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नक्शा ठीक कराने के लिए लगा रहे दफ्तरों के चक्कर
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मऊ। घोसी तहसील के अमिला गांव के कई किसान चकबंदी विभाग के अधिकारियों के द्वारा बना दिए गए गलत नक्शे को सुधरवाने के लिए आठ साल से विभागी अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को विवश हैं। किसान आठ सालों से इस कार्य के लिए परेशान हैं। किसानों ने चकबंदी आयुक्त की शरण ली। चकबंदी आयुक्त ने तीन माह में प्रकरण को निपटाने का आदेश पारित किया लेकिन चकबंदी अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश को भी किनारे कर दिया है। इस दुर्व्यवस्था से नाराज किसानों ने अब विधान सभा चुनाव में नोटा का बटन दबाने का निश्चय किया है। इन किसानों में पूर्व सांसद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के वंशज भी हैं।
अमिला ग्राम पंचायत निवासी महातम राय, अशोक राय,श्यामपति राय, अजय कुमार राय आदि किसानों के खेतों का नक्शा गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गलत बना दिया गया। किसानों ने चकबंदी अधिकारियों से लेकर डीएम तक गुहार लगाई। अधिकारियों ने चकबंदी कर्मचारियों से रिपोर्ट मांगी तो कर्मचारियों ने गलत रिपोर्ट दे दी। किसानों ने चकबंदी आयुक्त को प्रार्थनापत्र देकर नक्शा दुरुस्त कराने की शिकायत किया।
चकबंदी आयुक्त ने तीन महीने के अंदर प्रकरण निपटाने का आदेश उप संचालक चकबंदी को दिया। लेकिन वर्ष 2013 से लेकर अब तक आठ सालों में चकबंदी आयुक्त तथा उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करने की जरूरत नहीं समझी। यह प्रकरण अभी अनसुलझा ही रह गया। इन किसानों में देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी झारखंडे राय के वंशज भी बताए जाते हैं। किसान अशोक कुमार राय ने बताया कि अधिकारियों कर्मचारियों की उपेक्षा से यह प्रकरण आठ से भी अधिक सालों से लंबित है। चेतावनी दी कि यहद यह प्रकरण जल्दी निपटाया नहीं गया तो गांव के किसान विधान सभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
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अमिला ग्राम पंचायत निवासी महातम राय, अशोक राय,श्यामपति राय, अजय कुमार राय आदि किसानों के खेतों का नक्शा गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गलत बना दिया गया। किसानों ने चकबंदी अधिकारियों से लेकर डीएम तक गुहार लगाई। अधिकारियों ने चकबंदी कर्मचारियों से रिपोर्ट मांगी तो कर्मचारियों ने गलत रिपोर्ट दे दी। किसानों ने चकबंदी आयुक्त को प्रार्थनापत्र देकर नक्शा दुरुस्त कराने की शिकायत किया।
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चकबंदी आयुक्त ने तीन महीने के अंदर प्रकरण निपटाने का आदेश उप संचालक चकबंदी को दिया। लेकिन वर्ष 2013 से लेकर अब तक आठ सालों में चकबंदी आयुक्त तथा उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करने की जरूरत नहीं समझी। यह प्रकरण अभी अनसुलझा ही रह गया। इन किसानों में देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी झारखंडे राय के वंशज भी बताए जाते हैं। किसान अशोक कुमार राय ने बताया कि अधिकारियों कर्मचारियों की उपेक्षा से यह प्रकरण आठ से भी अधिक सालों से लंबित है। चेतावनी दी कि यहद यह प्रकरण जल्दी निपटाया नहीं गया तो गांव के किसान विधान सभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
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