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चार परिवारों की रिहायशी मड़इयां घाघरा में समाईं
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दुबारी। घाघरा जलस्तर घटते ही बिंदटोलिया गांव में कटान तेजी से हो रहा है। कटान को लेकर गांववासी दहशत में हैं। बिंटोलिया गांव के चार परिवारों की रिहायशी मड़ई कटान सेे नदी की धारा मेें विलीन हो गई हैै। कटान की विभीषिका को देखते हुए गांववासी घरों को खाली करके अपने सामान को सुरक्षित जगह पर ले जा रहे हैं।
नदी की तेज धाराएं लगातार जमीन काट रही है। कटान पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से किए जा रहेेेे प्रयास नाकाफी हैैं। इससे कोई लाभ नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में लगभग सैकड़ों किसानों की जमीन हजारों एकड़ जमीन घाघरा नदी में चली गई और कटान पीड़ितों का कहना है कि आज तक न तो जमीन मिली न तो कोई मुआवजा ही मिला। मुआवजा के लिए तहसील पर धरना प्रदर्शन भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि कटान अब गांव तक आ गई है। पीड़ितों का यह कहना है कि एक वर्ष पूर्व में बिंदटोलिया गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर कटान हो रही थी। गांव केे लोगों नेेे तीन सालों सेेे लगातार हो रही कटान रोकने के लिए तहसील पर धरना प्रदर्शन किया और उच्चाधिकारियों से मांग की। प्रशासन की लापरवाही का ही नतीजा है कि नदी कटान करते करते गांव केे करीब पहुंच गई। गांव केेेे पास दो दिनों लगातार नदी जमीन काट रही है। बिंदटोलिया निवासी हरी चौहान, केदार यादव, रामदवर यादव, दशरथ यादव आदि अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित जगह पर सामान पहुुंचा रहे हैं।
अब भी पानी मेें डूूबा है बिसुनपुरवा का संपर्क मार्ग
दुबारी । घाघरा नदी जलस्तर लगातार घटने के बाद क्षेत्र के अधिकांश मार्गों से घाघरा का पानी तो हट गया है। तटवर्ती क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों का आवागमन भी शुुरू हो गया है लेकिन बिशुन पुरवा का संपर्क मार्ग अब भी पानी में डूूबा हुआ है। संपर्क मार्ग पानी मेें डूबा होने से बिशुनपुरवा के ग्रामीण जरूरत पड़ने पर पानी में घुसकर बाजार आते जाते हैं ।
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घाघरा का जलस्तर बृहस्पतिवार को परसिया जयराम गिरि हाहा नाला रेगुलेटर पर 65.31 सेमी रिकार्ड किया गया। जबकि बुधवार को यहां का जलस्तर 65.40 सेमी था। इस तरह से 24 घंटे में नदी के जलस्तर में नौ सेमी कमी आई।
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नदी की तेज धाराएं लगातार जमीन काट रही है। कटान पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से किए जा रहेेेे प्रयास नाकाफी हैैं। इससे कोई लाभ नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में लगभग सैकड़ों किसानों की जमीन हजारों एकड़ जमीन घाघरा नदी में चली गई और कटान पीड़ितों का कहना है कि आज तक न तो जमीन मिली न तो कोई मुआवजा ही मिला। मुआवजा के लिए तहसील पर धरना प्रदर्शन भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि कटान अब गांव तक आ गई है। पीड़ितों का यह कहना है कि एक वर्ष पूर्व में बिंदटोलिया गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर कटान हो रही थी। गांव केे लोगों नेेे तीन सालों सेेे लगातार हो रही कटान रोकने के लिए तहसील पर धरना प्रदर्शन किया और उच्चाधिकारियों से मांग की। प्रशासन की लापरवाही का ही नतीजा है कि नदी कटान करते करते गांव केे करीब पहुंच गई। गांव केेेे पास दो दिनों लगातार नदी जमीन काट रही है। बिंदटोलिया निवासी हरी चौहान, केदार यादव, रामदवर यादव, दशरथ यादव आदि अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित जगह पर सामान पहुुंचा रहे हैं।
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अब भी पानी मेें डूूबा है बिसुनपुरवा का संपर्क मार्ग
दुबारी । घाघरा नदी जलस्तर लगातार घटने के बाद क्षेत्र के अधिकांश मार्गों से घाघरा का पानी तो हट गया है। तटवर्ती क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों का आवागमन भी शुुरू हो गया है लेकिन बिशुन पुरवा का संपर्क मार्ग अब भी पानी में डूूबा हुआ है। संपर्क मार्ग पानी मेें डूबा होने से बिशुनपुरवा के ग्रामीण जरूरत पड़ने पर पानी में घुसकर बाजार आते जाते हैं ।
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घाघरा का जलस्तर बृहस्पतिवार को परसिया जयराम गिरि हाहा नाला रेगुलेटर पर 65.31 सेमी रिकार्ड किया गया। जबकि बुधवार को यहां का जलस्तर 65.40 सेमी था। इस तरह से 24 घंटे में नदी के जलस्तर में नौ सेमी कमी आई।