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बोर्ड परीक्षा में सरकारी स्कूलों का खराब प्रदर्शन
Mon, 29 Apr 2019 11:52 PM IST
पवन सिंह
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Published by: पवन सिंह
Updated Mon, 29 Apr 2019 11:52 PM IST
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भारी भरकम बजट खर्च करने के बाद भी यूपी बोर्ड हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों में सरकारी स्कूल प्रदेश मेरिट में तो दूर जिलास्तरीय टाप टेन में भी जगह नहीं बना सके। जबकि ऐसे में निजी स्कूल पूरी तरह हावी रहे। इन स्कूली छात्र-छात्राओं ने टॉप टेन मेरिट लिस्ट में बड़ी संख्या में अपना स्थान बनाया है। जबकि 81 सरकारी विद्यालयों में से मात्र एक विद्यालय की छात्रा ने जनपदीय मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है। उधर, प्रधानाचार्य बजट का रोना रो रहे।
जिले में 14 राजकीय, 67 सहायता प्राप्त सहित 428 मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। बोर्ड परीक्षा में 2019 की बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूूल में 47241 और इंटरमीडिएट में 43650 परीक्षार्थी शामिल हुए। शनिवार को घोषित परीक्षा परिणाम में प्रदेश स्तरीय टाप टेन में तीन छात्राएं तथा जनपद स्तरीय टाप टेन में 31 छात्र छात्राओं ने जगह बनाई और जिले का नाम रोशन किया। लेकिन प्रदेशस्तरीय टापटेन तो दूर जनपदीय टापटेन सूची में सरकारी विद्यालय जगह नहीं बना सके। नहीं नहीं दिखे। मात्र नगर स्थित डीएवी इंटर कालेज की हाईस्कूल की एक छात्रा को छठवीं रैंक हासिल हो सकी। शेष निजी स्कूलों के 30 छात्र छात्राएं हावी रहे।
सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में तमाम सुविधाओं और संसाधनों का दावा करे लेकिन, शिक्षकों की कमी कहीं न कहीं सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों को प्रभावित कर रहा है। सहायता प्राप्त विद्यालयों में 398 शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं।विषयवार शिक्षकों से लेकर अन्य स्टाफ की कमी है। इसका असर यूपी बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर भी नजर आ रहा है।
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सरकारी तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों के अधिकांश प्रधानाचार्य दबी जुबान से निजी स्कूलों के छात्र नकल के दम पर मेरिट में जगह बनाए हैं। सहयोग करने में निजी स्कूलों का प्रबंध तंत्र भी सहयोग करता है। जबकि सरकारी विद्यालयों में कालेज प्रशासन रुचि ही नहीं लेता है।
जांच कराए जाया तो सच सामने आ सकता है। इस संबंध में शहीद इंटर कालेज के प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह का कहना है कि कालेज प्रशासन की तरफ से बेहतर रिजल्ट के लिए प्रयास किया जाता है। मुस्लिम इंटर कालेज के प्रधानाचार्य इश्तियाक अहमद का कहना है कि विद्यालय में काफी संख्या में छात्र छात्राएं 60 प्रतिशत से अधिक अंक से उत्तीर्ण हुए हैं। निजी विद्यालय हर प्रकार से छात्रों को परीक्षा में सभी तरह की मदद करते हैं। इससे मेरिट लिस्ट में हावी रहते हैं।
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जिले में 14 राजकीय, 67 सहायता प्राप्त सहित 428 मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। बोर्ड परीक्षा में 2019 की बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूूल में 47241 और इंटरमीडिएट में 43650 परीक्षार्थी शामिल हुए। शनिवार को घोषित परीक्षा परिणाम में प्रदेश स्तरीय टाप टेन में तीन छात्राएं तथा जनपद स्तरीय टाप टेन में 31 छात्र छात्राओं ने जगह बनाई और जिले का नाम रोशन किया। लेकिन प्रदेशस्तरीय टापटेन तो दूर जनपदीय टापटेन सूची में सरकारी विद्यालय जगह नहीं बना सके। नहीं नहीं दिखे। मात्र नगर स्थित डीएवी इंटर कालेज की हाईस्कूल की एक छात्रा को छठवीं रैंक हासिल हो सकी। शेष निजी स्कूलों के 30 छात्र छात्राएं हावी रहे।
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सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में तमाम सुविधाओं और संसाधनों का दावा करे लेकिन, शिक्षकों की कमी कहीं न कहीं सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों को प्रभावित कर रहा है। सहायता प्राप्त विद्यालयों में 398 शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं।विषयवार शिक्षकों से लेकर अन्य स्टाफ की कमी है। इसका असर यूपी बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर भी नजर आ रहा है।
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सरकारी तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों के अधिकांश प्रधानाचार्य दबी जुबान से निजी स्कूलों के छात्र नकल के दम पर मेरिट में जगह बनाए हैं। सहयोग करने में निजी स्कूलों का प्रबंध तंत्र भी सहयोग करता है। जबकि सरकारी विद्यालयों में कालेज प्रशासन रुचि ही नहीं लेता है।
जांच कराए जाया तो सच सामने आ सकता है। इस संबंध में शहीद इंटर कालेज के प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह का कहना है कि कालेज प्रशासन की तरफ से बेहतर रिजल्ट के लिए प्रयास किया जाता है। मुस्लिम इंटर कालेज के प्रधानाचार्य इश्तियाक अहमद का कहना है कि विद्यालय में काफी संख्या में छात्र छात्राएं 60 प्रतिशत से अधिक अंक से उत्तीर्ण हुए हैं। निजी विद्यालय हर प्रकार से छात्रों को परीक्षा में सभी तरह की मदद करते हैं। इससे मेरिट लिस्ट में हावी रहते हैं।