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आधी अधूरी तैयारियों के बीच खुले माध्यमिक और परिषदीय विद्यालय:
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कोरोना संक्रमण के चलते बीते 24 मार्च से बंद स्कूल करीब सौ दिन बाद एक जुलाई यानि बृहस्पतिवार को खुले लेकिन तैयारियां आधी अधूरी रही। यह अलग बात है कि स्कूल खुलने पर सिर्फ शिक्षकों को ही विद्यालय आना था। लेकिन साफ सफाई और व्यवस्थाओं का अभाव दिखा। पहले दिन शिक्षकों ने प्रशासनिक कार्य करने के साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया। कंपोजिट बजट जारी होने के बाद भी कई विद्यालयों में गंदगी फैली थी तो कई में जलभराव था, इसके लिए जिम्मेदार कौन?
बताते चले मऊ जिले में 67 सहायता प्राप्त, 14 राजकीय माध्यमिक विद्यालय सहित 436 मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित है, इनमें लगभग दो लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.56 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। कोरोना संक्रमण के चलते परिषदीय तथा माध्यमिक विद्यालय बंद चल रहे हैं। शासन के आदेश पर बृहस्पतिवार से माध्यमिक तथा परिषदीय विद्यालय खुल गए, लेकिन शिक्षक विद्यालय तो आए, लेकिन तैयारी आधी अधूरी दिखी। यही नहीं विद्यालय कैंपस में गंदगी का अंबार लगा रहा। नगरीय क्षेत्र के कई विद्यालयों का परिवेश बेहद खराब मिला। प्रधानाध्यापक बजट का रोना रो रहे थे। नगर के क्षेत्र के कंपोजिट स्कूल बकवल पहले दिन खुला। विद्यालय कैंपस में जलजमाव रहा। परिसर घास से पटा था। साफ सफाई व्यवस्था दयनीय मिली। इसी क्रम में पुलिस लाइन स्थित प्राथमिक विद्यालय पहले दिन खुला। विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित मिला। परिसर में साफ सफाई की स्थिति दयनीय थी।
मधुबन संवाददाता के अनुसार शासन के फरमान पर बृहस्पतिवार से परिषदीय विद्यालय खुले लंबे समय तक विद्यालय बंद होने की वजह से गंदगी मिली। शिक्षक और रसोईयां सब मिलकर विद्यालय की साफ-सफाई करते नजर आए। प्राथमिक विद्यालय गांगेवीर के प्रभारी प्रधानाध्यापक अशोक सिंह ने बताया कि बच्चों को ऑन लाइन शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है।
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रानीपुर संवाददाता के अनुसार बृहस्पतिवार को क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में परिषदीय तथा माध्यमिक विद्यालय खुले। शिक्षकों ने प्रशासनिक कार्य करने के साथ ही ऑनलाइन कक्षाएं संचालित किया।
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बताते चले मऊ जिले में 67 सहायता प्राप्त, 14 राजकीय माध्यमिक विद्यालय सहित 436 मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित है, इनमें लगभग दो लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.56 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। कोरोना संक्रमण के चलते परिषदीय तथा माध्यमिक विद्यालय बंद चल रहे हैं। शासन के आदेश पर बृहस्पतिवार से माध्यमिक तथा परिषदीय विद्यालय खुल गए, लेकिन शिक्षक विद्यालय तो आए, लेकिन तैयारी आधी अधूरी दिखी। यही नहीं विद्यालय कैंपस में गंदगी का अंबार लगा रहा। नगरीय क्षेत्र के कई विद्यालयों का परिवेश बेहद खराब मिला। प्रधानाध्यापक बजट का रोना रो रहे थे। नगर के क्षेत्र के कंपोजिट स्कूल बकवल पहले दिन खुला। विद्यालय कैंपस में जलजमाव रहा। परिसर घास से पटा था। साफ सफाई व्यवस्था दयनीय मिली। इसी क्रम में पुलिस लाइन स्थित प्राथमिक विद्यालय पहले दिन खुला। विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित मिला। परिसर में साफ सफाई की स्थिति दयनीय थी।
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मधुबन संवाददाता के अनुसार शासन के फरमान पर बृहस्पतिवार से परिषदीय विद्यालय खुले लंबे समय तक विद्यालय बंद होने की वजह से गंदगी मिली। शिक्षक और रसोईयां सब मिलकर विद्यालय की साफ-सफाई करते नजर आए। प्राथमिक विद्यालय गांगेवीर के प्रभारी प्रधानाध्यापक अशोक सिंह ने बताया कि बच्चों को ऑन लाइन शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है।
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रानीपुर संवाददाता के अनुसार बृहस्पतिवार को क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में परिषदीय तथा माध्यमिक विद्यालय खुले। शिक्षकों ने प्रशासनिक कार्य करने के साथ ही ऑनलाइन कक्षाएं संचालित किया।