{"_id":"6ac153af794a3d4f500b3647","slug":"taxes-worth-crores-a-package-of-misery-in-return-mau-news-c-295-1-mau1002-153006-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: करोड़ों का टैक्स, बदले में बदहाली का पैकेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: करोड़ों का टैक्स, बदले में बदहाली का पैकेज
विज्ञापन
हलधरपुर थाना क्षेत्र के गढ़वा में ट्रेलर और कार में आमने सामने टक्कर के बाद क्षतिग्रस्त होकर पल
मऊ। जिले के खजाने को टैक्स देने वाले मऊ शहर के औद्योगिक क्षेत्र और घोसी औद्योगिक आस्थान आज खुद सरकारी सिस्टम की अनदेखी से बदहाल हैं। एक तरफ फैक्ट्रियों से हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व वसूला जाता है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि इन जगहों पर कारोबारी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। टूटी सड़कें, जाम पड़ी नालियां और पेयजल की समस्या इस बात की गवाही दे रही हैं कि उद्योगपतियों से वसूली तो समय पर होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें उस टैक्स से पांच फीसदी भी सुविधा मुहैया नहीं कराई जाती है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन मऊ के चैप्टर चेयरमैन राजीव प्रकाश सिंह ने बताया कि शहर के ताजोपुर औद्योगिक क्षेत्र में चौखट, ऑक्सीजन प्लांट, आटा मिल, लाई मिल, बर्फ फैक्ट्री, बेकरी, राइस मिल सहित करीब 210 यूनिट स्थापित हैं। इनमें करीब 1000 हजार से अधिक मजदूर काम करते हैं और सुबह से रात तक 2000 लोगों का आवागमन होता है। कारोबारी हर साल सरकार को 18 फीसदी के हिसाब से करीब 24 करोड़ रुपये सालाना जीएसटी देते हैं। इसके अलावा सड़कों, नालियों की मरम्मत, निर्बाध बिजली, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाओं के लिए यूपीसीडा को 12 महीने का 60 लाख रुपये टैक्स जमा करते हैं।
टैक्स के इन पैसों से यूपीसीडा को निर्बाध बिजली कनेक्शन, पानी की आपूर्ति और जल निकासी की व्यवस्था तथा औद्योगिक कचरे के उचित निपटान के लिए सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की सुविधा उपलब्ध कराना है। लेकिन मुख्य मार्ग के अलावा औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होने के बाद से किसी भी सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है।
विज्ञापन
14 में से छह यूनिट संचालित
मऊ। घोसी नगर से सटे धरौली स्थित किसान सहकारी चीनी मिल के पास लगभग चार एकड़ में फैला औद्योगिक आस्थान बदहाल है। कहने को औद्योगिक आस्थान में 14 प्लॉट हैं। विभाग की तरफ से सात शेड बनाए गए थे। इनमें पांच यूनिटें लगी थीं, लेकिन मात्र एक यूनिट ही संचालित हो रही थी। अब वर्तमान में सात यूनिटें आवंटित हैं, जिनमें छह यूनिट संचालित हैं।
राज इंजीनियरिंग में सिमेंटेड चौखट, खिड़की एवं लोहे की खिड़की, रिंग, चैनल, दरवाजा आदि का निर्माण किया जाता है। आईडीएस में कंपोजिट खाद तैयार की जाती है। शांति ट्रेडर्स में आलमारी और बक्सा आदि का निर्माण किया जाता है। देव एग्रो में ट्रॉली सहित वेल्डिंग के कार्य होते हैं। अजय कुमार द्वारा इंटरलॉकिंग की सीमेंटेड ईंट का निर्माण किया जाता है। शिखर इंटरप्राइजेज द्वारा प्रोफाइल शीट बनाई जाती है। एक प्लॉट पत्तल एवं दोना के लिए आवंटित है, जो अभी शुरू नहीं हुआ है।
इसके पूर्व इस प्लॉट में हथकरघा विभाग की दो यूनिट, मारुति की एक यूनिट, टॉफी की एक यूनिट और पावरलूम की एक यूनिट संचालित थी, जो वर्तमान में बंद हो गई हैं। विभाग की तरफ से देखरेख न होने से औद्योगिक आस्थान अतिक्रमण की जद में है। यहां सुबह से शाम तक छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है।
1965 में हुई थी घोसी के औद्योगिक आस्थान की स्थापना
द्वितीय पंचवर्षीय योजना में वर्ष 1965 में घोसी के औद्योगिक आस्थान की स्थापना हुई थी। वर्तमान में बिजली के तार और पोल जर्जर हो गए हैं। यहां प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। विभाग की तरफ से बनाए गए शेड जर्जर हाल में हैं। शेड की खिड़कियां सहित कीमती सामानों को लोग उखाड़ ले गए हैं। चहारदीवारी भी क्षतिग्रस्त है। जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने पर यहां पानी भर जाता है, जिसके बाद कारोबारियों को अपनी यूनिट बंद करनी पड़ती है।
औद्योगिक क्षेत्र में चार किमी दूर स्थित विद्युत उपकेंद्र से बिजली सप्लाई मिलती है। अलग से बिजली फीडर नहीं होने से बार-बार ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ता है। इससे उत्पादन की लागत बढ़ जाती है और गुणवत्ता पर असर पड़ता है। - राजीव प्रकाश सिंह, चैप्टर चेयरमैन, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, मऊ
केवल मुख्य मार्ग की मरम्मत कराई गई है। औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के बाद से अंदर की सड़कों की मरम्मत नहीं होने से वाहनों के आवागमन पर असर पड़ता है। - अनुज कुमार गुप्ता, उद्यमी
औद्योगिक क्षेत्र की मुख्य सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर हुआ है, जलनिकासी के लिए नाली निर्माण कराया गया है। बारिश के कारण सफाई नहीं हो पा रही थी, उसे कराया जाएगा। साथ ही उद्यमियों द्वारा अलग फीडर की मांग पर उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। - धर्मचंद्र, रीजनल मैनेजर, यूपीसीडा
विज्ञापन
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन मऊ के चैप्टर चेयरमैन राजीव प्रकाश सिंह ने बताया कि शहर के ताजोपुर औद्योगिक क्षेत्र में चौखट, ऑक्सीजन प्लांट, आटा मिल, लाई मिल, बर्फ फैक्ट्री, बेकरी, राइस मिल सहित करीब 210 यूनिट स्थापित हैं। इनमें करीब 1000 हजार से अधिक मजदूर काम करते हैं और सुबह से रात तक 2000 लोगों का आवागमन होता है। कारोबारी हर साल सरकार को 18 फीसदी के हिसाब से करीब 24 करोड़ रुपये सालाना जीएसटी देते हैं। इसके अलावा सड़कों, नालियों की मरम्मत, निर्बाध बिजली, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाओं के लिए यूपीसीडा को 12 महीने का 60 लाख रुपये टैक्स जमा करते हैं।
विज्ञापन
टैक्स के इन पैसों से यूपीसीडा को निर्बाध बिजली कनेक्शन, पानी की आपूर्ति और जल निकासी की व्यवस्था तथा औद्योगिक कचरे के उचित निपटान के लिए सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की सुविधा उपलब्ध कराना है। लेकिन मुख्य मार्ग के अलावा औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होने के बाद से किसी भी सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है।
विज्ञापन
14 में से छह यूनिट संचालित
मऊ। घोसी नगर से सटे धरौली स्थित किसान सहकारी चीनी मिल के पास लगभग चार एकड़ में फैला औद्योगिक आस्थान बदहाल है। कहने को औद्योगिक आस्थान में 14 प्लॉट हैं। विभाग की तरफ से सात शेड बनाए गए थे। इनमें पांच यूनिटें लगी थीं, लेकिन मात्र एक यूनिट ही संचालित हो रही थी। अब वर्तमान में सात यूनिटें आवंटित हैं, जिनमें छह यूनिट संचालित हैं।
राज इंजीनियरिंग में सिमेंटेड चौखट, खिड़की एवं लोहे की खिड़की, रिंग, चैनल, दरवाजा आदि का निर्माण किया जाता है। आईडीएस में कंपोजिट खाद तैयार की जाती है। शांति ट्रेडर्स में आलमारी और बक्सा आदि का निर्माण किया जाता है। देव एग्रो में ट्रॉली सहित वेल्डिंग के कार्य होते हैं। अजय कुमार द्वारा इंटरलॉकिंग की सीमेंटेड ईंट का निर्माण किया जाता है। शिखर इंटरप्राइजेज द्वारा प्रोफाइल शीट बनाई जाती है। एक प्लॉट पत्तल एवं दोना के लिए आवंटित है, जो अभी शुरू नहीं हुआ है।
इसके पूर्व इस प्लॉट में हथकरघा विभाग की दो यूनिट, मारुति की एक यूनिट, टॉफी की एक यूनिट और पावरलूम की एक यूनिट संचालित थी, जो वर्तमान में बंद हो गई हैं। विभाग की तरफ से देखरेख न होने से औद्योगिक आस्थान अतिक्रमण की जद में है। यहां सुबह से शाम तक छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है।
1965 में हुई थी घोसी के औद्योगिक आस्थान की स्थापना
द्वितीय पंचवर्षीय योजना में वर्ष 1965 में घोसी के औद्योगिक आस्थान की स्थापना हुई थी। वर्तमान में बिजली के तार और पोल जर्जर हो गए हैं। यहां प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। विभाग की तरफ से बनाए गए शेड जर्जर हाल में हैं। शेड की खिड़कियां सहित कीमती सामानों को लोग उखाड़ ले गए हैं। चहारदीवारी भी क्षतिग्रस्त है। जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने पर यहां पानी भर जाता है, जिसके बाद कारोबारियों को अपनी यूनिट बंद करनी पड़ती है।
औद्योगिक क्षेत्र में चार किमी दूर स्थित विद्युत उपकेंद्र से बिजली सप्लाई मिलती है। अलग से बिजली फीडर नहीं होने से बार-बार ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ता है। इससे उत्पादन की लागत बढ़ जाती है और गुणवत्ता पर असर पड़ता है। - राजीव प्रकाश सिंह, चैप्टर चेयरमैन, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, मऊ
केवल मुख्य मार्ग की मरम्मत कराई गई है। औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के बाद से अंदर की सड़कों की मरम्मत नहीं होने से वाहनों के आवागमन पर असर पड़ता है। - अनुज कुमार गुप्ता, उद्यमी
औद्योगिक क्षेत्र की मुख्य सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर हुआ है, जलनिकासी के लिए नाली निर्माण कराया गया है। बारिश के कारण सफाई नहीं हो पा रही थी, उसे कराया जाएगा। साथ ही उद्यमियों द्वारा अलग फीडर की मांग पर उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। - धर्मचंद्र, रीजनल मैनेजर, यूपीसीडा