घोसी। बड़ागांव स्थित जाफरी मस्जिद के सहन में कर्बला के शहीद इमाम हुसैन के बेटे अली असग़र की याद में शब्बेदारी का आयोजन किया गया। जिसमें उलेमा ने शहीदाने कर्बला के मसायब बयान किए तो वहीं अंजुमनों ने नौहा मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। मजलिस को खिताब करते हुए रांची से आए मौलाना सैयद तहजीबूल हसन ने कहा कि हम अजादारी हुसैन को मनवाने के लिये नही बल्कि हुसैन को पहचनवाने के लिये करते है। यह उसी हुसैन का मातम है की जिस के लिये पैगम्बर ए इस्लाम ने खुत्बे को रोक दिया और कहा की मेरा हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से हूं। शब्बेदारी में मजलिस से पहले नायाब बाक़री और तफहीम हैदर ने पेशख्वानी की। रायपुर छत्तीसगढ़ से आयी अन्जुमन इमामिया रजिस्टर्ड ने दर्द भरे नौहे पेश किए तो मौजूद अजादार रोने लगे। अन्जुमन जाफरिया जलालपूर, अन्जुमन मोहिब्बान ए हुसैन, अन्जुमन अजा ए हुसैन जलालपुर, अन्जुमन हुसैनी मिशन, अन्जुमन मासूमिया क़दीम, अन्जुमन असीराने कर्बला एव मशहूर नौहख्वा जनाब रेहान जलालपुरी ने भी नौहख्वानी पेश कर कर्बला के शहीदो को पुरसा दिया। शब्बेदारी का संचालन मौलाना शफकत तक़ी ने किया। इस दौरान मेहंदी अब्बास, नूर मोहम्मद, मीसम अब्बास, रजीउल जाफर, मो अब्बास, मोहम्मद अली के साथ ही काफी संख्या में अजादारों की मौजूदगी रही।