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माइनरों में टेल तक पानी नहीं
mau
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:38 AM IST
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नन्दौर लघुवाई नहर की तलहटी में बिना सफाई के छोड़ा गया पानी।
- फोटो : mau
जिले के अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है। कारण, कई माइनरों की साफ सफाई तक नहीं कराई जा सकी है। यदि किसी माइनर में पानी आ भी रहा है तो तली में ही दिख रहा। कुलाबा से नीचे रहने के चलते किसान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। आला अधिकारी नए शासनादेश के तहत अब नहर तथा माइनरों की सफाई रबी सीजन में ही होना बताकर मामले से पल्ला झाड़ रहे। जिले में 2477 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई के लिए जिले में करोड़ों की लागत से बनी तीन नहरें है। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं। अगेती धान की नर्सरी रोपाई योग्य हो गई है। लेकिन अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। यदि किसी माइनर में पानी जा भी रहा है तो तलहटी में ही दिख रहा है। कुलाबा न पकड़ने के चलते किसान खेत में लेव ही नहीं लगा पा रहे हैं। कुछ दबंग किसान माइनरों को बांध दे रहे हैं या पंपिंगसेट लगा रहे हैं।
बावजूद अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने की क्षमता है। लेकिन रोपाई के समय अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। मधुबन तहसील क्षेत्र तथा कोपागंज क्षेत्र के कई माइनरों की सफाई तक नहीं कराई जा सकी है। माइनरों के कुलाबे सिल्ट पटे पड़े हैं। शारदा सहायक खंड 32 तथा दोहरीघाट पंप कैैनाल से संबद्ध माइनरों की साफ सफाई न होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। शारदा सहायक खंड 32 तथा दोहरीघाट पंप कैनाल से संबद्ध छिछोर तथा कुशाडीह माइनर से दर्जनों गांवों की सैकड़ों हेक्टेयर सिंचाई होती है। लेकिन अभी तक माइनरों की साफ सफाई नहीं कराई जा सकी है। इसके चलते नहर तथा माइनर में खर पतवार का जंगल लग गया है। डीजल पंपिंगसेट से 150 रुपये प्रति घंटे की दर से सिंचाई करने से कृषि लागत बढ़ रही है।
किसान नेता देवप्रकाश राय, किसान संजय सिंह, रविप्रकाश, जनार्दन मौर्य, जयप्रकाश राय, सुखलाल मौर्य का कहना है कि सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते किसानों को नहर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जरूरत के समय माइनरों के टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो रही।
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बावजूद अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने की क्षमता है। लेकिन रोपाई के समय अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। मधुबन तहसील क्षेत्र तथा कोपागंज क्षेत्र के कई माइनरों की सफाई तक नहीं कराई जा सकी है। माइनरों के कुलाबे सिल्ट पटे पड़े हैं। शारदा सहायक खंड 32 तथा दोहरीघाट पंप कैैनाल से संबद्ध माइनरों की साफ सफाई न होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। शारदा सहायक खंड 32 तथा दोहरीघाट पंप कैनाल से संबद्ध छिछोर तथा कुशाडीह माइनर से दर्जनों गांवों की सैकड़ों हेक्टेयर सिंचाई होती है। लेकिन अभी तक माइनरों की साफ सफाई नहीं कराई जा सकी है। इसके चलते नहर तथा माइनर में खर पतवार का जंगल लग गया है। डीजल पंपिंगसेट से 150 रुपये प्रति घंटे की दर से सिंचाई करने से कृषि लागत बढ़ रही है।
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किसान नेता देवप्रकाश राय, किसान संजय सिंह, रविप्रकाश, जनार्दन मौर्य, जयप्रकाश राय, सुखलाल मौर्य का कहना है कि सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते किसानों को नहर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जरूरत के समय माइनरों के टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो रही।
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