{"_id":"5b2019fd4f1c1b6c4d8b6320","slug":"proposals-for-preventing-river-erosion-pending","type":"story","status":"publish","title_hn":"नदियों की कटान से बचाव के प्रस्ताव लंबित ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नदियों की कटान से बचाव के प्रस्ताव लंबित
mau
Updated Wed, 13 Jun 2018 12:37 AM IST
विज्ञापन
नदी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपद के घाघरा और तमसा नदी में होने वाले कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से भेजी गईं 36.22 करोड़ की तीन कार्य योजनाएं शासन स्तर पर लंबित हैं। इन्हें अभी तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। इधर बरसात होने में कुुछ ही दिन बाकी हैं। इसके तहत दोहरीघाट में मुक्तिधाम और सूूरजपुर में मोर्चा पर कटान रोकने की कवायद होनी थी।
दोहरीघाट में घाघरा नदी में नवली, चिउंटी डांड़ ,रामपुर धनौली और कसबे के पश्चिमी छोर पर 1986 से ही कटान हो रही है। नवली, चिउंटी डांड़ और रामपुर धनौली के पास अपरन पिचिंग और लांचिंग हो जाने जाने से कटान रुक गई लेकिन अब पिछले कई सालों से नदी की धारा मुक्तिधाम के बिलकुल करीब आ गई हैै। मुक्तिधाम के पास पिछले दो सालों से भारी कटान हो रही है। मुक्तिधाम पर श्मशानघाट का टीन शेड कटान से नदी में विलीन हो गया है।
अब भी नदी की धाराएं शवदाह स्थल से टकराती हैं। कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की टीम ने अपरन, पिचिंग और लाचिंग का सुझाव दिया था। विभाग ने इस कार्य के लिए 10 .72 करोड़ की योजना बनाकर शासन को भेजा। इसी प्रकार पिछले दो साल से सूरजपुर के पास मोर्चा पर भीषण कटान हो रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही यहां कटान तेज हो जाती है। यहां पर कई एकड़ जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ने पिछली साल कटान के समय यहां पर कई दिनों तक निरीक्षण किया था और उनके गाइड लाइन के अनुसार कटान रोकने के रिए बालू भरी बोरियां, पेड़ और बोल्डर डाले गए। यहां की कटान रोकने के लिए 24 करोड़ की कार्ययोजना बनाई गई।
विज्ञापन
इसी प्रकार तमसा नदी में भदेसरा, हनुमानघाट सरवां के पास कटान होती है। ग्रामीण पिछले कई सालों से कटान रोकने के लिए मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। इसे रोकने के लिए डेढ़ करोड की योजना बनाई गई। लेकिन यह योजना भी अभी तक शासन में अटकी पड़ी हैं।
विज्ञापन
दोहरीघाट में घाघरा नदी में नवली, चिउंटी डांड़ ,रामपुर धनौली और कसबे के पश्चिमी छोर पर 1986 से ही कटान हो रही है। नवली, चिउंटी डांड़ और रामपुर धनौली के पास अपरन पिचिंग और लांचिंग हो जाने जाने से कटान रुक गई लेकिन अब पिछले कई सालों से नदी की धारा मुक्तिधाम के बिलकुल करीब आ गई हैै। मुक्तिधाम के पास पिछले दो सालों से भारी कटान हो रही है। मुक्तिधाम पर श्मशानघाट का टीन शेड कटान से नदी में विलीन हो गया है।
विज्ञापन
अब भी नदी की धाराएं शवदाह स्थल से टकराती हैं। कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की टीम ने अपरन, पिचिंग और लाचिंग का सुझाव दिया था। विभाग ने इस कार्य के लिए 10 .72 करोड़ की योजना बनाकर शासन को भेजा। इसी प्रकार पिछले दो साल से सूरजपुर के पास मोर्चा पर भीषण कटान हो रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही यहां कटान तेज हो जाती है। यहां पर कई एकड़ जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ने पिछली साल कटान के समय यहां पर कई दिनों तक निरीक्षण किया था और उनके गाइड लाइन के अनुसार कटान रोकने के रिए बालू भरी बोरियां, पेड़ और बोल्डर डाले गए। यहां की कटान रोकने के लिए 24 करोड़ की कार्ययोजना बनाई गई।
विज्ञापन
इसी प्रकार तमसा नदी में भदेसरा, हनुमानघाट सरवां के पास कटान होती है। ग्रामीण पिछले कई सालों से कटान रोकने के लिए मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। इसे रोकने के लिए डेढ़ करोड की योजना बनाई गई। लेकिन यह योजना भी अभी तक शासन में अटकी पड़ी हैं।