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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   More than 19000 revenue cases pending, disposal less than standard in Ghosi and Madhuban

Mau News: 19000 से ज्यादा राजस्व वाद लंबित, घोसी और मधुबन में निस्तारण मानक से कम

Sat, 13 Jul 2024 06:43 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2024 06:43 AM IST
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More than 19000 revenue cases pending, disposal less than standard in Ghosi and Madhuban
जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने शुक्रवार को जूम मीटिंग से पीठासीन अधिकारियों की बैठक की। इस दौरान विभिन्न धाराओं में लंबित वादों के निस्तारण की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पाया कि जनपद में 19 हजार से भी ज्यादा राजस्व वाद विभिन्न धाराओं में लंबित है। जिस पर जिलाधिकारी ने गंभीर रूप अपनाते हुए लंबित वादों विशेष कर तीन- पांच वर्ष से अधिक के वादों के दिन प्रतिदिन सुनवाई करते हुए निस्तारण करने के निर्देश दिया।
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इस दौरान जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी,एडीएम, एसडीएम, एसडीएम न्यायिक,तहसीलदार, नायब तहसीलदार के न्यायालय में लंबित वादों की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा के दौरान नायब तहसीलदार कोर्ट घोसी एवं मधुबन में वादों का निस्तारण मानक से भी कम होने पर माह के अंत तक निस्तारण के निर्देश दिया। साथ ही अन्यथा की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जिन तहसीलदार कोर्ट में ज्यादा लंबित वाद हैं, उन्हें नायब तहसीलदारों को भी सौंप जाने के निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने 5 वर्ष से अधिक 2180 लंबित मामलों में जिलाधिकारी ने अनावश्यक देरी न करने को कहा। दिन प्रतिदिन सुनवाई कर मामलों का निस्तारण की बात कही। कहा कि जांच आख्या भेजने में देरी करने वाले संबंधित लेखपाल अथवा कानूनगो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस माह के अंत तक वादों के निस्तारण की स्थिति न सुधरने पर संबंधित पीठासीन अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की चेतावनी डीएम ने दी।
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यह है वर्तमान में जिले में वादों के निस्तारण की स्थिति
मऊ।बैठक में पाया गया कि मऊ में वादों के निस्तारण का प्रतिशत 91.59 है। जिलाधिकारी ने इसे जुलाई माह के अंत तक कम से कम 93 प्रतिशत लाने के निर्देश दिया। समीक्षा के दौरान जिला अधिकारी ने धारा 24, धारा 34, धारा 80 एवं धारा 116 के प्रकरणों को लंबा खींचने को औचित्यहीन बताते हुए इसमें तत्काल निर्णय लेते हुए इन वादों को निस्तारित करने को कहा। उन्होंने समस्त पीठासीन अधिकारियों को राजस्व वादों के निस्तारण में अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने पर माह के अंत में उनका उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। जनपद मुख्यालय छोड़ने की स्थिति में विशेष कर हाई कोर्ट के मामलों में उन्होंने एक ही अधिकारी को नामित करने को कहा जो समस्त तहसीलों के मामलों को का हाई कोर्ट में पैरवी करें। उन्होंने कोर्ट ना चलने का बहाना नहीं बनाने को कहा।
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