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महाकुंभ : डीजल खपत की तुलना में 10% कम हुई डिपो की इनकम
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मऊ। महाकुंभ के दौरान 12 जनवरी से 27 फरवरी तक डीजल खपत की तुलना में मऊ डिपो की इनकम 10 फीसदी कम हुई। ये आंकड़ा अधिक हो सकता था, लेकिन शाही स्नान के एक दिन पहले और दो दिन बाद तक हाईवे पर बसें जाम में फंसी रह गईं। जिसके चलते डीजल खपत की तुलना में इनकम कम हुई।
इस दौरान डीजल की खपत तो हुई लेकिन यात्री उतने ही रहे। सामान्य दिनों में 30 दिन में 54 रोडवेज बसों को चलाने में 12 हजार लीटर के छह टैंकर डीजल खपत होती है। लेकिन महाकुंभ के दौरान केवल 47 दिन में ही 54 बसों में 12 टैंकर यानी 1.44 लाख लीटर डीजल खपत हुई।
12 हजार लीटर के एक टैंकर के लिए परिवहन निगम 10,56,000 रुपये वहन करता है। इस तरह 12 टैंकर के लिए 1,26,72,000 रुपये खर्च हुए। वहीं 47 दिन में मऊ डिपो की इनकम 1.47 करोड़ रुपये रही। इसमें अनुबंधित बसों की इनकम भी शामिल है, जबकि इन बसों को परिवहन निगम द्वारा डीजल नहीं दिया जाता है, इन्हें खुद ही डीजल भरवाना होता है और चालक भी प्राइवेट होता है।
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मऊ डिपो में 64 बसें हैं, इनमें 10 अनुबंधित बसें हैं, जो लोकल रूटों पर चलती हैं। रोडवेज बसों की तरह इनका भी हर दिन का पूरा इनकम डिपो कार्यालय में जमा होता है और हर माह परिवहन निगम कुछ फीसदी हिस्सा इन्हें देता है।
सबसे ज्यादा 11 फरवरी को हुई इनकम
महाकुंभ में पहला स्नान 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा और दूसरा 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन था। 12 जनवरी को 5,41,715 रुपये, 13 जनवरी को 5,63,914 रुपये, 14 जनवरी को 5,47,290, 15 जनवरी को 5,50,436 रुपये इनकम थी। वहीं तीसरा स्नान 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन था। 28 जनवरी को 5,35,746, 29 जनवरी को 7,58,856, 30 जनवरी को 6,26,696 रुपये थी। चौथा स्नान दो फरवरी को बसंत पंचमी को था, इस दौरान एक फरवरी को 4,36,663, दो फरवरी को 4,26,233, तीन फरवरी को 5,09,230 रुपये थी।
पांचवा शाही स्नान 12 फरवरी को था। 11 फरवरी को इनकम 8,27,752, 12 फरवरी को 6,10,062, 13 फरवरी को 8,28,698 रुपये थी। अंतिम स्नान 26 फरवरी को था, इन दौरान 25 फरवरी को 8,22,174, 26 फरवरी को 7,67,781 और 27 फरवरी को 3,67,224 रुपये इनकम थी।
महाकुंभ के दौरान शासन की मंशा के अनुसार निरंतर चलती रहीं। डिपो का इनकम काफी अच्छा रहा। हालांकि हाइवे पर वाहनों की संख्या अधिक होने पर कुछ बसें जाम में फंसी रहीं। इस चालक और परिचालक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाते रहे। - हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ डिपो
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इस दौरान डीजल की खपत तो हुई लेकिन यात्री उतने ही रहे। सामान्य दिनों में 30 दिन में 54 रोडवेज बसों को चलाने में 12 हजार लीटर के छह टैंकर डीजल खपत होती है। लेकिन महाकुंभ के दौरान केवल 47 दिन में ही 54 बसों में 12 टैंकर यानी 1.44 लाख लीटर डीजल खपत हुई।
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12 हजार लीटर के एक टैंकर के लिए परिवहन निगम 10,56,000 रुपये वहन करता है। इस तरह 12 टैंकर के लिए 1,26,72,000 रुपये खर्च हुए। वहीं 47 दिन में मऊ डिपो की इनकम 1.47 करोड़ रुपये रही। इसमें अनुबंधित बसों की इनकम भी शामिल है, जबकि इन बसों को परिवहन निगम द्वारा डीजल नहीं दिया जाता है, इन्हें खुद ही डीजल भरवाना होता है और चालक भी प्राइवेट होता है।
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मऊ डिपो में 64 बसें हैं, इनमें 10 अनुबंधित बसें हैं, जो लोकल रूटों पर चलती हैं। रोडवेज बसों की तरह इनका भी हर दिन का पूरा इनकम डिपो कार्यालय में जमा होता है और हर माह परिवहन निगम कुछ फीसदी हिस्सा इन्हें देता है।
सबसे ज्यादा 11 फरवरी को हुई इनकम
महाकुंभ में पहला स्नान 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा और दूसरा 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन था। 12 जनवरी को 5,41,715 रुपये, 13 जनवरी को 5,63,914 रुपये, 14 जनवरी को 5,47,290, 15 जनवरी को 5,50,436 रुपये इनकम थी। वहीं तीसरा स्नान 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन था। 28 जनवरी को 5,35,746, 29 जनवरी को 7,58,856, 30 जनवरी को 6,26,696 रुपये थी। चौथा स्नान दो फरवरी को बसंत पंचमी को था, इस दौरान एक फरवरी को 4,36,663, दो फरवरी को 4,26,233, तीन फरवरी को 5,09,230 रुपये थी।
पांचवा शाही स्नान 12 फरवरी को था। 11 फरवरी को इनकम 8,27,752, 12 फरवरी को 6,10,062, 13 फरवरी को 8,28,698 रुपये थी। अंतिम स्नान 26 फरवरी को था, इन दौरान 25 फरवरी को 8,22,174, 26 फरवरी को 7,67,781 और 27 फरवरी को 3,67,224 रुपये इनकम थी।
महाकुंभ के दौरान शासन की मंशा के अनुसार निरंतर चलती रहीं। डिपो का इनकम काफी अच्छा रहा। हालांकि हाइवे पर वाहनों की संख्या अधिक होने पर कुछ बसें जाम में फंसी रहीं। इस चालक और परिचालक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाते रहे। - हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ डिपो