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सप्तम कालरात्रि की हुई आराधना
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Mon, 03 Apr 2017 11:05 PM IST
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नवरात्र में मां कोयल मर्याद भवानी मंदिर मांदी सिपाह में सजा मां का दरबार।
नवरात्र के सातवें दिन सोमवार को दुर्गा मंदिरों में सप्तम कालरात्रि की आराधना की गई। दूर दराज से आए श्रद्घालुओं ने मां के चरणों में शीश झुकाकर मंगलकामना की। मनोकामना लेकर मां के दरबार में पहुंचे श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गूंज उठा।
नवरात्र के सातवें दिन नगर के शीतला माता मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें तड़के से ही भक्तों का रेला लगा रहा। दूर दराज सहित गैर जनपदों से पहुंचे भारी संख्या में श्रद्घालुओं ने श्रद्घा भाव से मत्था टेका। कहा जाता है कि काली जी की पूजा से सब कुछ सिद्ध होता है। नवरात्र में सप्तमी का विशेष महत्व है। मां काली नवरात्र के सप्तमी के दिन मंदिरों में विराजमान होती हैं। इसी मान्यता के तहत जगत जननी मां का दर्शन करने के लिए आए भक्तों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
शक्ति की उपासना करके फल की प्राप्ति के लिए हर रोज भारी संख्या में श्रद्धालु मां का दर्शन कर रहे हैं। मां के जयकारे तथा भक्तों की भारी भीड़ से प्रमुख मंदिर परिसर में मेला जैसा दृश्य हो गया है। कोई नारियल, चुनरी सहित मिष्ठान चढ़ाकर मां की आराधना कर रहा है तो कोई पूड़ी हलवा चढ़ाकर मां का पूजन अर्चन कर रहा है। देर शाम तक चहल पहल रह रही है। भक्तों के जयकारे और भक्तिगीतों के बजते रहने से वातावरण भक्तिमय हो गया है। उधर कई प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं का अभाव रहा, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी हुई।
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नवरात्र के सातवें दिन नगर के शीतला माता मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें तड़के से ही भक्तों का रेला लगा रहा। दूर दराज सहित गैर जनपदों से पहुंचे भारी संख्या में श्रद्घालुओं ने श्रद्घा भाव से मत्था टेका। कहा जाता है कि काली जी की पूजा से सब कुछ सिद्ध होता है। नवरात्र में सप्तमी का विशेष महत्व है। मां काली नवरात्र के सप्तमी के दिन मंदिरों में विराजमान होती हैं। इसी मान्यता के तहत जगत जननी मां का दर्शन करने के लिए आए भक्तों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
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शक्ति की उपासना करके फल की प्राप्ति के लिए हर रोज भारी संख्या में श्रद्धालु मां का दर्शन कर रहे हैं। मां के जयकारे तथा भक्तों की भारी भीड़ से प्रमुख मंदिर परिसर में मेला जैसा दृश्य हो गया है। कोई नारियल, चुनरी सहित मिष्ठान चढ़ाकर मां की आराधना कर रहा है तो कोई पूड़ी हलवा चढ़ाकर मां का पूजन अर्चन कर रहा है। देर शाम तक चहल पहल रह रही है। भक्तों के जयकारे और भक्तिगीतों के बजते रहने से वातावरण भक्तिमय हो गया है। उधर कई प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं का अभाव रहा, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी हुई।
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