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सड़क निर्माण में हुए घपले की जांच शुरू

Wed, 31 Aug 2016 11:48 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ Updated Wed, 31 Aug 2016 11:48 PM IST
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Road construction began investigating the scandal
पीडब्‍ल्यूडी कार्यालय में घोटाले की जांच करने आजमगढ़ से पहुंची जांच टीम । अमर उजाला
लोक निर्माण विभाग की ओर से कराए गए परदहा ब्लॉक की सात सड़कों के निर्माण में विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से भुगतान में घपला उजागर हुआ है। मुख्य अभियंता ने जांच शुरू कर दी है। मुख्य अभियंता आजमगढ़ द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम बुधवार को यहां पहुंची। टीम ने अभिलेखों की जांच और अवर अभियंता से पूछताछ की। टीम कुछ कागजात भी ले गई।
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जानकारी के अनुसार परदहा ब्लॉक के बकवल केंद्रीय विद्यालय मार्ग, स्पिनिंग मिल-सलाहाबाद मार्ग सहित सात सड़कों के लिए फरवरी 2016 में टेंडर डाले गए थे। कम दर होने के चलते टेंडर स्वीकृत किए गए। लगभग 36 लाख की लागत से मरम्मत करके सात सड़कों का निर्माण जैसे-तैसे पूरा दिखा दिया गया। लेकिन इसमें ठेकेदारों को मुनाफा नहीं हुआ तो उन्हें लाभ पहुंचाने  के लिए नई तरकीब निकाली गई।
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इन कार्यों के टेंडर निरस्त करके अधिक दर वाले पहले के कार्यों के अनुबंधों पर एक करोड़ 42 लाख तीन हजार आठ सौ छियासी रुपये का भुगतान पहली जुलाई से आठ जुलाई 2016 के बीच किया गया। इसी बीच 11 जुलाई 2016 को अधिशासी अभियंता पवन कुमार का निलंबन हो गया। निरस्त टेंडर की सिक्योरिटी रकम लगभग 36 लाख नियमत: विभागीय कोष में जमा कराना चाहिए था, जो नहीं कराई गई। बिना काम कराए लगभग एक करोड़ 42 लाख रुपये  का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया।
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25 जुलाई 2016 को मधुबन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके सपा नेता राजेंद्र मिश्र के लेटर पैड पर शिकायत की गई कि विभाग के एक्सईएन के निलंबन के बाद उर्दू अनुवादक नाहिद कमाल पासा, प्रधान सहायक तारकेश्वर सिंह, वीरेंद्र कुमार भार्गव, कतवारू राम और चंद्रेश कुमार ने पत्रावलियों में कूटरचना करके एक साल पहले यानी सितंबर 2015 की आठ तिथियों में अनुबंध निरस्त करने की खानापूरी बैक डेट में की। जब तक लिपिकों को निलंबित नहीं किया जाएगा, तब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होगी।


डीएम वैभव श्रीवास्तव ने मामले की जांच के लिए सीडीओ जीके त्यागी को लिखा। इस बीच सपा नेता ने लिखकर दे दिया कि हमारे पैड का दुरुपयोग किया गया है। मैंने शिकायत नहीं की थी। सीडीओ ने भी जांच की पत्रावली पर नाट नेसेसरी लिखकर फाइल बंद कर दी। दूसरी तरफ, इस मामले की एक और शिकायत पर शासन ने अपने स्तर पर इस मामले की जांच जारी रखी।

 
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