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ईमान से बड़ा सरमाया कुछ भी नहीं
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Tue, 25 Oct 2016 11:23 PM IST
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नगर क्षेत्र के जहांगीराबाद में आयोजित इजतेमा में दुआखानी करते मुस्लिमबंधु।
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नगर क्षेत्र से लगे जहांगीराबाद में तबलीगी जमाअत की तरफ से आयोजित तीन दिवसीय इज्तेमा का समापन मंगलवार को हुआ। अंतिम दिन इस जमाअत में सवा लाख से अधिक फरजंदाने तौहीद ने शिरकत की। साथ ही ओलेमाइकराम के खिताब को सुना।
मंगलवार को फर्ज की नमाज के बाद मौलाना महमूद ने उपस्थित समूह को खिताब किया। कहा इस्लाम धर्म स्वीकार करने वालों के लिए कलमा पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कलमा का अर्थ बताया। बोले जहां दीन की मजलिस (धार्मिक सभा) आयोजित होती है, उस स्थान को फरिश्ते अपने परों से घेर लेते हैं।
मौलाना शौकत कासमी ने कहा कि अल्लाह ने हमें इस दुनिया की चकाचौंध से बाहर निकाल कर अपने रास्ते पर लगा लिया। जो इस पर चलता है, उस पर अल्लाह फर्क करते हैं। बाद में अल्लाह उन बंदों पर अपनी रहमत नाजिल करता है। ईमान की दौलत से बड़ा सरमाया कुछ भी नहीं। जब तक ईमान की दौलत बाकी है, कायनात की मीरास बाकी है। कहा जिस दिन ईमान खत्म हुआ उसी दिन दुनिया खत्म हो जाएगी। बोले मुहम्मद साहब के हर निर्देशों को अपने आचरण में उतारना जरूरी है। जो जितना नेक होता है, उतना ही अल्लाह के करीब होता है।
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मौलाना ने ओलेमा को भी खिताब किया, बोले उलेमा पर इंसानों को सही मार्ग दिखाने और अल्लाह की मर्जी के अनुसार जीवन व्यतीत करने कभी प्रेरणा देना है। कार्यक्रम के अंत में मौलाना ने दुआ कराई। इसमें सभी को गुनाहों की माफी के साथ देश और कायनात की तरक्की की दुआ की गई। दुआख्वानी के बाद इज्तेेमा के समापन का ऐलान किया गया।
इज्तेमा में 50 से अधिक बड़े ओलेमाइकराम शामिल हुए, इसमें मुफ्ती अनवर अली, मौलाना मसीहुर्रहमान इमाम शाही कटरा, मुफ्ती जावेद, भाई सालिक, मुफ्ती महमूद, एजाज भाई लखनवी, आसिफ भाई, मियांजी इजाजुद्दीन, शकील मिस्टर, हाजी परवेज क्वालिटी, शहजाद भाई, मुफ्ती जावेद, मुफ्ती महमूद, मोलवी शरीफ, एजाज लखनवी, भाई यूनुस कानपुरी, हाफिज जमशेद, शरीफ वकील, मौलाना नेसार अहमद जेमिनी, मौलाना शब्बीर अहमद सहित अन्य थे।
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मंगलवार को फर्ज की नमाज के बाद मौलाना महमूद ने उपस्थित समूह को खिताब किया। कहा इस्लाम धर्म स्वीकार करने वालों के लिए कलमा पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कलमा का अर्थ बताया। बोले जहां दीन की मजलिस (धार्मिक सभा) आयोजित होती है, उस स्थान को फरिश्ते अपने परों से घेर लेते हैं।
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मौलाना शौकत कासमी ने कहा कि अल्लाह ने हमें इस दुनिया की चकाचौंध से बाहर निकाल कर अपने रास्ते पर लगा लिया। जो इस पर चलता है, उस पर अल्लाह फर्क करते हैं। बाद में अल्लाह उन बंदों पर अपनी रहमत नाजिल करता है। ईमान की दौलत से बड़ा सरमाया कुछ भी नहीं। जब तक ईमान की दौलत बाकी है, कायनात की मीरास बाकी है। कहा जिस दिन ईमान खत्म हुआ उसी दिन दुनिया खत्म हो जाएगी। बोले मुहम्मद साहब के हर निर्देशों को अपने आचरण में उतारना जरूरी है। जो जितना नेक होता है, उतना ही अल्लाह के करीब होता है।
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मौलाना ने ओलेमा को भी खिताब किया, बोले उलेमा पर इंसानों को सही मार्ग दिखाने और अल्लाह की मर्जी के अनुसार जीवन व्यतीत करने कभी प्रेरणा देना है। कार्यक्रम के अंत में मौलाना ने दुआ कराई। इसमें सभी को गुनाहों की माफी के साथ देश और कायनात की तरक्की की दुआ की गई। दुआख्वानी के बाद इज्तेेमा के समापन का ऐलान किया गया।
इज्तेमा में 50 से अधिक बड़े ओलेमाइकराम शामिल हुए, इसमें मुफ्ती अनवर अली, मौलाना मसीहुर्रहमान इमाम शाही कटरा, मुफ्ती जावेद, भाई सालिक, मुफ्ती महमूद, एजाज भाई लखनवी, आसिफ भाई, मियांजी इजाजुद्दीन, शकील मिस्टर, हाजी परवेज क्वालिटी, शहजाद भाई, मुफ्ती जावेद, मुफ्ती महमूद, मोलवी शरीफ, एजाज लखनवी, भाई यूनुस कानपुरी, हाफिज जमशेद, शरीफ वकील, मौलाना नेसार अहमद जेमिनी, मौलाना शब्बीर अहमद सहित अन्य थे।