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खरीफ की खेती की नई तकनीक बताई
Sat, 06 Apr 2019 11:54 PM IST
पवन सिंह
mau
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Published by: पवन सिंह
Updated Sat, 06 Apr 2019 11:54 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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नेफोर्ड संस्था और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान नई दिल्ली के तत्वावधान में शनिवार को अनुसूचित जाति उप परियोजना के अंतर्गत डुमरांव मोड़ पर किसान गोष्ठी और प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। किसान गोष्ठी में पूसा संस्थान द्वारा नेफोर्ड संस्था और क्षेत्र के 30 उत्कृष्ट किसानों को राम कुंवर सिंह कृषक मित्र सम्मान से सम्मानित किया गया। संस्था द्वारा किसानों को पूसा की धान की डीडीआर 50 प्रजाति बीज का निशुल्क वितरण किया गया।
कार्यक्रम में पूसा संस्थान नई दिल्ली और कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों की खेती के बारे में नई तकनीक की जानकारी दी। पूसा से आए कृषि वैज्ञानिक डॉ. वैभव सिंह ने फसल सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। पूसा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय सिंह ने धान की नई प्रजातियों के बारे में बताया। डॉ. राजीव कुमार सिंह ने समन्वित कृषि पद्धति पर प्रकाश डाला। डॉ. अवनि कुमार ने सब्जी की संरक्षित खेती पर बल दिया।
केवीके के वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने पशुपालन और दुग्धोत्पादन पर बोलते हुए पशुओं के खानपान और बांझपन पर विस्तार से जानकारी दी। पूसा के वैज्ञानिक डॉ. एनकेके सिंह ने डीडीआर 50 धान के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रजापति सूखा और बाढ़ दोनों लाभदायक है। नेफोर्ड के निदेशक डॉ. राम कठिन सिंह ने बीज के बारे में विस्तार से जानकारी दी। नेफोर्ड के प्रभारी संतोष मिश्र ने बताया कि इस माह के बाद धान और अन्य फसलों के बीच नेफोर्ड कार्यालय से मिलना शुरू हो जाएगा।
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कार्यक्रम में पूसा संस्थान नई दिल्ली और कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों की खेती के बारे में नई तकनीक की जानकारी दी। पूसा से आए कृषि वैज्ञानिक डॉ. वैभव सिंह ने फसल सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। पूसा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय सिंह ने धान की नई प्रजातियों के बारे में बताया। डॉ. राजीव कुमार सिंह ने समन्वित कृषि पद्धति पर प्रकाश डाला। डॉ. अवनि कुमार ने सब्जी की संरक्षित खेती पर बल दिया।
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केवीके के वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने पशुपालन और दुग्धोत्पादन पर बोलते हुए पशुओं के खानपान और बांझपन पर विस्तार से जानकारी दी। पूसा के वैज्ञानिक डॉ. एनकेके सिंह ने डीडीआर 50 धान के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रजापति सूखा और बाढ़ दोनों लाभदायक है। नेफोर्ड के निदेशक डॉ. राम कठिन सिंह ने बीज के बारे में विस्तार से जानकारी दी। नेफोर्ड के प्रभारी संतोष मिश्र ने बताया कि इस माह के बाद धान और अन्य फसलों के बीच नेफोर्ड कार्यालय से मिलना शुरू हो जाएगा।
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