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पहले दिन जिला अस्पताल की ओपीडी से नदारद रहे अधिकांश चिकित्सक

Fri, 04 Jun 2021 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 11:51 PM IST
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Most of the doctors were absent from the OPD of District Hospital on the first day
मऊ। कोरोना संक्रमण काल में जिला अस्पताल में लगभग एक माह से बंद चल रही ओपीडी शासन के फरमान पर शुक्रवार को शुरू हुई। काउंटर पर नगर सहित दूर दराज से आने वाले 154 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया। लेकिन फिजिशियन तथा चिकित्सकों के चेंबर बंद रहने से मरीज इधर-उधर भटकते नजर आए। ईएनटी कक्ष में ताला लटक रहा था। अस्पताल के दोनों फिजिशियन का चैंबर बंद मिला। ओपीडी अपराह्न दो बजे तक खोलने का आदेश था। लेकिन दोपहर एक बजे ही ओपीडी से समस्त चिकित्सक गायब मिले। बीमार मरीज चिकित्सकों की राह ताकते रहे। अंत में मरीज थक हारकर बैरंग लौटने को विवश हो गए।
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जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद जिला अस्पताल सहित समस्त सीएचसी व पीएचसी की ओपीडी बंद कर दी गई थी। हालांकि प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी सेवा बंद नहीं की गई थी। सरकारी ओपीडी बंद होने से नगरीय तथा ग्रामीण क्षेेत्रों में रहने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ी थी। एक्टिव केस की संख्या कम होने के बाद शासन की तरफ से सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी खोलने का आदेश जारी था। शुक्रवार को ओपीडी खुली, लेकिन ओपीडी में दो से तीन चिकित्सक बैठे जरूर, लेकिन एक से डेढ़ घंटे बैठकर अपना काम पूरा कर घर का रास्ता पकड़ लिया।
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अपराह्न एक बजे तक ओपीडी के सभी चैंबर से चिकित्सक नदारद मिले। अपराह्न एक बजे तक ओपीडी में दो फिजिशयन का चैंबर खाली मिला। ईएनटी कक्ष में ताला लटक रहा था। जनरल सर्जन कक्ष बंद मिला। जबकि रजिस्ट्रेशन काउंटर तथा दवा वितरण का काउंटर खुला था। लेकिन सभी ओपीडी कक्ष में चिकित्सक नदारद मिले। ओपीडी कक्ष के सामने कोई स्लीप चस्पा नहीं की गई थी। मरीज ओपीडी के सामने बैठकर चिकित्सक का इंतजार करते रहे। इस बाबत सीएमएस डॉ. बृज कुमार का कहना था कि शासन के आदेश पर ओपीडी में चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। यदि ड्यूटी में कोई चिकित्सक लापरवाही करता मिला तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
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कक्ष के सामने चिकित्सक की राह ताकते रहे मरीज:
मऊ। शासन की तरफ से सरकारी अस्पतालों में ओपीडी खोलने के फरमान पर नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों से आए मरीजों को शुक्रवार को मायूसी हाथ लगी। कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के पूराघाट से इलाज कराने आई पूनम मौर्य ने बताया कि फिजिशियन को दिखाने आई थी। चिकित्सक के चैंबर के सामने कोई सूचना भी चस्पा नहीं की गई थी। एक बजे तक इंतजार किया लेकिन चिकित्सक नहीं आए। पूरा दिन बेकार हो गया। कोपागंज से आई लाली गुप्ता का कहना था कि ईएनटी डाक्टर को दिखाने आई थी, लेकिन चैंबर में ताला लटका रहा। वापस जाना पड़ा। रुबी का कहना था कि बच्चे को दिखाना था, लेकिन एक बजे तक चिकित्सक का इंतजार करती रही। ताजोपुर के रजत का कहना था कि ओपीडी में दिखाने आया था, लेकिन चिकित्सक कब बैठेंगे पता नहीं चल पा रहा है।
वहीं शासन की तरफ से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त बनाने के लिए जिले में नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 42 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की गई है। शासन की तरफ से समस्त सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी शुरू करने का फरमान जारी किया गया तो शुक्रवार को स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज पहुंचे तो लोगों को मायूसी दिखी। अव्यवस्था का माहौल रहा। चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित दिनचर्या से मरीजों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ा।
मुहम्मदाबादगोहना संवाददाता अनुसार पहले दिन चिकित्सक ओपीडी में नजर आए। मध्याह्न बाद तक 50 मरीजों का इलाज किया गया। फतहपुर मंडाव संवाददाता के अनुसार पहले दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अव्यवस्था का बोलबाला रहा। मात्र 34 मरीजों का ही इलाज हो सका।

रानीपुर संवादाता के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेें सुविधाओं का अभाव रहा। मात्र 25 मरीजों का ही इलाज हो सका। रतनपुरा संवाददाता के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का अभाव रहा। यहां मात्र 22 मरीज ही देखे गए। चिरैयाकोट संवाददाता के अनुसार पहले दिन ओपीडी शुरू हुई, लेकिन प्रचार प्रसार न होने के चलते मरीजों की संख्या नाम मात्र रही। दोहरीघाट संवाददाता के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों का अभाव रहा। मात्र 76 मरीज ही देखे जा सके थे।
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