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बिंदटोलिया बस्ती में बचे घर वालों को घर छोड़ने का आदेश

Fri, 29 Jul 2022 10:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jul 2022 10:06 PM IST
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Order to leave the house to the survivors of Bindtoliya settlement
मधुबन। सरयू का जलस्तर घटने से नदी तेजी से कटान कर रही है। इससे बिंदटोलिया गांव के नई बस्ती पुरवा का वजूद इन दिनों खतरे में है। संभावित खतरे के मद्देनजर तहसील प्रशासन ने लोगों को गांव खाली करने के लिए कहा है। ऐसे में लोग खुद अपने आशियाने को तोड़ने पर विवश हैं। पिछले दिनों तेजी से बढ़ रहे सरयू नदी के जलस्तर में बीते दो दिनों से घटाव का सिलसिला शुरू हो गया है। तहसील क्षेत्र के हाहानाला रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार की सुबह 8 बजे 64.10 मीटर रिकॉर्ड किया गया जबकि बुधवार की सुबह यह 64.50 मीटर था। 24 घंटे में सरयू नदी का जलस्तर 40 सेंटीमीटर कम हो गया। जलस्तर घटने के साथ कटान तेज हो गई है। ऐसे में लोग तेजी के साथ पलायन कर रहे हैं। बुधवार को नई बस्ती पुरवा में लेखपाल कमलेश यादव ने माइक से घोषणा कराई कि ग्रामीण जल्द से जल्द अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं ताकि किसी प्रकार के जानी नुकसान से बचा जा सके। विद्यालय बने अस्थाई आश्रय स्थल तहसील प्रशासन द्वारा वर्तमान में जनता शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज दुबारी, प्राथमिक विद्यालय खैरा, प्राथमिक विद्यालय दुबारी,जूनियर हाई स्कूल धर्मपुर टांड़ी, प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीपुर को कटान पीड़ितों के लिए अस्थाई पनाह स्थल बनाया गया है। वर्तमान में यहां बिंदटोलिया नई बस्ती के सुखिया देवी, लल्लन बिंद राममिलन बिंद, रामदेववाल, राम सिंगार, नीबू लाल, बेचू, नन्हकू, शिवचंद, लल्लन, शंभू आदि के परिवारों ने शरण ली है। जगह की कमी से एक ही कमरे में कई परिवारों को रहना पड़ रहा है। वहीं इन विद्यालयों में पठन-पाठन भी हो रहा। ऐसे में विद्यालय प्रशासन के लिए कटान पीड़ितों एवं छात्रों के बीच तालमेल बनाए रखना चुनौती है। लोगों को सुरक्षित रखना प्राथमिकता : एसडीएम एसडीएम मधुबन मनोज कुमार तिवारी का कहना था कि लोगों को सुरक्षित रखना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। नई बस्ती के लोगों को गांव को खाली कर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कह दिया गया है। तहसील क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों को इन कटान पीड़ितों के लिए अस्थाई आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनके खाने-पीने की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा की जा रही है। वहीं संबंधित गांव के लेखपाल एवं ग्राम प्रधान को भी जिम्मेदारी दी गयी है कि वह इन कटान पीड़ितों की जरूरतों का ख्याल रखें। नदी के उतार-चढ़ाव पर नजर रखी जा रही है। हर प्रकार की चुनौती से निपटने के तहसील प्रशासन तैयार है।
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