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Mau News: अलम, ताबूत के जुलूस के माध्यम से दिया समरसता का संदेश
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बड़ागांव में नौव्हा पढ़ते अकीदतमंद।संवाद
घोसी नगर के बड़ागांव शिया मोहल्ले में मुहर्रम की पांचवीं तारीख पर अंजुमनों ने अलम एवं ताबूत का जुलूस निकाला। नौहाख्वानी और मातम से माहौल गमगीन रहा।
अकीदतमंदों ने शिरकत की और कर्बला के शहीदों को याद किया गया। जुलूस परंपरागत मार्गों से होकर शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, जबकि पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रही।
जुलूस का शुभारंभ स्वर्गीय मुहम्मद शरीफ के घर से हुआ और निर्धारित रास्ते से होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सदर इमामबाड़ा बड़ागांव पर पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए मातम किया।
अंजुमन मासूमिया कदीम के अलमदार हुसैन, जफर मेहदी, अरमान और निजबुल हसन ने हजरत इमाम हुसैन एवं कर्बला के शहीदों की याद में मातम, नौहाख्वानी, मर्सिया और दुआओं का आयोजन कर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
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उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, मानवता और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के संदेश को आत्मसात करने का पर्व है। कर्बला की घटना यह सिखाती है कि सिद्धांतों और इंसानियत की रक्षा के लिए हर प्रकार का त्याग स्वीकार्य होना चाहिए।
जुलूस में शामिल उलेमा एवं धर्मगुरुओं ने इमाम हुसैन की शहादत को मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने की अपील की। इस अवसर पर दुरूल हसन, मुबारक हुसैन, साजिद हुसैन, अली हैदर, नूर मुहम्मद, आफताब अहमद आदि शामिल रहे।
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अकीदतमंदों ने शिरकत की और कर्बला के शहीदों को याद किया गया। जुलूस परंपरागत मार्गों से होकर शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, जबकि पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रही।
जुलूस का शुभारंभ स्वर्गीय मुहम्मद शरीफ के घर से हुआ और निर्धारित रास्ते से होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सदर इमामबाड़ा बड़ागांव पर पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए मातम किया।
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अंजुमन मासूमिया कदीम के अलमदार हुसैन, जफर मेहदी, अरमान और निजबुल हसन ने हजरत इमाम हुसैन एवं कर्बला के शहीदों की याद में मातम, नौहाख्वानी, मर्सिया और दुआओं का आयोजन कर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
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उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, मानवता और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के संदेश को आत्मसात करने का पर्व है। कर्बला की घटना यह सिखाती है कि सिद्धांतों और इंसानियत की रक्षा के लिए हर प्रकार का त्याग स्वीकार्य होना चाहिए।
जुलूस में शामिल उलेमा एवं धर्मगुरुओं ने इमाम हुसैन की शहादत को मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने की अपील की। इस अवसर पर दुरूल हसन, मुबारक हुसैन, साजिद हुसैन, अली हैदर, नूर मुहम्मद, आफताब अहमद आदि शामिल रहे।