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बीएड की फर्जी डिग्री लगा कर रहा था नौकरी
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:33 PM IST
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बीए और बीएड की फर्जी मार्कशीट लगाकर एक व्यक्ति कई सालों से अध्यापक की नौकरी कर रहा है। शिकायत पर समाज कल्याण अधिकारी ने उसके वेतन आहरण पर रोक लगा दिया। विभाग ने गोरखपुर विश्वविद्यालय की मार्कशीट के सत्यापन के लिए पत्र लिखा। इसके जवाब में अध्यापक ने फर्जी वेरीफिकेशन रिपोर्ट भी लगा दिया। पूर्वाधिकारी के आदेश की अनदेखी करते हुए वर्तमान अधिकारी ने आरोपी अध्यापक का कई महीने का रुका हुआ वेतन भी दे दिया। गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अध्यापक द्वारा लगाई गई मार्कशीट को फर्जी करार दे दिया है। मामला सदर तहसील के कोपागंज ब्लाक के धवरियासाथ स्थित अंबेडकर प्राइमरी स्कूल का है। इस फर्जीवाड़े की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई है। प्रकरण की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री को 16 जून 2016 को रमाकांत यादव द्वारा प्रेषित शिकायती पत्र के अनुसार समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्रदेश सरकार द्वारा अनुदानित पुरुषोत्तम हरिजन प्राथमिक पाठशाला में सहायक अध्यापक पद पर मनोज कुमार सिंह बीए और बीएड की फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी कर रहा है। शिकायत में कहा गया है कि मनोज ने अपनी नियुक्ति के समय शैक्षणिक प्रमाण पत्र में बीए वर्ष 1990 अनुक्रमांक 101932 और बीएड 1992 अनुक्रमांक 7538 की मार्कशीट लगाया है। ये दोनों ही डिग्रियां गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध नेशनल पीजी कालेज बड़हलगंज द्वारा जारी की गई दर्शाई गई हैं। लेकिन विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने इन दोनों ही परीक्षाओं के रोल नंबरों को नेशनल कालेज को आवंटित होने से ही इनकार किया है।
नेशनल पीजी कालेज के प्राचार्य ने भी 27 जून 2015 को जारी अपने पत्र में मनोज सिंह के द्वारा प्रस्तुत बीए की मार्कशीट को फर्जी बताया है। मामले की शिकायत पर तत्कालीन प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव ने आरोपी अध्यापक मनोज के वेतन आहरण पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी थी। बाद में आण् वर्तमान समाज कल्याण अधिकारी ने मनोज का रुका वेतन जारी कर दिया। शिकायत कर्ता का आरोप है कि बीए और बीएड की फर्जी मार्कशीट पर 20 सालों से नौकरी कर रहे मनोज ने सरकारी धन के लाखों रुपये हड़पा है।
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मुख्यमंत्री को 16 जून 2016 को रमाकांत यादव द्वारा प्रेषित शिकायती पत्र के अनुसार समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्रदेश सरकार द्वारा अनुदानित पुरुषोत्तम हरिजन प्राथमिक पाठशाला में सहायक अध्यापक पद पर मनोज कुमार सिंह बीए और बीएड की फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी कर रहा है। शिकायत में कहा गया है कि मनोज ने अपनी नियुक्ति के समय शैक्षणिक प्रमाण पत्र में बीए वर्ष 1990 अनुक्रमांक 101932 और बीएड 1992 अनुक्रमांक 7538 की मार्कशीट लगाया है। ये दोनों ही डिग्रियां गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध नेशनल पीजी कालेज बड़हलगंज द्वारा जारी की गई दर्शाई गई हैं। लेकिन विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने इन दोनों ही परीक्षाओं के रोल नंबरों को नेशनल कालेज को आवंटित होने से ही इनकार किया है।
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नेशनल पीजी कालेज के प्राचार्य ने भी 27 जून 2015 को जारी अपने पत्र में मनोज सिंह के द्वारा प्रस्तुत बीए की मार्कशीट को फर्जी बताया है। मामले की शिकायत पर तत्कालीन प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव ने आरोपी अध्यापक मनोज के वेतन आहरण पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी थी। बाद में आण् वर्तमान समाज कल्याण अधिकारी ने मनोज का रुका वेतन जारी कर दिया। शिकायत कर्ता का आरोप है कि बीए और बीएड की फर्जी मार्कशीट पर 20 सालों से नौकरी कर रहे मनोज ने सरकारी धन के लाखों रुपये हड़पा है।
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