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जीवन रेखा तमसा की उपेक्षा पड़ेगी भारी

Tue, 31 May 2016 12:14 AM IST
मऊ/अमर उजाला ब्यूरो
मऊ/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 31 May 2016 12:14 AM IST
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the ignorance of tamasa paid a big price
बंधारोड पर तमसा के किनारे लगे हजारों पौधों में से बचे हैं गिनती के पेड़।
तीन लाख से अधिक आबादी की जीवन रेखा तमसा भीषण गंदगी व उपेक्षा से कराह रही है। नदी का किनारा पूरी तरह शुष्क और हरियाली विहीन हैं। वन विभाग पालिका के सहयोग से इन किनारों  पर पौधरोपण करा दे तो किनारों पर गंदगी भी कम हो जाएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। पालिका ने पिछले साल कुछ पौधे लगवाए थे लेकिन इनमें से काफी रखरखाव के अभाव में सूख गए।
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 भीटी से लेकर भदेसरा तक तमसा के किनारों  पर पेड़ अंगुलियों पर गिनने भर को भी नहीं हैं।

काफी पुराने पेड़ समय के अंतराल पर कटते गए  और किनारे पेड़ विहीन हो गए । किनारों के पास की  भूमि कूड़ों और धूल से पटी है। बंधे से गुजरते समय यदि थोड़ी भी हवा चले तो भीषण दुर्गंध और धूल से पूरा शरीर पट  जाता है।  जानकारों का मानना है कि यदि तमसा नदी के खाली पड़े किनारों पर पौधे लगाए जाएं उनकी सुरक्षा की जाय तो इनसे  दिनोंदिन प्रदूषण की तेजी से बढ़ रहे पर्यावरण के संरक्षण में काफी मदद मिलेगी।
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लेकिन न तो पालिका और न ही वन विभाग ने इस पर गंभीरता से सोचा। नगर पालिका की ओर से पिछले सालों में एक हजार पौधे एक मुहिम के तहत लगवाया था। लेकिन इनमें से अधिकांश तो समुचित रखरखाव और संरक्षण के अभाव में सूख गएपर्यावरणविदों का कहना है कि यदि पालिका और वन विभाग  एक संयुक्त अभियान चलाकर नदी के किनारों पर सघन पौध रोपण          कराएं तो यह शहर के तीन लाख लोगों के स्वास्थ्य संवर्धन की    दिशा में दूरगामी परिणाम देने वाले होंगे। यह भी होगा कि जहां  पौध होंगे वहां गंदगी  नहीं   होगी।
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