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हत्या के मामले मे एक को आजीवन कारावास
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो आसिफ इकबाल रिजवी ने हत्या के मामले में नामजद दो आरोपियों में से एक को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ ही दस हजार रुपया अर्थदंड लगाया है। जुर्माना न देने पर दो माह का अतिरिक्त जेल काटना होगा। आरोपी श्रवण के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड सुनवाई के लिए भेजी गई।
अभियोजन के अनुसार चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के अल्देमऊ गांव निवासी दहारी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी ने बताया कि 31 जुलाई 2017 को सुबह 6 बजे राजेंद्र सिंह के ट्यूबवेल से खेत में पानी लगा रहा था। उसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर उसके गांव के ही नंदलाल और श्रवण ने फावड़ा से उसके सर पर प्रहार कर दिया। वादी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज किया। इलाज के दौरान 23 अगस्त 2017 को वादी केस दहारी की मौत हो गई। इस पर दहारी की पत्नी दुर्गावती देवी ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर दहारी की मौत की सूचना दी। जिस पर मामले में धारा 302 भादवि की बढ़ोतरी कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी अनिल कुमार पांडेय ने कुल 13 गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजी ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी नंदलाल को हत्या और गाली देने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद नंदलाल को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही दस हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही गाली देने के मामले में एक वर्ष का सश्रम कारावास की सजा का निर्णय सुनाया। आरोपी श्रवण कुमार के नाबालिक होने के चलते पूर्व में ही उसकी पत्रावली अलग कर किशोर न्यायालय में भेज दी गई थी।
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अभियोजन के अनुसार चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के अल्देमऊ गांव निवासी दहारी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी ने बताया कि 31 जुलाई 2017 को सुबह 6 बजे राजेंद्र सिंह के ट्यूबवेल से खेत में पानी लगा रहा था। उसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर उसके गांव के ही नंदलाल और श्रवण ने फावड़ा से उसके सर पर प्रहार कर दिया। वादी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज किया। इलाज के दौरान 23 अगस्त 2017 को वादी केस दहारी की मौत हो गई। इस पर दहारी की पत्नी दुर्गावती देवी ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर दहारी की मौत की सूचना दी। जिस पर मामले में धारा 302 भादवि की बढ़ोतरी कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
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कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी अनिल कुमार पांडेय ने कुल 13 गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजी ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी नंदलाल को हत्या और गाली देने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद नंदलाल को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही दस हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही गाली देने के मामले में एक वर्ष का सश्रम कारावास की सजा का निर्णय सुनाया। आरोपी श्रवण कुमार के नाबालिक होने के चलते पूर्व में ही उसकी पत्रावली अलग कर किशोर न्यायालय में भेज दी गई थी।
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