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सुरक्षित सीट पर घट रही प्रत्याशियों की संख्या
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ
Updated Sun, 19 Feb 2017 11:29 PM IST
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नोटबंदी का असर कहा जाए या फिर मंहगाई की मार, मौजूदा विधान सभा चुनाव में विधान सभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संख्या 2012 का चुनाव लड़ने वालों की आधी से भी कम रह गई है। 2012 के चुनाव मे जहां इस क्षेत्र से राष्ट्रीय दलों समेत निर्दल प्रत्याशियों की संख्या 17 थी तो इस चुनाव में मात्र 7 उम्मीदवार ही मैदान मे एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। विगत आठ चुनावों के दौरान प्रत्याशियों की संख्या का आंकड़ा देखा जाए तो साल 1991 के विधान सभा चुनाव में सबसे अधिक 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जबकि सबसे कम इस बार के चुनाव में हैं।
विधान सभा चुनाव के लिए नामांकन और चुनाव चिह्न वितरण का कार्य समाप्त हो चुका है। जनपद की चार विधान सभा में से एक मात्र सुरक्षित मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संख्या मौजूदा चुनाव में सबसे कम 7 है, जबकि सबसे अधिक प्रत्याशी मधुबन विधान सभा में एक दूसरे के खिलाफ मुकाबिल है़।
इसके पूर्व 2012 के विधान सभा चुनाव में कुल 17 प्रत्याशी, 2007 मे चौदह, 2002 के चुनाव में नौ, 1996 में भी नौ 1993 के विधान सभा चुनाव में 15 और 1991 के विधान सभा चुनाव में सबसे अधिक 18 प्रत्याशियों ने जोर आजमाइश की थी। इसके अलावा पहले के दो और चुनावों में भी 1989 के विधान सभा चुनाव विभिन्न दलों के आलावा निर्दल समेत कुल 10 लोगों ने चुनाव लड़ा था, जबकि 1985 मे कांग्रेस, जनसंघ, कम्युनिस्ट पार्टी, पीएसपी आदि समेत कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे । 2017 के चुनाव मे सपा, बसपा और भाजपा के अलावा चार अन्य निर्दलीय भी मैदान में है। कांग्रेस और सपा के प्रदेश में गठबंधन के चलते मौजूदा चुनाव मे इस पार्टी से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है।
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विधान सभा चुनाव के लिए नामांकन और चुनाव चिह्न वितरण का कार्य समाप्त हो चुका है। जनपद की चार विधान सभा में से एक मात्र सुरक्षित मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संख्या मौजूदा चुनाव में सबसे कम 7 है, जबकि सबसे अधिक प्रत्याशी मधुबन विधान सभा में एक दूसरे के खिलाफ मुकाबिल है़।
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इसके पूर्व 2012 के विधान सभा चुनाव में कुल 17 प्रत्याशी, 2007 मे चौदह, 2002 के चुनाव में नौ, 1996 में भी नौ 1993 के विधान सभा चुनाव में 15 और 1991 के विधान सभा चुनाव में सबसे अधिक 18 प्रत्याशियों ने जोर आजमाइश की थी। इसके अलावा पहले के दो और चुनावों में भी 1989 के विधान सभा चुनाव विभिन्न दलों के आलावा निर्दल समेत कुल 10 लोगों ने चुनाव लड़ा था, जबकि 1985 मे कांग्रेस, जनसंघ, कम्युनिस्ट पार्टी, पीएसपी आदि समेत कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे । 2017 के चुनाव मे सपा, बसपा और भाजपा के अलावा चार अन्य निर्दलीय भी मैदान में है। कांग्रेस और सपा के प्रदेश में गठबंधन के चलते मौजूदा चुनाव मे इस पार्टी से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है।
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