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Mau News: फिर से बैंकाक जाने की चाह ने कुतरा फर्जी पासपोर्ट बनाने वालों का जाल

Fri, 27 Dec 2024 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2024 12:56 AM IST
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The desire to go to Bangkok again led to the trap of fake passport makers

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मऊ। गोरखपुर निवासी श्याम करन यादव की फिर से बैंकाक जाने की चाहत ने फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह का जाल कुतर दिया है। अब इस जाल में और कितने लोग फंसेंगे ये इसकी जांच एसपी इलामारन जी की निगरानी में गठित टीम कर रही है। इसके तहत बीते दो माह में बने पासपोर्ट जांच की जद में आएंगे। बुधवार को फर्जी पासपोर्ट में मामले पकड़े गए आरोपियों की गिरफ्तारी से जल्द ही बड़ा खुलासा हो सकता है।

बुधवार को फर्जी पासपोर्ट बनवाने गया गोरखपुर निवासी श्याम करन यादव 2019 में बैंकाक गया था, उसका वीजा खत्म होने के बाद भी वो वहा काम करता रहा। इस बीच जानकारी होने पर थाईलैंड पुलिस ने उसे भारत भेज दिया। दो साल रहने के बाद वो फिर से वह आर्थिक मजबूती के लिए बैंकाक जाने की तैयारी करने लगा। एक बार वीजा खत्म होने एक बाद ब्लैकलिस्ट होने के कारण गोरखपुर से पासपोर्ट वो नहीं बनवा सकता था। इसके बाद उसने गोरखपुर के श्यामबहादुर यादव से संपर्क करने के बाद दोहरीघाट थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव निवासी के नाम पर नया पासपोर्ट बनवाने की साजिश रही। इसके तहत आवेदन के लिए उसने न केवल अपनी वास्तविक उम्र 32 की जगह फर्जी आधार कार्ड में 49 अंकित कराया, बल्कि अपने नाम करन कर दिया। पुलिस की पूछताछ में श्याम करन ने बताया कि उसे श्यामसुंदर ने बताया कि वो सोनबरसा गांव निवासी राकेश साहनी की मदद से पहले ही सात लोगों का पासपोर्ट बनवा चुका है। इसके लिए उसने 80 हजार रुपये मांगे।
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इस मामले में अब पुलिस द्वारा गठित एक टीम सात फर्जी पते पर बनाए गए पासपोर्ट धारकों की जांच में जहां जुटी है। वहीं, एक टीम अब दो महीने में बने पासपोर्ट की जांच को लेकर कवायद में जुटी है। एसपी इलामारन जी ने बताया कि यह मामला बेहद संगीन है, इसमें एक गांव से सात लोगों द्वारा कूट रचित दस्तावेज की मदद से पासपोर्ट बनवाने के मामले में पुलिस हर बिंदु पर जांच में जुटी है। पुलिस ने लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय से संपर्क कर इसकी जानकारी देकर जिले में बनने के लिए आवेदन हुए पासपोर्ट की जानकारी की कवायद की जा रही है।
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एक माह पहले एक जालसाज हुआ था गिरफ्तार
एक माह पहले कोपागंज थाना पर पासपोर्ट बनवाने के लिए सत्यापन कराने आए दो युवकों से जब सत्यापन कर्ता सिपाही चंद्रशेखर सिंह से निवास प्रमाणपत्र, शैक्षिक प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ मांगे गए तो वे लघु शंका का बहाना बनाकर मौके से भाग निकले। इसके बाद चंद्रशेखर के फोन करने पर भी दोनों युवक वापस नहीं आए, जिससे पुलिस को यह शंका हुई कि वे फर्जी दस्तावेज पर पासपोर्ट बनवाने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जहां दो दिन बाद पुलिस ने राष्ट्रीय मार्ग पर भारतीय स्टेट बैंक मोड़ के पास से एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी हुए सत्यम ने बताया कि उसका असली नाम राम आशीष यादव है और उसका असली नाम रौनापार थाने में दर्ज एक पुराने मामले में शामिल था। जिस वजह से उसका पासपोर्ट नहीं बन पा रहा था। इसलिए उसने सत्यम यादव नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया था और पासपोर्ट बनाने की कोशिश की थी।

2019 में फर्जी पासपोर्ट के मामले में एसपी ने की थी कारवाई
2019 में तत्कालीन एसपी अनुराग आर्य ने जिले में फर्जी पासपोर्ट बनाने के चल रहे खेल में स्थानीय सफेदपोश लोगों के साथ ही पुलिस की भी संलिप्तता संदिग्ध तौर पर उजागर होने पर एलआईयू इंस्पेक्टर को निलंबित करने के लिए पत्र लिखा था। वहीं एक थाने के उर्दू विवेचक और एक होमगार्ड समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एलआईयू के दो हेड कांस्टेबलों की संलिप्तता भी उजागर हुई है, उनकी जांच के आदेश एसपी ने दिए थे। उस समय पुलिस ने फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में पकड़े गए आरोपियों के पास से 9 लैपटॉप, 11 मोबाइल, 37 पासपोर्ट फार्म, फर्जी मार्कशीट और 50 हजार रुपये भी बरामद किए थे।
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