{"_id":"614b694f8ebc3e0de45dcd03","slug":"somewhere-there-is-a-lock-on-the-toilet-and-somewhere-a-junk-house-mau-news-vns613133283","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहीं शौचालय पर ताला तो कहीं कबाड़ घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कहीं शौचालय पर ताला तो कहीं कबाड़ घर
विज्ञापन
कोपागंज में शोपीस बना सामुदायिक शौचालय।संवाद
- फोटो : MAU
मऊ। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत केंद्र सरकार ने दो अक्तूबर 2014 कोअभियान शुरू किया था। इसके तहत शौचालय विहीन
परिवारों को चिंहित कर शौचालय बनवाने के लिए धन दिया गया। शौचालय निर्माण के आधार पर गांवों और जिले को ओडीएफ होने का दावा किया गया। लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में बहुत से शौचालय अधूरे हैं। जहां शौचालय बने भी हैं, तो लोग उसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। शौचालय के नाम पर धन की बंदरबांट भी खूब की गई है। गांवों में लोग अभी खुले में शौच जा रहे हैं। गांवों की सड़कों , चकमार्गों और नहरों की गंदगी से पटी पटरियां ओडीएफ का आइना दिखा रही हैं।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिन परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। उन्हें सरकार की ओर से शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार रुपये अनुदान दिए गए। खुले में शौच न करने को प्रेरित करने के लिए अधिकारियों की टीमें गांवों में गांवों में लगाई गईं। युवकों और युवतियों की टीमों का गठन करके पुरुषों और महिलाओं को जागरूक किया गया। गांवों में 90 प्रतिशत परिवारों के शौचालय बनने पर गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया। शौचालय निर्माण को लेकर खूब धांधली भी हुई। पुराने शौचालयों को दिखाकर अनुदान हड़प लिए गए। शौचालय निर्माण में देरी होने पर सेक्रेटरियों के विरुद्ध कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद गांवों की दशा में सुधार नहीं हो पाया। आज भी गांवों में लोग खुले में शौच जाते हैं। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों हैं। कई परिवारों ने लाख प्रयास के बाद शौचालय पूर्ण नहीं कराए। कई परिवार अपने घर बने शौचालयों में कबाड़ के सामन रखे हुए हैं। कई शौचालयों में दरवाज नहीं लगे तो कई में पानी की व्यवस्था ही नहीं है। जागरूकता के अभाव और रूढ़िवादी विचारों को लेकर अधिकांश लोग घर में बने शौचालयों का प्रयोग नहीं करते और बाहर जाकर खुले में शौच करते हैं।
2.26 लाख से अधिक बन चुके हैं शौचालय
मऊ। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक जनपद में कुल दो लाख 26 हजार 725 परिवारों में शौचालयों का निर्माण हो चुके हैं।वर्तमान में फेज 2 में आठ हजार 934 शौचालयों का लक्ष्य है। इनमें से अब तक 471 शौचालय बन गए हैं।शेष अभी बनने हैं।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय पर भी बदहाल स्थिति
मऊ। जिला मुख्यालय पर नगरपालिका क्षेत्र के कई मुहल्लों के महिला पुरष भी खुले में शौच में जाते हैं। नगर के ख्वाजाजहांपुर मुहल्ले में महिलाएं और पुरुष खुले में शौच जाते हैं। इस मुहल्ले के लोग एएसपी और एसपी आवास के पीछे की ओर खाली पड़े भूखंडों में खुले में महिलाएं झुंड के झुंड खुले में शौच जाते हैं।ऐसा ही हाल हकीकतपुरा और तमसा नदी के दूसरे किनारे पर बसे मुहल्लों का है।
लोगों को घरों में बने शौचालयों का उपयोग करना चाहिए।गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों का उपयोग करना चाहिए। 90 प्रतिशत शौचालय वाले गांवों को ओडीएफ घोषित किया जाता है। जिले में इससे अधिक परिवारों में शौचालय बनवा दिए गए हैं। - घनश्याम सागर, डीपीआरओ,मऊ।
विज्ञापन
परिवारों को चिंहित कर शौचालय बनवाने के लिए धन दिया गया। शौचालय निर्माण के आधार पर गांवों और जिले को ओडीएफ होने का दावा किया गया। लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में बहुत से शौचालय अधूरे हैं। जहां शौचालय बने भी हैं, तो लोग उसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। शौचालय के नाम पर धन की बंदरबांट भी खूब की गई है। गांवों में लोग अभी खुले में शौच जा रहे हैं। गांवों की सड़कों , चकमार्गों और नहरों की गंदगी से पटी पटरियां ओडीएफ का आइना दिखा रही हैं।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिन परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। उन्हें सरकार की ओर से शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार रुपये अनुदान दिए गए। खुले में शौच न करने को प्रेरित करने के लिए अधिकारियों की टीमें गांवों में गांवों में लगाई गईं। युवकों और युवतियों की टीमों का गठन करके पुरुषों और महिलाओं को जागरूक किया गया। गांवों में 90 प्रतिशत परिवारों के शौचालय बनने पर गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया। शौचालय निर्माण को लेकर खूब धांधली भी हुई। पुराने शौचालयों को दिखाकर अनुदान हड़प लिए गए। शौचालय निर्माण में देरी होने पर सेक्रेटरियों के विरुद्ध कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद गांवों की दशा में सुधार नहीं हो पाया। आज भी गांवों में लोग खुले में शौच जाते हैं। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों हैं। कई परिवारों ने लाख प्रयास के बाद शौचालय पूर्ण नहीं कराए। कई परिवार अपने घर बने शौचालयों में कबाड़ के सामन रखे हुए हैं। कई शौचालयों में दरवाज नहीं लगे तो कई में पानी की व्यवस्था ही नहीं है। जागरूकता के अभाव और रूढ़िवादी विचारों को लेकर अधिकांश लोग घर में बने शौचालयों का प्रयोग नहीं करते और बाहर जाकर खुले में शौच करते हैं।
विज्ञापन
2.26 लाख से अधिक बन चुके हैं शौचालय
मऊ। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक जनपद में कुल दो लाख 26 हजार 725 परिवारों में शौचालयों का निर्माण हो चुके हैं।वर्तमान में फेज 2 में आठ हजार 934 शौचालयों का लक्ष्य है। इनमें से अब तक 471 शौचालय बन गए हैं।शेष अभी बनने हैं।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय पर भी बदहाल स्थिति
मऊ। जिला मुख्यालय पर नगरपालिका क्षेत्र के कई मुहल्लों के महिला पुरष भी खुले में शौच में जाते हैं। नगर के ख्वाजाजहांपुर मुहल्ले में महिलाएं और पुरुष खुले में शौच जाते हैं। इस मुहल्ले के लोग एएसपी और एसपी आवास के पीछे की ओर खाली पड़े भूखंडों में खुले में महिलाएं झुंड के झुंड खुले में शौच जाते हैं।ऐसा ही हाल हकीकतपुरा और तमसा नदी के दूसरे किनारे पर बसे मुहल्लों का है।
लोगों को घरों में बने शौचालयों का उपयोग करना चाहिए।गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों का उपयोग करना चाहिए। 90 प्रतिशत शौचालय वाले गांवों को ओडीएफ घोषित किया जाता है। जिले में इससे अधिक परिवारों में शौचालय बनवा दिए गए हैं। - घनश्याम सागर, डीपीआरओ,मऊ।