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Mau News: ग्राम प्रधान के चुनाव को चुनौती देने वाली निगरानी याचिका खारिज
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वलीदपुर। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के ग्राम पंचायत अलाउद्दीनपट्टी में वर्ष 2021 में हुए ग्राम प्रधान के चुनाव को चुनौती देने वाली सिविल निगरानी याचिका को अदालत ने निरस्त कर दिया है। द्वितीय अपर जनपद न्यायाधीश दीप नारायण तिवारी की अदालत ने याचिकाकर्ता बिंदु यादव की अर्जी खारिज करते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा 03 फरवरी 2023 को दिए गए आदेश की पुष्टि की। इस फैसले से निर्वाचित प्रधान लाली देवी को बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लाली देवी ग्राम पंचायत अलाउद्दीनपट्टी से प्रधान पद पर निर्वाचित हुई थीं। चुनाव में पराजित प्रत्याशी बिंदु यादव ने उपजिलाधिकारी न्यायालय मुहम्मदाबाद गोहना में याचिका दाखिल कर मतदान व मतगणना में धांधली और फर्जी मतदान का आरोप लगाया था। उपजिलाधिकारी न्यायालय ने 03 फरवरी 2023 को याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ बिंदु यादव ने जिला अदालत में सिविल निगरानी याचिका दाखिल की थी।
याचिकाकर्ता के आरोप
याचिका में बिंदु ने आरोप लगाया गया था कि गांव से बाहर रहने वाले और मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी मतदान कराया गया। साथ ही, लगभग 80 से अधिक मतपत्रों के काउंटरफॉइल पर मतदाताओं के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान लिए बिना वोट डलवाए गए। जिनमें से अधिकतर वोट विपक्षी प्रत्याशी के पक्ष में थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच मात्र 40 वोटों का अंतर होने के कारण पुनर्मतगणना की मांग की गई थी।
अदालत का निर्णय
मामले की सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर जनपद न्यायाधीश ने पाया कि मतदान के दौरान पीठासीन अधिकारी के समक्ष कोई लिखित शिकायत दर्ज कराने का साक्ष्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फर्जी या अनुपस्थित मतदाताओं के संबंध में ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। मतपत्रों के प्रतिपर्ण पर हस्ताक्षर न होने के आरोप भी सिद्ध नहीं हो पाए। न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के फैसले में कोई विधिक त्रुटि न पाते हुए निगरानी याचिका को निरस्त कर दिया।
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याचिकाकर्ता के आरोप
याचिका में बिंदु ने आरोप लगाया गया था कि गांव से बाहर रहने वाले और मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी मतदान कराया गया। साथ ही, लगभग 80 से अधिक मतपत्रों के काउंटरफॉइल पर मतदाताओं के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान लिए बिना वोट डलवाए गए। जिनमें से अधिकतर वोट विपक्षी प्रत्याशी के पक्ष में थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच मात्र 40 वोटों का अंतर होने के कारण पुनर्मतगणना की मांग की गई थी।
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अदालत का निर्णय
मामले की सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर जनपद न्यायाधीश ने पाया कि मतदान के दौरान पीठासीन अधिकारी के समक्ष कोई लिखित शिकायत दर्ज कराने का साक्ष्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फर्जी या अनुपस्थित मतदाताओं के संबंध में ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। मतपत्रों के प्रतिपर्ण पर हस्ताक्षर न होने के आरोप भी सिद्ध नहीं हो पाए। न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के फैसले में कोई विधिक त्रुटि न पाते हुए निगरानी याचिका को निरस्त कर दिया।
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