कि कभी नागपंचमी के दिन लगभग सभी खेल में भाग लेकर शारीरिक क्षमता का आकलन करते थे। लेकिन आज सबकुछ पाश्चात्य सभ्यता की भेंट चढ़ता जा रहा है।
अंशकालिक प्रशिक्षकों की समस्या देखकर उठाया मुद्दा
यूपी ओलंपिक एसोसिएशन के सचिव डॉ.आनंदेश्वर पांडेय ने एक प्रश्न के जबाब में बताया कि कोरोना के चलते स्टेडियम बंद होने से अंशकालिक प्रशिक्षकों के सामने रोजी-रोटी की समस्या आ गई है। इसको देखते हुए उन्होंने खेल निदेशक डा. आरपी सिंह से बात की। इस पर जुलाई में समस्या का समाधान करने का आश्वासन खेल निदेशक ने दिया है।
जुलाई में स्टेडियम में खेल का प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। खेल संघ और सरकार के बीच ठनने और मान्यता समाप्त करने की बाबत कहा कि यह ईगो की लड़ाई है। कुछ के चलते सभी बदनाम हुए हैं। जबकि हकीकत यह है कि 90 फीसदी खेल संघ गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। संघ को चलाने वाले जुनून को पूरा करने के लिए चंदा मांगकर खेल कराते हैं। यह भी सच है कि सरकार इन संघों को कोई ग्रांट नहीं देेती। वह खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने और आने-जाने का सिर्फ किराया देती है।