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रघुकुल रिति सदा चली आई, प्राण जाई पर बचन न जाई
mau news
Updated Wed, 20 Sep 2017 11:12 PM IST
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राजगद्दी के मैदान पर शहर की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन करते कलाकार।
मऊ। श्री रामलीला मेला समिति मऊनाथ भंजन के तत्वाधान में बुधवार की देर शाम नगर क्षेत्र के राजगद्दी मैदान में पहले दिन की रामलीला का सजीव मंचन शुरू हुआ। इस दौरान अयोध्या नरेश राजा दशरथ ने प्रभु श्रीराम का जैसे ही राज्याभिषेक करने का एलान किया, तभी उनको पता चला कि उनकी दूसरी पटरानी कैकेई कोपभवन में पड़ी है। इस पर राजा दशरथ रानी का हाल जानने के लिए कोपभवन में पहुंचे। यहां कैकेई ने राजा दशरथ से दिए गए दो वर के बारे में पूछा। और बोली राजन अब वक्त आ गया है आप अपने वचन को पूरा करें। इस पर राजा दशरथ ने कहा रघुकुल रिति सदा चली आई प्राण जाए पर बचन न जाई। हमको अपना बचन याद है रानी मांगों क्या मांगती हो।
इस दौरान कैकेई ने एक बार फिर से राजा दशरथ को चेताया और जब राजा अपने वचन से पीछे हटने से इंकार कर दिए तो उन्होंने सीधे दो वर में प्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास तथा भरत को राजगद्दी देने की मांग की। इस पर राजा दशरथ अवाक हो गए। साथ ही मूर्छित होकर गिर पड़े। बोले रानी इसके अलावा तुम कुछ और मांग लो, लेकिन इस बुढ़ापे में बेटे के बिछोह का दुख हम नहीं सह पाएंगे। भरत को राजगद्दी भी मंजूर है। लेकिन कैकेई अपनी मांग पर अडिग रहीं। तभी इस बात की जानकारी प्रभु श्रीराम के साथ पूरे नगरवासियों को हो जाती है। फिर क्या था पूरा नगर अधीर हो चला।
इस दौरान प्रभुश्रीराम अपने कुल की मर्यादा और रीति को पूरा करने के वास्ते वन जाने को तैयार हो जाते है। इस दौरान उन्हें उनकी मां कौशिल्या समझाने का प्रयास करती हैं। बाद में जानकारी होने पर माता सीता और भ्राता लक्ष्मण भी प्रभु के संग वन जाने के लिए हठ कर बैठते है। इस दौरान प्रभु दोनों लोगों को समझाने का प्रयास किए। लेकिन सफल नहीं हुए, सीता मैया ने कहा कि आप के बिना मेरे इस महल में कोई काम नहीं, तो भ्राता लक्ष्मण ने कहा कि मैं तो प्रभु का सेवक हूं, जहां प्रभु वहां सेवक दोनों भाइयों के प्यार को देख दर्शकों के आंखों से आंसू छलक गए। इतना ही नहीं पिता दशरथ भी प्रभु को बहुत समझाने का प्रयास किए। लेकिन प्रभु ने उनकी एक न सुनी और वन जाने की तैयारी में जुट गए। पहले दिन के मंचन में रामलीला समिति के पदाधिकारी जहां व्यवस्था करने में जुटे रहे। वहीं रामलीला की सुरक्षा के कड़े इंतेजाम किए गए थे। गुरुवार की लीला बाबा बिहारी दास के मंदिर प्रांगण से शुरू होगर दशई पोखरा के बीच संपन्न होगी। इस दौरान प्रभु श्री राम अयोध्या से रथ द्वारा वन के लिए प्रस्थान करेंगे।
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इस दौरान कैकेई ने एक बार फिर से राजा दशरथ को चेताया और जब राजा अपने वचन से पीछे हटने से इंकार कर दिए तो उन्होंने सीधे दो वर में प्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास तथा भरत को राजगद्दी देने की मांग की। इस पर राजा दशरथ अवाक हो गए। साथ ही मूर्छित होकर गिर पड़े। बोले रानी इसके अलावा तुम कुछ और मांग लो, लेकिन इस बुढ़ापे में बेटे के बिछोह का दुख हम नहीं सह पाएंगे। भरत को राजगद्दी भी मंजूर है। लेकिन कैकेई अपनी मांग पर अडिग रहीं। तभी इस बात की जानकारी प्रभु श्रीराम के साथ पूरे नगरवासियों को हो जाती है। फिर क्या था पूरा नगर अधीर हो चला।
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इस दौरान प्रभुश्रीराम अपने कुल की मर्यादा और रीति को पूरा करने के वास्ते वन जाने को तैयार हो जाते है। इस दौरान उन्हें उनकी मां कौशिल्या समझाने का प्रयास करती हैं। बाद में जानकारी होने पर माता सीता और भ्राता लक्ष्मण भी प्रभु के संग वन जाने के लिए हठ कर बैठते है। इस दौरान प्रभु दोनों लोगों को समझाने का प्रयास किए। लेकिन सफल नहीं हुए, सीता मैया ने कहा कि आप के बिना मेरे इस महल में कोई काम नहीं, तो भ्राता लक्ष्मण ने कहा कि मैं तो प्रभु का सेवक हूं, जहां प्रभु वहां सेवक दोनों भाइयों के प्यार को देख दर्शकों के आंखों से आंसू छलक गए। इतना ही नहीं पिता दशरथ भी प्रभु को बहुत समझाने का प्रयास किए। लेकिन प्रभु ने उनकी एक न सुनी और वन जाने की तैयारी में जुट गए। पहले दिन के मंचन में रामलीला समिति के पदाधिकारी जहां व्यवस्था करने में जुटे रहे। वहीं रामलीला की सुरक्षा के कड़े इंतेजाम किए गए थे। गुरुवार की लीला बाबा बिहारी दास के मंदिर प्रांगण से शुरू होगर दशई पोखरा के बीच संपन्न होगी। इस दौरान प्रभु श्री राम अयोध्या से रथ द्वारा वन के लिए प्रस्थान करेंगे।
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