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Mau News: जिले में 10 हजार इलेक्ट्रिक वाहन पर चार्जिंग स्टेशन एक भी नहीं
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नगर के एक मुहल्ले के घर में चार्ज होती ई स्कूटी
पर्यावरण संरक्षण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका असर भी दिख रहा है। बीते तीन वर्षों में जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। हर साल 20 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ रहे हैं।
हालांकि, अब तक एक भी ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो सका है, जिससे वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जिले में लगभग 10 हजार इलेक्ट्रिक वाहन हैं, लेकिन तीन साल में भी परिवहन विभाग एक भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं कर पाया है।
उधर, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की रिपोर्ट के अनुसार 40 वाहनों पर एक चार्जिंग कनेक्टर होना आवश्यक है। इस हिसाब से 10 हजार वाहनों के लिए करीब 250 कनेक्टर की जरूरत है।
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जिले में फिलहाल केवल एक पेट्रोल पंप पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन वह भी अधूरी है। विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत आठ से दस पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग पॉइंट लगाने की योजना बनाई थी, ताकि वाहन चालकों को राहत मिल सके।
हाल यह है कि तीन वर्षों में यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई। अब तक किसी भी पेट्रोल पंप पर चार्जिंग की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन चालक अपने घरों पर सामान्य वायरिंग के माध्यम से वाहनों को चार्ज कर रहे हैं, वह भी बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के।
मध्य प्रदेश के इंदौर में चार्जिंग के दौरान हुए हादसे में आठ लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो जिम्मेदार अधिकारी सचेत हुए हैं और न ही वाहन चालक पूरी तरह सतर्क हैं।
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इलेक्ट्रिक वाहनों में ई-रिक्शा की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 9,643 है। इसमें ई-रिक्शा की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार ई-रिक्शा की संख्या 7,084 है, जबकि ई-रिक्शा विथ कार्ट की संख्या 1,255 है। वहीं, बाइक और स्कूटी की संख्या 1,142 तथा थ्री-व्हीलर वाहनों की संख्या 129 है। जिले में इलेक्ट्रिक कारों की संख्या मात्र 6 है।
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ओवरलोड और कमजोर वायरिंग से बढ़ रहा शॉर्ट सर्किट का खतरा
घरेलू चार्जिंग में सबसे बड़ा खतरा कमजोर वायरिंग और ओवरलोडिंग है। अधिकांश घरों की वायरिंग अधिक लोड सहने के लिए उपयुक्त नहीं होती, जिससे तार गर्म होकर शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा सस्ते और लोकल चार्जर वोल्टेज नियंत्रित नहीं कर पाते, जिससे बैटरी ओवरहीट होकर फट सकती है। खराब अर्थिंग, तंग और बंद स्थान में चार्जिंग करने से बैटरी को पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं मिल पाता, जिससे तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। ऐसा ही एक मामला निजामुद्दीनपुरा मोहल्ले में सामने आया, जहां समय रहते बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
वर्जन000000000000
पांच पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए कनेक्शन देने की प्रक्रिया चल रही है। -एके सेठ, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम
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हालांकि, अब तक एक भी ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो सका है, जिससे वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जिले में लगभग 10 हजार इलेक्ट्रिक वाहन हैं, लेकिन तीन साल में भी परिवहन विभाग एक भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं कर पाया है।
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उधर, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की रिपोर्ट के अनुसार 40 वाहनों पर एक चार्जिंग कनेक्टर होना आवश्यक है। इस हिसाब से 10 हजार वाहनों के लिए करीब 250 कनेक्टर की जरूरत है।
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जिले में फिलहाल केवल एक पेट्रोल पंप पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन वह भी अधूरी है। विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत आठ से दस पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग पॉइंट लगाने की योजना बनाई थी, ताकि वाहन चालकों को राहत मिल सके।
हाल यह है कि तीन वर्षों में यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई। अब तक किसी भी पेट्रोल पंप पर चार्जिंग की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन चालक अपने घरों पर सामान्य वायरिंग के माध्यम से वाहनों को चार्ज कर रहे हैं, वह भी बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के।
मध्य प्रदेश के इंदौर में चार्जिंग के दौरान हुए हादसे में आठ लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो जिम्मेदार अधिकारी सचेत हुए हैं और न ही वाहन चालक पूरी तरह सतर्क हैं।
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इलेक्ट्रिक वाहनों में ई-रिक्शा की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 9,643 है। इसमें ई-रिक्शा की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार ई-रिक्शा की संख्या 7,084 है, जबकि ई-रिक्शा विथ कार्ट की संख्या 1,255 है। वहीं, बाइक और स्कूटी की संख्या 1,142 तथा थ्री-व्हीलर वाहनों की संख्या 129 है। जिले में इलेक्ट्रिक कारों की संख्या मात्र 6 है।
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ओवरलोड और कमजोर वायरिंग से बढ़ रहा शॉर्ट सर्किट का खतरा
घरेलू चार्जिंग में सबसे बड़ा खतरा कमजोर वायरिंग और ओवरलोडिंग है। अधिकांश घरों की वायरिंग अधिक लोड सहने के लिए उपयुक्त नहीं होती, जिससे तार गर्म होकर शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा सस्ते और लोकल चार्जर वोल्टेज नियंत्रित नहीं कर पाते, जिससे बैटरी ओवरहीट होकर फट सकती है। खराब अर्थिंग, तंग और बंद स्थान में चार्जिंग करने से बैटरी को पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं मिल पाता, जिससे तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। ऐसा ही एक मामला निजामुद्दीनपुरा मोहल्ले में सामने आया, जहां समय रहते बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
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पांच पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए कनेक्शन देने की प्रक्रिया चल रही है। -एके सेठ, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम