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आज भी समाज को राह दिखाते हैं प्रेमचंद : श्रीप्रकाश शुक्ल

Tue, 04 Aug 2026 12:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 12:42 AM IST
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Premchand continues to show the way to society even today: Shri Prakash Shukla
नगर के भुजौटी ​स्थित सभागार में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में उप​स्थित लोग। स्
मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ, भुजौटी में सोमवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर ‘क्यों हमें याद आते हैं प्रेमचंद’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
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प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), जनवादी लेखक संघ (जलेस) और जन संस्कृति मंच (जसम) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखे।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जसम के जिलाध्यक्ष मनोज सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में संवेदनशीलता के साथ गहरी दूरदर्शिता भी दिखाई देती है। उनकी कहानियां दया, करुणा, मैत्री और सद्भाव का संदेश देने के साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों, कुप्रथाओं और अंधविश्वास के विरुद्ध संघर्ष का साहस भी प्रदान करती हैं।
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मुख्य अतिथि एवं बीएचयू के हिंदी विभाग के प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि प्रेमचंद जनता की भावनाओं और संवेदनाओं को गहराई से समझने वाले रचनाकार थे। उनकी रचनाओं का मूल उद्देश्य व्यक्ति की चेतना को सामाजिक चेतना में बदलना था। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी यदि प्रेमचंद को पढ़े तो वह अधिक संवेदनशील बनेगी और उसके भीतर कर्तव्यबोध का विकास होगा।
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पीठ के संस्थापक एवं वरिष्ठ आलोचक डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु ने कहा कि जिस महाजनी व्यवस्था और शोषणकारी प्रवृत्ति के खिलाफ प्रेमचंद ने लेखनी चलाई थी, वह आज भी समाज में मौजूद है। यही कारण है कि उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
वरिष्ठ कवि एवं आलोचक शिवकुमार पराग, डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह , आलोचक डॉ. संजय राय, डायट मऊ के प्रवक्ता डॉ. अंशुमान सिंह, युवा आलोचक डॉ. तेजभान ने भी िवचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का संचालन फखरे आलम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बसंत कुमार ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर देवेंद्र मिश्रा, राम कुमार भारती, वीरेंद्र कुमार, डॉ. रामबिलास भारती, डॉ. त्रिभुवन नाथ, डॉ. रामशिरोमणि, अखिलेश, अरविंद मूर्ति, ब्रिकेश, डॉ. अतुल कुमार, डॉ. अनूप सिंह, राजनारायण आदि रहे।
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