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सीता चोंच चरण हति भागा मूढ़ मंद मति कारन कागा
mau news
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:50 PM IST
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मऊ। श्रीरामलीला मेला समिति के तत्वावधान में नगर में चल रही रामलीला में जयंत नेत्र वेधन, अत्री अनुसूइया से भेंट, विराध राक्षस वध, सरभंग दाह, मुनियों से समागम सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के भक्तवत्सल स्वरूप को देखकर श्रद्धालुओं के जयकारे से पंडाल गूंज उठा।
चित्रकूट से पंचवटी पर हुई रामलीला के मंचन में राम वन गमन के बाद भगवान राम, लक्ष्मण, सीता के साथ पंचवटी में निवास करते हैं। इंद्र का पुत्र जयंत सीता के चरण में चोंच मारता है और भगवान श्रीराम उसका पीछा करते हैं। वह सभी देवताओं के पास जाता है इसके बाद भी उसे शरणागत नहीं मिलती है। सभी देवताओं द्वारा यही कहा जाता कि भगवान श्रीराम के चरणों में गिरने से ही तुम्हें शांति मिल सकती है। देवताओं के सलाह पर वह भगवान राम के चरणों मेें गिरकर क्षमा मांगता है। प्रभु श्रीराम उसकी दुष्टता पर बाण चला कर उसका एक नेत्र भेद कर उसे क्षमा कर देते हैं। भक्तवत्सल स्वरूप को देखकर लोगों के जयश्रीराम के जयकारे से पंडाल गूंज उठा। वन में भ्रमण करने के दौरान श्रीराम, लक्ष्मण व सीता अत्री मुनि के आश्रम में जाते हैं। वहां सती अनुसूइया से भेंट होती है। सती अनुसुइइया सीता का स्वागत करते हुए प्रतिव्रता नारी के कर्तव्यों का बोध करात हैं। इसी दौरान विराध राक्षस का वध करते हैं। विराध राक्षस का वध होते ही दर्शकों ने जयश्रीराम का जयकारा लगाया।
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चित्रकूट से पंचवटी पर हुई रामलीला के मंचन में राम वन गमन के बाद भगवान राम, लक्ष्मण, सीता के साथ पंचवटी में निवास करते हैं। इंद्र का पुत्र जयंत सीता के चरण में चोंच मारता है और भगवान श्रीराम उसका पीछा करते हैं। वह सभी देवताओं के पास जाता है इसके बाद भी उसे शरणागत नहीं मिलती है। सभी देवताओं द्वारा यही कहा जाता कि भगवान श्रीराम के चरणों में गिरने से ही तुम्हें शांति मिल सकती है। देवताओं के सलाह पर वह भगवान राम के चरणों मेें गिरकर क्षमा मांगता है। प्रभु श्रीराम उसकी दुष्टता पर बाण चला कर उसका एक नेत्र भेद कर उसे क्षमा कर देते हैं। भक्तवत्सल स्वरूप को देखकर लोगों के जयश्रीराम के जयकारे से पंडाल गूंज उठा। वन में भ्रमण करने के दौरान श्रीराम, लक्ष्मण व सीता अत्री मुनि के आश्रम में जाते हैं। वहां सती अनुसूइया से भेंट होती है। सती अनुसुइइया सीता का स्वागत करते हुए प्रतिव्रता नारी के कर्तव्यों का बोध करात हैं। इसी दौरान विराध राक्षस का वध करते हैं। विराध राक्षस का वध होते ही दर्शकों ने जयश्रीराम का जयकारा लगाया।
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