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केंद्रों पर नहीं जा रही टीम, सिर्फ कागजों पर किया जा रहा काम
mau
Updated Tue, 25 Sep 2018 10:39 PM IST
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जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चे।
- फोटो : mau
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जिला अस्पताल में इन दिनों ओपीडी में परिजन अतिकुपोषित बच्चों को इलाज के लिए लेकर पहुंच रहे हैं। गंभीर स्थिति देखकर डाक्टर उन्हें एनआरसी में भर्ती करा रहे हैं। इस माह में अब तक चार अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जा चुका है। यह स्थिति तब है जब कुपोषण दूर करने के लिए भारी धनराशि खर्च हो रही है। जबकि विभागीय स्तर पर इसके लिए टीम गठित है। लेकिन इनका काम सिर्फ कागजों पर हो रहा।
जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए बने एनआरसी केंद्र में सात बच्चे भर्ती हैं। इनमें कोपागंज ब्लाक के मुसहर बस्ती निवासी सुखिया की डेढ़ वर्षीय बेटी लक्ष्मीना की हालात चिंताजनक है। वहीं कुसमौर निवासी आसमा (2) पुत्री शहनाज, मुंशीपुरा निवासी अलीना (2) पुत्री जाहिद और कंधेरी निवासी शाहिना (2) पुत्री इम्तेयाज की हालात ज्यादा खराब है। खास बात यह है कि यह सभी बच्चे ओपीडी के माध्यम से एनआरसी केंद्र में भर्ती हुए है। इन बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि उनके यहां न तो कभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुंची न ही कभी स्वास्थ्य विभाग की (आरबीएसके) टीम। यह स्थिति तब है जब कुपोषण खत्म करने के लिए स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्य कर रहा है।
जहां स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की दो चिकित्सक वाली 18 टीम की ओर से नियमित आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर कुपोषित बच्चों का जांच की जाती है। अतिकुपोषित बच्चों को सदर अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराना होता है। लेकिन विभागीय अधिकारियों के मानीटरिंग न करने से आरबीएसके टीम केंद्रों पर नहीं पहुंच रही है। उधर क्षेत्र में टीम के नहीं आने पर बीमारी बढ़ने पर अतिकुपोषित बच्चों के परिजन उन्हें खुद लेकर अस्पताल पहुंच रहे है। सितंबर माह में अब तक चार मरीज जहां ओपीडी के माध्यम से एनआरसी में भर्ती हुए हैं, वहीं एक बच्चे के पालक ने सीधे एनआरसी पहुंचकर उसे भर्ती कराया है।
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जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए बने एनआरसी केंद्र में सात बच्चे भर्ती हैं। इनमें कोपागंज ब्लाक के मुसहर बस्ती निवासी सुखिया की डेढ़ वर्षीय बेटी लक्ष्मीना की हालात चिंताजनक है। वहीं कुसमौर निवासी आसमा (2) पुत्री शहनाज, मुंशीपुरा निवासी अलीना (2) पुत्री जाहिद और कंधेरी निवासी शाहिना (2) पुत्री इम्तेयाज की हालात ज्यादा खराब है। खास बात यह है कि यह सभी बच्चे ओपीडी के माध्यम से एनआरसी केंद्र में भर्ती हुए है। इन बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि उनके यहां न तो कभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुंची न ही कभी स्वास्थ्य विभाग की (आरबीएसके) टीम। यह स्थिति तब है जब कुपोषण खत्म करने के लिए स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्य कर रहा है।
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जहां स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की दो चिकित्सक वाली 18 टीम की ओर से नियमित आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर कुपोषित बच्चों का जांच की जाती है। अतिकुपोषित बच्चों को सदर अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराना होता है। लेकिन विभागीय अधिकारियों के मानीटरिंग न करने से आरबीएसके टीम केंद्रों पर नहीं पहुंच रही है। उधर क्षेत्र में टीम के नहीं आने पर बीमारी बढ़ने पर अतिकुपोषित बच्चों के परिजन उन्हें खुद लेकर अस्पताल पहुंच रहे है। सितंबर माह में अब तक चार मरीज जहां ओपीडी के माध्यम से एनआरसी में भर्ती हुए हैं, वहीं एक बच्चे के पालक ने सीधे एनआरसी पहुंचकर उसे भर्ती कराया है।
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