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गैर मान्यता वाले स्कूलों पर नहीं हो रही कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Thu, 13 Apr 2017 11:08 PM IST
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जिले के विभिन्न इलाकों में सैकड़ों विद्यालय बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन विद्यालयों में मनमानी फीस एवं तरह-तरह के शुल्क लिए जा रहे हैं। आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि इन विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों का नाम सरकारी विद्यालयों मेें चलता है। शासनादेश के बावजूद गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
जिले में बेसिक शिक्षा से संबद्ध 1200 मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। शासन की ओर से गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई का फरमान जारी किया गया है। ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे विद्यालयों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन कागज पर ही कार्रवाई कर इतिश्री कर दी जा रही है। खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट को आधार बनाया जाए तो गत वर्ष 2016-17 मेें दोहरीघाट ब्लाक में 31, फतहपुर मंडाव ब्लाक में 35 सहित विभिन्न ब्लाकों में लगभग 200 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को चिह्नित किया गया था इन विद्यालयों को नोटिस जारी कर ही इतिश्री कर ली गई। नया शिक्षा सत्र शुरू भी हो गया, कार्रवाई किसी स्कूल के खिलाफ नहीं की जा सकी। कार्रवाई का अधिकार बीएसए को है।
मजेदार बात यह है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से मात्र एक गैर मान्यता विद्यालय को नोटिस ही जारी की गई है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूल संचालक विद्यालय संचालित करने का नया रास्ता तलाश लेते हैं। कई स्कूल मानक पर कहीं से खरा नहीं उतर रहे हैं, लेकिन मनमानी फीस वसूल रहे हैं। कई स्कूलों की मान्यता आठवीं तक है, लेकिन पढ़ाई इंटरमीडिएट तक होती है। छात्र-छात्राओं का नाम किसी अन्य माध्यमिक स्कूलों में चलता है। सूत्रों की मानें तो जुगाड़ से बोर्ड परीक्षा को पास करने वाले छात्र इन विद्यालयों में दाखिला लेने आते हैं। प्राइमरी स्तर के कई विद्यालय संचालित हैं, जो मान्यता प्राप्त नहीं हैं लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का नाम सरकारी स्कूलों या अन्य विद्यालयों में दर्ज रहता है। मधुबन तहसील क्षेत्र के दुबारी, बेलौली, मधुबन कस्बा, दरगाह सहित विभिन्न इलाकों में कई स्कूल चलते हैं, लेकिन मानक के अनुरूप भवन नहीं हैं। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि कोपागंज में चल रहे एक गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय के संचालक को नोटिस जारी की गई है। खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
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जिले में बेसिक शिक्षा से संबद्ध 1200 मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। शासन की ओर से गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई का फरमान जारी किया गया है। ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे विद्यालयों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन कागज पर ही कार्रवाई कर इतिश्री कर दी जा रही है। खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट को आधार बनाया जाए तो गत वर्ष 2016-17 मेें दोहरीघाट ब्लाक में 31, फतहपुर मंडाव ब्लाक में 35 सहित विभिन्न ब्लाकों में लगभग 200 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को चिह्नित किया गया था इन विद्यालयों को नोटिस जारी कर ही इतिश्री कर ली गई। नया शिक्षा सत्र शुरू भी हो गया, कार्रवाई किसी स्कूल के खिलाफ नहीं की जा सकी। कार्रवाई का अधिकार बीएसए को है।
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मजेदार बात यह है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से मात्र एक गैर मान्यता विद्यालय को नोटिस ही जारी की गई है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूल संचालक विद्यालय संचालित करने का नया रास्ता तलाश लेते हैं। कई स्कूल मानक पर कहीं से खरा नहीं उतर रहे हैं, लेकिन मनमानी फीस वसूल रहे हैं। कई स्कूलों की मान्यता आठवीं तक है, लेकिन पढ़ाई इंटरमीडिएट तक होती है। छात्र-छात्राओं का नाम किसी अन्य माध्यमिक स्कूलों में चलता है। सूत्रों की मानें तो जुगाड़ से बोर्ड परीक्षा को पास करने वाले छात्र इन विद्यालयों में दाखिला लेने आते हैं। प्राइमरी स्तर के कई विद्यालय संचालित हैं, जो मान्यता प्राप्त नहीं हैं लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का नाम सरकारी स्कूलों या अन्य विद्यालयों में दर्ज रहता है। मधुबन तहसील क्षेत्र के दुबारी, बेलौली, मधुबन कस्बा, दरगाह सहित विभिन्न इलाकों में कई स्कूल चलते हैं, लेकिन मानक के अनुरूप भवन नहीं हैं। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि कोपागंज में चल रहे एक गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय के संचालक को नोटिस जारी की गई है। खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
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