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Mau News: राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण में मिलीं 100 वर्षों से अधिक पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां
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ज्ञान भारतम् मिशन के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जमालपुर हलधरपुर रेलवे स्टे
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में शनिवार को कई दुर्लभ पांडुलिपियां मिलीं, जो 100 वर्षों से अधिक पुरानी हैं। इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा।
जिले में 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों को सूचीबद्ध किया जाएगा। ज्ञान भारतम् मिशन के एप पर प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्र, दुर्लभ अभिलेखों एवं ग्रंथों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से टीम का गठन किया गया है।
सर्वेक्षण के क्रम में शनिवार को ज्ञानोदय संस्कृत महाविद्यालय कमलसागर के प्रधानाचार्य डॉ. विद्याभूषण मिश्रा और आचार्य बापू नंदन मिश्रा के सर्वेक्षण में दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं, जो 100 वर्षों से अधिक पुरानी हैं। ये पांडुलिपियां जमालपुर हलधरपुर रेलवे स्टेशन स्थित श्री रमा बैकुंठ नाथ जी के प्राचीन मंदिर से प्राप्त हुईं।
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यह पांडुलिपियां मंदिर के निर्माणकर्ता श्री बैकुंठ नाथ आचार्य ब्रह्मचारी के हाथों से लिखित हैं। वर्तमान में इनका संरक्षण देवेंद्र नाथ उपाध्याय और उनके पुत्र रामचंद्र उपाध्याय द्वारा किया जा रहा है।
ये पांडुलिपियां मुख्य रूप से रामायण और भागवत से संबंधित हैं। देवेंद्र नाथ उपाध्याय ने बताया कि आचार्य ब्रह्मचारी लगभग 10 भाषाओं के जानकार थे और यह पांडुलिपियां उनके ही हाथों से लिखी गई हैं।
आचार्य बापू नंदन मिश्रा ने बताया कि सरकार की ओर से इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जबकि इनका स्वामित्व उनके मूल स्वामियों के पास ही सुरक्षित रहेगा।
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जिले में 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों को सूचीबद्ध किया जाएगा। ज्ञान भारतम् मिशन के एप पर प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्र, दुर्लभ अभिलेखों एवं ग्रंथों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से टीम का गठन किया गया है।
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सर्वेक्षण के क्रम में शनिवार को ज्ञानोदय संस्कृत महाविद्यालय कमलसागर के प्रधानाचार्य डॉ. विद्याभूषण मिश्रा और आचार्य बापू नंदन मिश्रा के सर्वेक्षण में दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं, जो 100 वर्षों से अधिक पुरानी हैं। ये पांडुलिपियां जमालपुर हलधरपुर रेलवे स्टेशन स्थित श्री रमा बैकुंठ नाथ जी के प्राचीन मंदिर से प्राप्त हुईं।
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यह पांडुलिपियां मंदिर के निर्माणकर्ता श्री बैकुंठ नाथ आचार्य ब्रह्मचारी के हाथों से लिखित हैं। वर्तमान में इनका संरक्षण देवेंद्र नाथ उपाध्याय और उनके पुत्र रामचंद्र उपाध्याय द्वारा किया जा रहा है।
ये पांडुलिपियां मुख्य रूप से रामायण और भागवत से संबंधित हैं। देवेंद्र नाथ उपाध्याय ने बताया कि आचार्य ब्रह्मचारी लगभग 10 भाषाओं के जानकार थे और यह पांडुलिपियां उनके ही हाथों से लिखी गई हैं।
आचार्य बापू नंदन मिश्रा ने बताया कि सरकार की ओर से इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जबकि इनका स्वामित्व उनके मूल स्वामियों के पास ही सुरक्षित रहेगा।