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भोगना पड़ता है पूर्व जन्म के कर्मों को
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 24 Jun 2015 11:07 PM IST
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नगर के मठिया टोला स्थित शिव मंदिर के प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण के तीसरे दिन अयोध्या से पधारे आचार्य सत्यम जी महाराज ने कहा कि पूर्व जनम में किए गए कर्मों को भोगना पड़ता है। इस दौरान सुबह से ही रुद्राभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा।
आचार्य सत्यम जी महाराज ने कहा कि संत श्राप भी देते हैं तो वह अनुग्रह ही करते हैं। महाराज परीक्षित को श्रृंगी ऋषि ने श्राप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक के डंसने से आपकी मृत्यु होगी। जिस पर अनुग्रह ये हुआ कि संतों का समागम और भागवत कथा सुनने को मिली जो स्वयं शुकदेव जी महाराज आकर कृपा किए। कहा कि अपने पूर्व जन्म के किए हुए कर्म को अवश्य ही भोगना पड़ता है। उसे कोई मिटा नहीं सकता।
महाभारत की कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पितामह भीष्म जिस समय पर सर शैय्या सइया पर पड़े थे तो भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि यह सर शैय्या मुझे किस पाप के कारण प्राप्त हुआ है तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आप समर्थ हो पूर्व जन्म देखो। पितामह देखे तो उनके आंखें नम हो गई। भगवान ने कारण पूछा तो बताते हैं 101 जन्म पहले मैं राजा था एक घायल सर्प को कांटों की झाड़ी में डाल दिया था वो तड़प रहा था जिसकी मौत 28वें दिन हुई। आज मेरा भी 28वां दिन है। आज मेरी भी मृत्यु होगी। इसलिए संत और भगवत कृपा ही करते हैं। इस चरित्र से हमें शिक्षा लेनी चाहिए कि व्यक्ति अपने कर्मों के कारण ही परेशान रहता है। इसलिए कर्म अच्छे ही करना चाहिए। इसी क्रम में आचार्य संतोष शास्त्री ने कहा कि इस पुरुषोत्तम माह में रुद्राभिषेक करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती हैं।
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आचार्य सत्यम जी महाराज ने कहा कि संत श्राप भी देते हैं तो वह अनुग्रह ही करते हैं। महाराज परीक्षित को श्रृंगी ऋषि ने श्राप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक के डंसने से आपकी मृत्यु होगी। जिस पर अनुग्रह ये हुआ कि संतों का समागम और भागवत कथा सुनने को मिली जो स्वयं शुकदेव जी महाराज आकर कृपा किए। कहा कि अपने पूर्व जन्म के किए हुए कर्म को अवश्य ही भोगना पड़ता है। उसे कोई मिटा नहीं सकता।
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महाभारत की कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पितामह भीष्म जिस समय पर सर शैय्या सइया पर पड़े थे तो भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि यह सर शैय्या मुझे किस पाप के कारण प्राप्त हुआ है तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आप समर्थ हो पूर्व जन्म देखो। पितामह देखे तो उनके आंखें नम हो गई। भगवान ने कारण पूछा तो बताते हैं 101 जन्म पहले मैं राजा था एक घायल सर्प को कांटों की झाड़ी में डाल दिया था वो तड़प रहा था जिसकी मौत 28वें दिन हुई। आज मेरा भी 28वां दिन है। आज मेरी भी मृत्यु होगी। इसलिए संत और भगवत कृपा ही करते हैं। इस चरित्र से हमें शिक्षा लेनी चाहिए कि व्यक्ति अपने कर्मों के कारण ही परेशान रहता है। इसलिए कर्म अच्छे ही करना चाहिए। इसी क्रम में आचार्य संतोष शास्त्री ने कहा कि इस पुरुषोत्तम माह में रुद्राभिषेक करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती हैं।
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