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Mau News: शुगर के बढ़ते असर से कम उम्र में ही मोतियाबिंद के शिकार हो रहे लोग
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जिला अस्पताल के ओपीडी में नेत्र विभाग में मरीज के आंखों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी।संवाद
जिले में कम उम्र में मोतियाबिंद के बढ़ते मामलों के पीछे मधुमेह मुख्य कारण बनकर उभर रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में इसके आंकड़े इसे स्पष्ट कर रहे हैं।
जिला अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एमके पांडेय के अनुसार 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में मोतियाबिंद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले यह संख्या बेहद कम थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसमें बढ़ोतरी हुई है। एनसीडी क्लीनिक और जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 70 मरीज रोज आ रहे हैं।
जिले के एक वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एनके सिंह ने बताया कि उनकी ओपीडी में आने वाले मरीजों में 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में दृष्टि संबंधी परेशानियां अधिक देखने को मिल रही हैं और समय पर जांच व उपचार की आवश्यकता है।
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वहीं जिला अस्पताल के डॉ. एमके पांडेय ने बताया कि अब मोतियाबिंद केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। इसके पीछे मधुमेह (डायबिटीज) एक बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है।
उन्होंने बताया कि बीते माह में ऐसे चार से पांच मरीज उनके पास आए, जिन्हें मोतियाबिंद की शिकायत थी। जांच में पाया गया कि लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहने से आंख के प्राकृतिक लेंस पर असर पड़ता है, जिससे लेंस जल्दी धुंधला होने लगता है और कम उम्र में ही मोतियाबिंद विकसित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि धुंधला दिखाई देना, तेज रोशनी से परेशानी, मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पढ़ने में कठिनाई, चश्मे का नंबर बार-बार बदलना और रात में देखने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। लोग इसको लेकर अब भी लापरवाही कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एमके पांडेय के अनुसार 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में मोतियाबिंद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले यह संख्या बेहद कम थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसमें बढ़ोतरी हुई है। एनसीडी क्लीनिक और जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 70 मरीज रोज आ रहे हैं।
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जिले के एक वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एनके सिंह ने बताया कि उनकी ओपीडी में आने वाले मरीजों में 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में दृष्टि संबंधी परेशानियां अधिक देखने को मिल रही हैं और समय पर जांच व उपचार की आवश्यकता है।
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वहीं जिला अस्पताल के डॉ. एमके पांडेय ने बताया कि अब मोतियाबिंद केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। इसके पीछे मधुमेह (डायबिटीज) एक बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है।
उन्होंने बताया कि बीते माह में ऐसे चार से पांच मरीज उनके पास आए, जिन्हें मोतियाबिंद की शिकायत थी। जांच में पाया गया कि लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहने से आंख के प्राकृतिक लेंस पर असर पड़ता है, जिससे लेंस जल्दी धुंधला होने लगता है और कम उम्र में ही मोतियाबिंद विकसित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि धुंधला दिखाई देना, तेज रोशनी से परेशानी, मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पढ़ने में कठिनाई, चश्मे का नंबर बार-बार बदलना और रात में देखने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। लोग इसको लेकर अब भी लापरवाही कर रहे हैं।