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नष्ट होने के कगार पर है हजारों एकड़ फसल

Mon, 26 Jul 2021 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 10:30 PM IST
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Thousands of acres of crops are on the verge of destruction
दोहरीघाट/दुबारी (मऊ)। दो दिनों से घाघरा के जलस्तर स्थिर रहने से तटवर्ती इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली है। खतरा निशान से 10 सेमी ऊपर पानी बहने से हजारों एकड़ फसल जलमग्न होने से फसलें नष्ट होने के कगार पर है। मधुबन तहसील क्षेत्र के बिंदटोलिया गांव के कटान पीड़ितों को भूमिहीन तथा बेघर होने की चिंता सताने लगी है। गत वर्ष 30 लोगों का मकान नदी में विलीन हो गया था।
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प्रशासन की तरफ से कटान पीड़ितों को जमीन का पट्टा तो दिया गया लेकिन आवास के लिए बजट जारी न करने से आज भी वह खानाबदोश की जिंदगी जीने को विवश हैं। इस वर्ष भी सात लोगों का मकान नदी में समा गया, लेकिन उनको अभी तक एक पाई की आर्थिक मदद नहीं मिल सकी है। करोड़ों की लागत से कटान प्रोजेक्ट कार्य ठप होने से लोग सुरक्षित स्थान का रुख करने लगे हैं।
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नदी के उग्र तेवर को देख लोग अपने आशियाने को उजाड़ते देखे गए। शिकायत के बाद भी आला अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। नदी खतरा निशान से 10 सेमी ऊपर बहने से हजारों एकड़ फसल पानी में डूबने से किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो गौरीशंकर घाट पर सोमवार को जलस्तर 70 मीटर रहा। रविवार को नदी का जलस्तर 70 मीटर रहा। जबकि नदी अभी भी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से दस सेमी ऊपर बह रही है।
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धनौली लोहड़ा बांध,नौली चिउतीडाड रिंग बंधा, बीबीपुर बेलौली बंधोंसिचाई विभाग के अधिकारी नजर रख रहा है। अभी भी तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई है। किसानों को फसलों के नुकसान की आशंका से भयभीत है। नदी के स्थिर होने के बावजूद नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर तथा शाही मस्जिद पर खतरा मंडरा रहा है।
घाघरा नदी के उग्र रुप धारण करने से बिंदटोलिया सहित आसपास क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जारही है। कटान पीड़ितों के मुताबिक घाघरा नदी लगभग पांच वर्ष पूर्व बिंदटोलिया गांव से पांच किमी दूर बहती थी। नदी कटान करते-करते गांव के मुहाने तक आ चुकी है। तहसील प्रशासन के आंकड़े के अनुसार गत वर्ष 250 एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो गई थी। 30 लोगों का मकान नदी में समा गया था। लेकिन अभी तक भूमिहीन किसानों को मुआवजा नहीं मिला। केवल 30 कटान पीड़ितों को आवास के लिए जमीन का आवंटन दिया गया लेकिन आवास के लिए बजट नहीं जारी किया जा सका। इस वर्ष भी सात लोगों का मकान नदी में समा चुका है।

आज तक प्रशासन की तरफ से एक पाई की आर्थिक मदद नहीं मिल सकी है। प्रतिदिन लगभग 20 बीघा उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो रही है। लोग दूर से ही अपनी विलीन हो रही उपजाऊ जमीन को निहारते हुए देखे गए। लगातार कटान होने के कारण कटान पीडितों ने अपनी पक्के या कच्चे मकानों से कीमती सामान निकालकर सुरक्षित स्थान तलाशने लगे हैं। करोड़ों की लागत से कटान प्रोजेक्ट कार्य ठप होने से लोग दहशत में जी रहे हैं। लोग सुरक्षित स्थानों की तरफ ठौर तलाशने लगे हैं।
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