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Mau News: 17 अगस्त 1942 को खून से लाल हो गई थी इंदारा की धरती
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इंदारा के महुआर गांव में बना शहीदों का स्मारक। संवाद
- फोटो : samvad
इंदारा। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई इंदारा की सेनानियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। 17 अगस्त 1942 को अंग्रेज सरकार की कार्रवाई में इंदारा की धरती खून से लाल हो गई थी। आज देश स्वतंत्रता का 79वां वर्ष मना रहा है। अंग्रेजों द्वारा सेनानियों पर किए गए अत्याचार की यादें ताजा हो गई हैं। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लोग अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। 17 अगस्त 1942 को नाग पंचमी के दिन इंदारा मेला मैदान में क्रांति की रणनीति बनाते समय वीर सपूतों पर अंग्रेजों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिससे इंदारा की धरती खून से लाल हो गई थी। इसमें तीन लोग शहीद हो गए थे। बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए थे। 17 अगस्त 1942 में नाग पंचमी का त्योहार था। लोग पूजा की तैयारी कर रहे थे। महिलाएं घरों में पकवान बना रही थीं। उसी दिन महुंआर निवासी हरिहर सिंह पुत्र सबलायक सिंह अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ इंदारा मेला मैदान मे रणनीति बना रहे थे। तभी तत्कालीन जिलाधिकारी आजमगढ़ मिस्टर नेब्लेट मधुबन गोली कांड से रूष्ट होकर मऊ में बैठा था, तभी पता चला कि क्रांतिकारियों की एक टोली इंदारा रेलवे स्टेशन फूंक रही है। तब उसने पुलिस कप्तान कोमन सिंह के साथ इंदारा पहुंचकर अपने सैन्य बल के साथ स्टेशन पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। अंग्रेजी सैनिकों की तीन टुकड़ी गोलियाें की बौछार करते हुए आगे की ओर बढ़ रही थी। शहीद हरिहर सिंह साथियों के साथ आगे चल रहे थे। सब लोग इंदारा स्टेशन से उत्तर की दिशा में दौड़ रहे थे। इंदारा मिशन के मुख्य द्वार के पश्चिम की तरफ 50- 60 मीटर की दूरी पर इंदारा रामलीला के राम चबूतरा के पीछे 20 मीटर की दूरी पर अंग्रेज सरकारी अधिकारी ने गोली की बौछार शुरू कर दी। गोली हरिहर सिंह के सीने को चीरती हुई शरीर को पार कर गई। वे भारत माता की जय करके शहीद हो गए। उनकी स्मृति में महुंआर गांव में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शहीद स्तंभ का निर्माण कराया गया है। शहीद हरिहर सिंह के बाद दूसरा अज्ञात 50 वर्षीय व्यक्ति इंदारा क्रांति में शहीद हुआ।
मां की गोद में दो साल का मुन्ना राजभर भी शहीद हुआ
तीसरा शहीद दो साल का मुन्ना राजभर था। इंदारा क्रांति में शहीद हुआ ग्राम मुहम्मदपुर का बंशी राजभर का दो वर्षीय बालक मुन्ना मां की गोद में था। मां बालक को लेकर कहीं जा रही थी। तब तक महिला पर गोरों ने फायरिंग कर दी। गोली महिला को न लगकर गोद में बच्चे को लगी। गोली लगते ही बच्चा मां के गोद में शहीद हो गया। इंदारा क्रांति में 12 व्यक्तियों पर मुकदमा चला। उस समय कोपागंज थाना के थानाध्यक्ष श्यामसुंदर राय थे।
विश्वनाथ पांडेय को हुई 17 साल की सजा
इंदारा गांव के क्रांतिकारी विश्वनाथ पांडेय को अदरी गांव से पुलिस ने गिरफ्तार किया। भोला सिंह, साधु सिंह, अक्षयबर सिंह, दूधनाथ सिंह सहित पांच लोगों और महुआर के तीन व्यक्ति सकल दीप सिंह, जगत नारायण सिंह, शिवपूजन पांडेय के खिलाफ डीआईआर (भारत रक्षा कानून)के तहत एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया। इंदारा गांव निवासी विश्वनाथ पांडेय को 17 वर्ष की कैद और 15 कोड़ों की सजा सुनाई गई। वहीं अंग्रेजों द्वारा की गई क्रूरता को देख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्वनाथ पांडेय, दूधनाथ सिंह और भोला सिंह ने ब्रिटिश सरकार से माफी मांगने से इंकार कर दिया। 15 कोड़ों की सजा भुगती। ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीरता पर हमें गर्व है।
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मां की गोद में दो साल का मुन्ना राजभर भी शहीद हुआ
तीसरा शहीद दो साल का मुन्ना राजभर था। इंदारा क्रांति में शहीद हुआ ग्राम मुहम्मदपुर का बंशी राजभर का दो वर्षीय बालक मुन्ना मां की गोद में था। मां बालक को लेकर कहीं जा रही थी। तब तक महिला पर गोरों ने फायरिंग कर दी। गोली महिला को न लगकर गोद में बच्चे को लगी। गोली लगते ही बच्चा मां के गोद में शहीद हो गया। इंदारा क्रांति में 12 व्यक्तियों पर मुकदमा चला। उस समय कोपागंज थाना के थानाध्यक्ष श्यामसुंदर राय थे।
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विश्वनाथ पांडेय को हुई 17 साल की सजा
इंदारा गांव के क्रांतिकारी विश्वनाथ पांडेय को अदरी गांव से पुलिस ने गिरफ्तार किया। भोला सिंह, साधु सिंह, अक्षयबर सिंह, दूधनाथ सिंह सहित पांच लोगों और महुआर के तीन व्यक्ति सकल दीप सिंह, जगत नारायण सिंह, शिवपूजन पांडेय के खिलाफ डीआईआर (भारत रक्षा कानून)के तहत एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया। इंदारा गांव निवासी विश्वनाथ पांडेय को 17 वर्ष की कैद और 15 कोड़ों की सजा सुनाई गई। वहीं अंग्रेजों द्वारा की गई क्रूरता को देख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्वनाथ पांडेय, दूधनाथ सिंह और भोला सिंह ने ब्रिटिश सरकार से माफी मांगने से इंकार कर दिया। 15 कोड़ों की सजा भुगती। ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीरता पर हमें गर्व है।
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