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Mau News: 200 बेड वाले अस्पताल में भी एमडीआर टीबी मरीजों के भर्ती की सुविधा नहीं

Sat, 06 Jun 2026 11:44 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:44 PM IST
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There is no facility for admission of MDR TB patients even in a hospital with 200 beds.
नगर ​स्थित राजकीय टीबी क्लीनिक।संवाद
25 लाख की आबादी वाले जिले में आज तक मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी मरीजों के भर्ती और उपचार की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। जिले में सरकारी अस्पतालों की कुल संख्या में दो सौ बेड वाले एक बड़ा सरकारी अस्पताल और 30 बेड की क्षमता वाले दस छोटे सरकारी अस्पताल हैं।
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हालात यह हैं कि गंभीर एमडीआर टीबी मरीजों को इलाज के लिए आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ता है। जिले की सदर तहसील, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना और घोसी तहसील में वर्तमान में कुल 2024 टीबी मरीज हैं, जिनमें 74 मरीज एमडीआर श्रेणी के हैं।
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राजकीय टीबी क्लिनिक के आंकड़ों के अनुसार एमडीआर टीबी मरीजों की संख्या वर्ष 2024 में 293 और 2025 में 234 रही। बावजूद इसके गंभीर मरीजों के लिए जिले में भर्ती की सुविधा केवल कागजों तक सीमित है।
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प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को गंभीर स्थिति में आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज या बीएचयू रेफर किया जाता है। इस वजह से मरीजों और उनके परिजनों को बार-बार यात्रा करनी पड़ती है, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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एमडीआर टीबी क्या है
एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी वह स्थिति है, जब सामान्य टीबी की दवाएं मरीज पर असर करना बंद कर देती हैं। यह समस्या अधूरा इलाज, अनियमित दवा सेवन या लापरवाही के कारण होती है। ऐसे मरीजों को लंबे समय तक विशेष दवाओं और निगरानी की आवश्यकता होती है।

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बचाव और जरूरी सावधानियां
टीबी का इलाज बीच में न छोड़ें
नियमित दवा और जांच कराते रहें
मरीज को अलग मास्क और साफ वातावरण दें
पौष्टिक भोजन और स्वच्छता पर ध्यान दें
खांसी या बुखार लंबे समय तक रहने पर तुरंत जांच कराएं
कोट---
एमडीआर मरीजों को दवाइयां निशुल्क और उपचार मिलता है। जिला अस्पताल में वार्ड भी बनाया गया है, लेकिन गंभीर स्थिति में मरीजों को आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
-डॉ. हंसराज सोनी, जिला छय अधिकारी, मऊ
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